जहां लग रही रिफाइनरी, वहां ग्राम पंचायतों को नहीं मिल रहा एक रुपया

पचपदरा में रिफाइनरी के मेगा प्रोजेक्ट ने पश्चिम से आर्थिक उन्नति के सूरज को उदय किया है लेकिन जहां ये सूर्योदय हुआ है वहां तीनों ग्राम पंचायतें पचपदरा, सांभरा और मण्डापुरा के हिस्से अभी तक अंधेरा ही है।

By: Ratan Singh Dave

Updated: 11 Jan 2021, 09:40 AM IST

बाड़मेर/ पचपदरा
पचपदरा में रिफाइनरी के मेगा प्रोजेक्ट ने पश्चिम से आर्थिक उन्नति के सूरज को उदय किया है लेकिन जहां ये सूर्योदय हुआ है वहां तीनों ग्राम पंचायतें पचपदरा, सांभरा और मण्डापुरा के हिस्से अभी तक अंधेरा ही है। प्रदेश के 20 प्रतिशत तेल उत्पादन के बाद 43129 करोड़ की रिफाइनरी के मेगा प्रोजेक्ट बाद इन ग्राम पंचातयों को देश की स्मार्ट ग्राम पंचायतें होने की आस बंधाए हुए है लेकिन दो साल बाद विकास का मैप भी तैयार नहीं हुआ है। प्रधानमंत्री ने 17 जनवरी 2018 को कार्य शुभारंभ किया था और मुख्यमंत्री रिफाइनरी की मॉनीटरिंग को दो साल पहले अपने हाथ में ले चुके है लेकिन इन ग्राम पंचायतों के हिस्से तो अभी विकास की चर्चा भी नहीं आई है।

ग्राउण्ड रिपोर्ट

ग्राम पंचायत पचपदरा
-कस्बे की आबादी 10 हजार से अधिक है। 20 सफाई कर्मंचारी है, लेकिन अस्थाई व कम मानदेय होने के चलते वे भी काम में रूचि नहीं लेते है। कस्बे की सबसे बड़ी समस्या दूषित पानी की निकासी को लेकर है, दूषित पानी की निकासी करने को लेकर पंचायत के पास संसाधन नहीं है। पंचायत को केन्द्र सरकार की एफएफसी योजना से 13 लाख रूपए मिले थे, इनमें से पंचायत ने पानी, स्वच्छता समेत अन्य कार्यों पर अधिकांश रूपए व्यय कर दिए है। पचपदरा ग्राम पंचायत में 19 वार्डं है। राज्य सरकार की विभिन्न योजनाओं से स्वीकृत होने वाली राशि लंबे समय से अटकी हुई है।

ग्राम पंचायत मंडापुरा-
मंडापुरा ग्राम पंचायत का 2015 के पंचायतीराज चुनाव के वक्त गठन हुआ था। पंचायत की आबादी करीब 10 हजार से अधिक है। पंचायत के 7 में से 3 वार्डों में टूटी-फूटी नालियां बनी हुई है, शेष 4 वार्ड में नालियों का अता-पता ही नहीं है। सडक़ें भी क्षतिग्रस्त हालत में है। पंचायत को एक साल में 14 लाख रूपए का बजट मिला है। इनमें से विद्युतीकरण, सफाई व्यवस्था, नाली निमाज़्ण, शौचालय निर्माण में 6 लाख रूपए से अधिक खर्च किए जा चुके है। पंचायत के पास एक भी सफाई कर्मचारी नहीं है।

ग्राम पंचायत सांभरा
- सांभरा ग्राम पंचायत में पूरी रिफाइनरी का निर्माण हो रहा है। सबसे खराब स्थिति भी इस ग्राम पंचायत की है। मुख्य सडक़ व ग्राम पंचायत के बीच सडक़ बनाने का प्रस्ताव पिछले एक साल से धूल फांक रहा है, स्थिति यह है कि ग्रामीणों को पंचायत मुख्यालय जाने के लिए रिफाइनरी की टाउनशिप कॉलोनी में बनी सडक़ से निकलना पड़ता है। गांव में डामर की सड़क देखने को भी नसीब नहीं है। सफाई कर्मचारी भी पंचायत के पास नहीं है। पंचायत को एक साल में 15 लाख रुपए सरकार से मिले है। इसमें पेयजल, टांका निर्माण व सामुदायिक शौचालय निर्माण पर 10 लाख रूपए व्यय किए जा चुके है।

व्यू- गांव के बिल्कुल पास रिफाइनरी के अधिकारियों-कर्मचारियों के लिए कॉलोनी बन रही है, लेकिन अभी तक गांव का कोई विकास नहीं हुआ है। गांव का अच्छा विकास होना चाहिए। - मांगीलाल भील, निवासी सांभरा

रिफाइनरी में काम करने वाले अधिकांश लोग मंडापुरा गांव में रहते है। गांव में अभी तक नालियों का निर्माण भी नहीं हुआ है। सडक़ों पर गंदा पानी फैला हुआ रहता है। सरकार को गांव के विकास पर खाका तैयार कर काम करवाना चाहिए। - मनीष खारवाल, निवासी मंडापुरा

रिफाइनरी की स्थापना से पचपदरा का नाम देश-दुनिया में चर्चित हो गया। सरकार को इन गांवों के विकास के लिए विशेष कार्ययोजना बना काम करना चाहिए, ताकि आने वाले समय अच्छा विकास का सपना साकार हो सकें। - महेन्द्रसिंह, निवासी पचपदरा

Ratan Singh Dave
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