श्रमिक प्वाइंट हुए सूने, इनकी फरियाद कौन सुने

- कोरोना के चलते रुके कार्य, दिहाड़ी मजदूरों का छिन गया रोजगार

- बाड़मेर में कई जगह मजदूरों की रहती थी भीड़, वहां छाई विरानी

- गांवों से नहीं आ रहे मजदूर, शहर में हो गया काम बंद

By: Dilip dave

Published: 03 May 2021, 12:28 AM IST

बाड़मेर. जिला मुख्यालय पर बाड़मेर में चौहटन फाटक, सिणधरी चौराहा, गडरारोड चौराहा, राय कॉलोनी रोड एेसे स्थल है जहां पर सुबह आठ बजते ही मजदूरों की लाइन लग जाती है। निर्माण कार्य हो या फिर हम्माली का काम, रंग-रोगन में सहयोग का कार्य या फिर साफ-सफाई काम, हर शहरवासी को पता है कि मजदूर चाहिए तो इन प्वांइट पर मिल जाएंगे, लेकिन कोरोना के कहर के चलते अब ये स्थल सून हैं।

गांवों में मजदूर आ नहीं रहे और जो आ रहे उनको काम नहीं मिल रहा। एेसे में जहां सैकड़ों की तादाद में मजदूर खड़े रहते थे, वहां अब चंद श्रमिक नजर आते हैं।

बढ़ते कोरोना संक्रमण के बीच पहले सरकार ने वीकेंड कफ्र्यू लगाया तो अब धीरे-धीरे इसे बढ़ा कर रेड अलर्ट कफ्र्यू घोषित किया जा रहा है। कफ्र्यू के चलते आवश्यक सामान को छोड़ शेष दुकानें बंद है, जिसका असर दिहाड़ी मजदूरी करने वाले लोगों पर पड़ रहा है।

निर्माण कार्य सामग्री की दुकानें बंद होने से निर्माण कार्य बंद हो गए हैं। एेसे में दिहाड़ी मजदूरी पर संकट पैदा हो गया है। इसका असर प्रतिदिन दिहाड़ी मजदूरी करने वाले श्रमिकों को सहना पड़ रहा है। उनकी मजदूरी बंद हो चुकी है। रोजगार के अभाव में वे गांव व घर में ठाले बैठे हैं।

छाई विरानी, नहीं हो रही पूछ- शहर के जिन श्रमिक प्वाइंट स्थल पर सुबह लोग मजदूरों के लेने के लिए आते थे तो भीड़ लग जाती थी, वहां अब विरानी छाई हुई है। कुछेक मजदूर यहां आ रहे हैं, लेकिन मजदूरी पर लगाने वाला कोई नहीं मिल रहा। एेसे में दो-चार घंटे इंतजार करने के बाद वे निकल रहे हैं। दो-तीन दिन आने के बाद वे बाड़मेर आने के बजाय घर पर रहना ही मुनासिब समझ रहे हैं।

रोजी-रोटी का संकट- मजदूरों को मजदूरी नहीं मिलने से रोजी-रोटी का संकट पैदा हो गया है। गांव में रोजगार की कमी है तो शहर में कामकाज बंद है। एेसे में परिवार को पेट पाले भी कैसे?

करीब आठ सौ मजदूर आते थे शहर, अब चंद-शहर में प्रतिदिन करीब आठ सौ मजदूर आते थे, लेकिन कोरोना के चलते अब चंद लोग ही आ रहे हैं। शहर में भी काम बंद हो चुका है इसलिए इनको भी मजदूरी नहीं मिल रही।

मजदूरी ही नहीं है- शहर में मजदूरी ही नहीं है। यहां कामकाज बंद है तो फिर रोजगार मिलेगा भी कैसे। सरकार ने जिस तरह दो-तीन घंटे आवश्यक वस्तुओं की दुकानें खोलने की इजाजत दी है, वैसे ही निर्माण सामग्री की दुकानें खोलने की भी इजाजत दे।- सलीमखां, दिहाड़ी मजदूर

सरकार करे विशेष इंतजाम- दिहाड़ी मजदूरों का घर प्रतिदिन की मजदूरी पर चलता है। एक दिन भी काम बंद हो जाए तो चूल्हा चौका चलाना मुश्किल हो जाता है। अब को कई दिनों से काम नहीं मिल रहा। सरकार विशेष पैकेज की घोषणा करे।- लक्ष्मण बडेरा, जिलाध्यक्ष कमठा मजदूर यूनियन बाड़मेर

Dilip dave Desk
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