बाड़मेर. कभी काम से फुर्सत नहीं थी तो अब काम के बाद इस बात की चिंता है कि टाइम पास कैसे हो। लॉक डाउन के बाद शहर बंद होने से लोगों की दिनचर्या ही बदल गई है। पूरे दिन घरों में कैद होने से कामकाजी महिलाओं को पुरुषों, बच्चियों का साथ मिलने से काम जल्दी खत्म हो रहा है, ऐसे में वे बचपन के पुराने खेल गड्डे, लूडो, सतोलिया, लूका छिप्पी, आइस-पाइस जैसे खेल खेलकर समय व्यतित कर रही हैं। पुरुष व युवा एक-दूसरे से सोशल मीडिया के मार्फत हालचाल पूछने के साथ ताश खेलकर टाइम पास कर रहे हैं। घरों के अंदर क्या हो रहा है, इसकी जानकारी पत्रिका ने सोशल मीडिया के मार्फत एकत्रित की।

देशव्यापी लॉक डाउन के चलते घरों में कैद लोग टाइम पास के अलग-अलग तरीके अपना रहे हैं। इन सबके बीच पुरानी परम्परागत खेल, कॉमिक्स व किताबें लोगों के वक्त बीताने के साथी बन चुक हैं। शहर के अधिकांश घरों में महिलाएं घरेलू कार्य निपटाने के बाद राली बनाने, कपड़े रफू करने के साथ भजन-कीतर्न कर वक्त बीता रही है तो तीस से ऊपर की युवतियां गड्डे, ताश, कैरम, ताश खेल कर टाइम पास कर रही हैं। बुजुर्ग भ्री धार्मिक पुस्तकें पढ़ते नजर आ रहे हैं।
कोरोना वायरस संक्रमण को लेकर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने लॉक डाउन की घोषणा की। इसके बाद अनावश्यक रूप से घरों के बाहर आने-जाने पर रोक लग गई है। पिछले दो दिन से अधिकांश घरों से लोग बाहर नहीं निकल नहीं रहे। ऐसे में समय व्यतीत करने के लिए लोग खेल खेलने के साथ घर का काम निपटाने, किताबें पढऩे के साथ पल-पल पर नजर रखने के लिए टीवी देख रहे हैं। शहर के पांचबत्ती चौराहा रोड के निवासी प्रवीण सोनी के अनुसार वे प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी कर रहे थे, ऐेसे में लॉक डाउट के कारण पढ़ाई पर ध्यान दे रहे हैं। उनकी बहनें घरेलू कार्य करने के साथ छोटे-मोटे खेल खेल कर वक्त बीता रही है तो पिताजी की गहनों की दुकान पर भी बैठकर उनका हाथ बंटा रही है। कृष्णानगर निवासी मनोज, मोहित व उनका परिवार घर का कार्य निपटाने के बाद ताश खेलकर वक्त बीता रहा है। वहीं, महिलाएं कुकिंग पर ध्यान दे रही हैं। कई घरों में बिस्तर की खोलियां बनाने,रालियां बनाने में महिलाएं जुटी हुई है।
सज रही हीना, सीख रही भजन- युवतियों व बच्चियों अपना समय मेहंदी सजा कर और सीख कर व्यतित कर रही है तो भजन-कीर्तन व गाने का शौक भी पूरा कर रही है। एक दिन बाद गणगौर का पर्व होने से भी महिलाएं मेहंदी हाथों पर रचा रही है।
बालकॉनी से बाय,हेलो और हाय- कोरोना वायरस के चलते घर से निकलने की पाबंदी के कारण अब पड़ोसी एक-दूसरे से बतियाने के लिए बालकॉनी का उपयोग कर रहे हैं। हाय, हेलो, बाय-बाय सभी बालकॉनी से ही हो रहा है। वहीं, कई जनों ने अपने घरों की रसोई को भी बालकॉनी में ले रखा है ताकि कभी कभार अड़ोसी-पड़ोसी दिख जाए तो रामा-श्यामा भी हो जाए।
बस कोरोना से बचाव- हर किसी को चिंता है तो बस इतनी की कोरोना से उनका बचाव हो जाए। ऐसे में वे गली-मोहल्लों में निकलने से परहेज कर रहे हैं। बारिश के दौरान भी लोग घरों में ही रहे। खास बात यह है कि कई घरों ने पिछले दो दिन से दरवाजा तक नहीं खोला है।
पुरानी दिनों की याद- गड्डे बचपन में महिलाएं खेलती थी, जो बीते दिनों की बात हो गई। अब कोरोना के चलते लॉक डाउन है तो टाइम पास के लिए फिर से महिलाएं गड्डे खेल रही है।

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