क्या प्रधानमंत्री देंगे राजस्थान-गुजरात को यह बड़ी सौगात

जैसलमेर-बाड़मेर-भाभर रेलवे लाइन को लेकर एक बार फिर प्रधानमंत्री तक बात पहुंची है और प्रदेश के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने ठोस पैरवी करते हुए कहा कि बाड़मेर में रिफाइनरी, तेल गैस के भण्डार और आर्थिक उन्नति आ रही है। देश का 20 प्रतिशत तेल उत्पादन बाड़मेर कर रहा है।

By: Ratan Singh Dave

Published: 08 Jan 2021, 09:16 AM IST

क्या प्रधानमंत्री देंगे राजस्थान-गुजरात को यह बड़ी सौगात
-20 प्रतिशत तेल दे रहा बाड़मेर, रेल लाइन बाड़मेर का हक
- प्रधानमंत्री ने बजट के लिए देश के मुख्यमंत्रियों की बात
- मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने कहा रेलवे लाइन जरूरी
फेक्ट फाइल
- 1996 में प्रथम प्रस्ताव
- 1999 में संसद में हुई पैरवी
- 2003 में किया गया सर्वे
- 2009 में सर्वे हुआ पूर्ण
- 2017 में केन्द्रीय परिवहन मंत्री ने की थी घोषणा
बाड़मेर पत्रिका.
जैसलमेर-बाड़मेर-भाभर रेलवे लाइन को लेकर एक बार फिर प्रधानमंत्री तक बात पहुंची है और प्रदेश के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने ठोस पैरवी करते हुए कहा कि बाड़मेर में रिफाइनरी, तेल गैस के भण्डार और आर्थिक उन्नति आ रही है। देश का 20 प्रतिशत तेल उत्पादन बाड़मेर कर रहा है। बाड़मेर को अब इस बहुप्रतिक्षित रेलवे लाइन की सौगात दी जाए। उन्होंने रेलवे बजट में इस रेल लाइन की घोषणा करने का कहा। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और रेल मंत्री पीयुष गोयल रेल बजट से पहले मुख्यमंत्रियों से प्रस्तावों की जानकारी ले रहे थे। इस दौरान मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने राजस्थान की मांग में कहा कि बाड़मेर-जैसलमेर-भाभर रेलवे लाइन का कार्य नहीं हुआ है। बाड़मेर देश का 20 प्रतिशत तेल दे रहा है। यहां प्रदेश की पहली रिफाइनरी लग रही है। तेल-गैस, कोयला और खजिन पदार्थों ने बाड़मेर को प्रदेश की आर्थिक राजधानी बना दिया है। यहां जैसलमेर-बाड़मेर-भाभर रेलवे लाइन जरूरी है।
मोदरा और कांडला से जुड़े
मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने इस रेलवे लाइन के जरिए बाड़मेर के मोदरा और कांडला बंदरगाह से जुडऩे की बात रखी। जिससे तेल और कोयला परिवहन के लिए आसानी होगी। मुख्यमंत्री ने भारतमाल प्रोजेक्ट की बधाई देते हुए कहा कि बॉर्डर की यह रेल लाइन भी बड़ी सौगात होगी।
यह है प्रोजेक्ट
गुजरात के कांडला से भाभर तक 224 और भाभर से जैसलमेर तक 339 किमी तक रेल लाइन बिछाई जानी है। 1996 में यह प्रस्ताव पहली बार आया। 1999 में संसद में इसकी पैरवी की गई। 2003 में इस रेलवे लाइन का सर्वे प्रारंभ किया गया। करीब 500 करोड़ रुपए से सर्वे पूर्ण किया गया। 2009 में सर्वे पूर्ण कर इसको केन्द्र के रेल मंत्रालय को भेजा गया लेकिन 2009 में इसे आर्थिक दृष्टि से घाटे का मानते हुए नकार दिया गया।
2009 के बाद आया बड़ा परिवर्तन
2009 में ही बाड़मेर में तेल का उत्पादन शुरू हुआ और बाड़मेर प्रतिदिन 1.75 लाख बैरल तेल का उत्पादन करने लगा। यहां पॉवर प्रोजेक्ट से बिजली उत्पादन शुरू हुआ तो प्रदेश की पहली रिफाइनरी भी 43129 करोड़ की बाड़मेर में अब निर्माणाधीन है। इसके अलावा एक्सप्रेस हाईवे के लिए प्रस्ताव बना है। ऐसे में अब स्थितियां एकदम बदली है।
2017 में उदयपुर में हुई पैरवी
2017 में केन्द्रीय परिवहन मंत्री नितिन गडकरी ने उदयपुर में आयोजित एक कार्यक्रम में जैसलमेर-बाड़मेर-भाभर रेलवे लाइन का कार्य करवाने की बात कही थी और उन्होंने राज्य सरकार के इस प्रस्ताव को प्रमुखता से लेने का कहा लेकिन इसके बाद बात आगे नहीं बढ़ पाई है।
अब मुख्यमंत्री की पैरवी और प्रधानमंत्री का जुड़ाव
मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने जहां पैरवी की है वहीं खुद प्रधानमंत्री का भी इस रेलवे लाइन से सीधा लगाव है। गुजरात के मुख्यमंत्री रहते हुए प्रधानमंत्री ने इस रेलवे लाइन के लिए प्रस्ताव पर गौर किया था। इसके अलावा मुख्यमंत्री ने यह भी जिक्र किया कि बाड़मेर रिफाइनरी का उद्घाटन प्रधानमंत्री खुद ने किया है।
ये 41 स्टेशन जुड़ेंगे
भाभर, सुवाला, सनेसड़ा, मोरेका, थराद, भोरोल, रतनूरा, कासबी, सरवाना, भादरूपा, चादरड़ी, सिहाटा, भागली, भाऊड़ा, धोरीमन्ना, दूधू, सुआला, बाछड़ाऊ, सनावड़ा, अराली का तला, उण्डखा, महाबार, बाड़मेर, नीम्बला, शिव, गूंगा, नेगरड़ा, सांगड़ और जैसलमेर।

Ratan Singh Dave
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