बाजरा के साथ मूंग-मोठ की बम्पर बुवाई को तैयार थार

-धरतीपुत्र तैयार, बस बारिश का इंतजार

By: Dilip dave

Published: 18 Jun 2021, 12:17 AM IST

बाड़मेर. थार की धरा अब बारिश के इंतजार में है। प्री मानसून की बारिश आए या फिर मानसून सक्रिय हो इस इंतजार में धरतीपुत्र है। गांव-गांव में खरीफ की बुवाई होगी जिसके चलते करीब १९ लाख हेक्टेयर में बुवाई का लक्ष्य है।

सबसे ज्यादा नौ लाख हेक्टेयर में बाजरा बोया जाएगा तो चार लाख हेक्टेयर में ग्वार और साढ़े तीन लाख हेक्टेयर में मोठ की बुवाई होगी।

बाड़मेर जिला कृषि प्रधान है। यहां की ६८९ ग्राम पंचायतों के करीब चौबीस हजार गांवों में खरीफ की बुवाई होती है। एेसा कोई गांव नहीं है जहां खरीफ की फसल नहीं बोई जाती है। खरीफ की फसलें बारिश पर निर्भर रहती है इसलिए अब किसान बारिश का इंतजार कर रहे हैं।

इधर, कृषि विभाग के अनुसार करीब उन्नीस लाख हेक्टेयर में खरीफ की बुवाई होनी है। सर्वाधिक बुवाई बाजरा की होगी जबकि मूंग, मोठ और ग्वार की भरपूर बोया जाएगा। बाजरा नौ लाख हेक्टेयर में, मोठ-मूंग भी भरपूर- खरीफ की बुवाई में सबसे ज्यादा बाजरा की फसल बोई जाएगी जो करीब नो लाख हेक्टेयर में होगी।

चार लाख हेक्टेयर में ग्वार, साढ़े तीन लाख हेक्टेयर में मोठ, एक लाख हेक्टेयर में मूंग की फसल बोई जाएगी।

एेसे में उम्मीद है कि इस बार मौसम अनुकू  ल रहा तो बाजरा, मूंग, मोठ की भरपूर उपज होगी। कोरोना के चलते प्रवासी भी खेती में जुटे- इस बार अभी तक कोरोना संक्रमण के चलते रोजगार के अन्य साधन प्रभावित हो रहे हैं। जिले के प्रवासी लोग जो बाहर मजदूरी पर जाते हैं, वे भी अब घर पर ही है। एेसे में बारिश होते ही वे भी खेतीबाड़ी में जुट जाएंगे। इस पर इस बार पिछले साल की तुलना में ज्यादा हेक्टेयर में बुवाई होने की उम्मीद है। गौरतलब है कि पिछले साल करीब १६.५ लाख हेक्टेयर में खरीफ की बुवाई हुई थी।

अच्छे मानसून की संभावना- मौसम विभाग के अनुसार इस बार सामान्य से अच्छा मानसून रहेगा। एेसे में पर्याप्त बारिश होने की उम्मीद है। बारिश होने से लोग खेती करने में जुट जाते हैं। एेसे में इस बार ज्यादा बुवाई होने की संभावना रहेगी।

ज्यादा बुवाई की उम्मीद- इस बार जिले में करीब १९ लाख हेक्टेयर में बुवाई का लक्ष्य है। अच्छे से सामान्य मानसून की संभावना जताई जा रही है जिसके चलते ज्यादा बुवाई की उम्मीद है। किसानों से अपील है कि वे बेहतर उपज के लिए गुणवत्तायुक्त बीज का उपयोग करें।- डॉ. प्रदीप पगारिया, कृषि वैज्ञानिक केवीके गुड़ामालानी

Dilip dave Desk
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