बाड़मेर. जरूरतमंद परिवारों के लिए लॉक डाउन ने भी रोजगार के द्वार खोले हैं। जिले में बढ़ती मास्क की मांग के चलते विभिन्न स्वयंसेवी संस्थाएं ऐसी महिलाओं को काम दे रही है, जिनकी आर्थिक स्थिति खराब है। प्रति मास्क पांच रुपए की दर से उनको भुगतान हो रहा है। पिछले दस दिन में करीब एक लाख रुपए का भुगतान बतौर मेहनताने के किया गया है। ऐसे में मास्क की कमाई से इन घरों के चूल्हे जल रहे हैं।
कोरोना वायरस के संक्रमण से बचने के लिए मास्क जरूरी है। मास्क की मांग ज्यादा है और पूर्ति कम। इसके चलते अब जिले में मास्क बनाने का कार्य जोरो पर हैं। मास्क बनाने के लिए ऐसी महिलाओं का सहयोग लिया जा रहा है। निकटवती गांव महाबार में एक-दो नहीं आठ-दस महिलाएं मास्क बना रही है। यहां निर्मला, कुटली, तुलसी व परमेश्वरी पिछले दस दिन से मास्क बना रही है। इसी तरह बाड़मेर शहर,बाड़मेर आगोर, मीठड़ा, धनाऊ सहित कई गांवों में जरूरतमंद महिलाओं को मास्क बनाने का कार्य दिया गया है, जिस पर उनको रोजगार मिल रहा है।
प्रति मास्क पांच रुपए- अधिकांश स्वयंसेवी संस्थाएं मास्क बनाने के लिए कपड़ा व अन्य आवश्यक सामग्री महिलाओं के घर भेज रही है। प्रति मास्क महिलाओं को पांच रुपए दिए जा रहे हैं। दिन में पचास-साठ मास्क बना कर महिलाएं तीन-चार सौ रुपए की कमाई कर रही है।
दिहाड़ी मजदूरी छूटी, मास्क से संबंल- लॉक डाउन के चलते दिहाड़ी मजदूरी छूट गई है। ऐसे में ये महिलाएं अपने पति व परिवार को पालने के लिए मास्क बना कर रोजगार प्राप्त कर रही है।
मास्क की कमाई से चल रहा घर- दिहाड़ी मजदूरी छूट गई है। लॉक डाउन के चलते बाहर जा नहीं सकते। ऐसे में मास्क बनाने का कार्य मिला तो घर का खर्चा आराम से चल रहा है। प्रतिदिन तीन-चार सौ रुपए की कमाई हो रही है।- कुटलीदेवी, महाबार
जरूरतमंदों की मदद- केयर्न वेदांता व प्रशासन के सहयोग से लॉक डाउन में जनजागरूकता का कार्य कर रहे हैं। इस दौरान मास्क की अधिक जरूरत रहती है। ऐसे में हमने कुछ जरूरतमंद महिलाओं के सहयोग से मास्क बनाने का कार्य आरम्भ किया है। इससे उन्हें रोजगार मिल रहा है तो जिले में मास्क उपलब्ध हो रहे हैं। - महेश पनपालिया, मुख्य कार्यकारी धारा संस्थान

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