डूब प्रभावितों का दर्द... स्टेट हाईवे कसरावद पुल पर तीन घंटे चक्काजाम, कराया मुंडन

डूब प्रभावितों का दर्द... स्टेट हाईवे कसरावद पुल पर तीन घंटे चक्काजाम, कराया मुंडन
affected by the sinking of Sardar Sarovar Dam celebrated Dhikkar Day

Manish Arora | Updated: 18 Sep 2019, 10:17:28 AM (IST) Barwani, Barwani, Madhya Pradesh, India

डूब गांवों की जल हत्या पर नबआं ने मनाया शोक दिवस, प्रभावितों ने कारंजा से निकाली रैली, डूब गांवों में हुई शोक सभाएं, कहा गुजरात सरकार लोगों की जलहत्या कर मना रही जश्न

बड़वानी. सरदार सरोवर बांध की डूब में आए प्रभावितों ने मंगलवार को धिक्कार दिवस मनाते हुए विरोध प्रदर्शन किया। नर्मदा बचाओ आंदोलन के नेतृत्व में डूब प्रभावितों ने दोपहर में तीन घंटे खंडवा-बड़ौदा स्टेट हाईवे स्थित कसरावद पुल पर चक्काजाम किया। साथ ही यहां डूब प्रभावितों ने सरदार सरोवर बांध की दूसरी बरसी मनाते हुए मुंडन भी करवाया। वहीं, सरदार सरोवर बांध के कारण हो रही गांवों की जल हत्या का विरोध दर्ज कराते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का पुतला भी नर्मदा में बहाया। स्टेट हाईवे पर जाम के दौरान पुल के दोनों ओर सैकड़ों वाहन फंसे रहे। जिसके कारण यात्रियों को परेशान भी होना पड़ा।
नबआं द्वारा बिना पुनर्वास के सरदार सरोवर बांध को भरने और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा डेम साइट पर जन्मदिन मनाने के विरोध में धिक्कार दिवस और शोक सभा का आयोजन किया गया। दोपहर 12 बजे नबआं कार्यकर्ताओं के साथ डूब प्रभावितों और जागृत आदिवासी दलित संगठन के कार्यकर्ताओं ने वाहन रैली निकाली। वाहन रैली के पूर्व कारंजा शहीद स्मारक पर शोक सभा का आयोजन भी हुआ। सभा को संबोधित करते हुए नबआं नेत्री मेधा पाटकर ने कहा कि लोगों को डुबोकर प्रधानमंत्री अपने जन्मदिन का जश्न मना रहे हैं। हम इस बात की निंदा करते हैं और इसे धिक्कारते है। आज भी डूब गांवों में हजारों प्रभावितों का पुनर्वास बाकी है। सभा के बाद रैली निकाली गई, जो शहर में भ्रमण करते हुए डूब ग्राम कसरावद पहुंची। यहां भी शोक सभा हुई।
मवेशियों के साथ किया चक्काजाम
नबआं और डूब प्रभावितों ने दोपहर में कसरावद पुल पर पहुंचकर चक्काजाम कर दिया। इस दौरान डूब प्रभावितों ने बड़वानी की ओर पुल के प्रवेश द्वार पर पालतू मवेशी भी बांध दिए। पुल पर चक्काजाम के दौरान नबआं कार्यकर्ता, डूब प्रभावित, सेंचुरी यार्न के कर्मचारी, जागृत आदिवासी दलित संगठन कार्यकर्ताओं ने भजन भी गाए। यहां मेधा पाटकर सहित आदिवासी संगठन की माधुरी बेन ने भी डूब प्रभावितों को संबोधित किया। इस दौरान डूब प्रभावित देवराम कनेरा, कैलाश भाई, कुवरसिंह ने मुंडन भी करवाया। चक्काजाम के बाद नर्मदा बचाओ आंदोलन और डूब प्रभावितों ने प्रधानमंत्री का पुतला भी नर्मदा में बहाया।
एंबुलेंस, स्कूल वाहनों को दिया निकलने
चक्काजाम के दौरान स्टेट हाईवे के पुल पर दोनों ओर सैकड़ों वाहन खड़े रहे। पुलिस ने यहां बेरिकेड्स लगाकर दोनों ओर से ट्रॉफिक रोक दिया था। जाम में फंसे कई स्कूल वाहनों और एंबुलेंस के लिए नबआं कार्यकर्ताओं ने रास्ता खोल दिया था। वहीं, निजी वाहनों से बीमारों को ले जाने वाले वाहनों को भी निकाला गया। दोपहर दो बजे से शाम 5 बजे तक स्टेट हाईवे पर पुल के दोनों ओर वाहनों की लंबी कतारें लग गई। सबसे ज्यादा परेशानी यात्री बसों में सवार यात्रियों की हुई। वहीं, सैकड़ों दो पहिया वाहन भी जाम में फंसे रहे। नबआं नेत्री मेधा पाटकर का कहना था कि हम किसी को परेशान नहीं करना चाहते, लेकिन डूब प्रभावितों की भी मजबूरी है। इसलिए सांकेतिक तौर पर कुछ समय के लिए ये चक्काजाम किया जा रहा है।
केंद्र के साथ मप्र सरकार को भी लिया आड़े हाथ
विरोध प्रदर्शन के दौरान नबआं ने केंद्र सरकार, गुजरात सरकार के साथ ही मप्र की कांग्रेस सरकार को भी आड़े हाथ लिया। नबआं नेत्री मेधा पाटकर ने कहा कि केंद्र और गुजरात सरकार की मनमानी के कारण आज हजारों परिवार बिना पुनर्वास के उजड़ रहे हैं। बांध के कारण बड़वानी, धार में भूकंप का खतरा भी सिर पर आ चुका है। भूकंप धीरे-धीरे बड़वानी की ओर बढ़ता जा रहा है। शिवराज सरकार ने तो डूब प्रभावितों के साथ धोखा किया ही है। मप्र सरकार भी डूब प्रभावितों को छल रही है। आठ माह से हम पुनर्वास की मांग कर रहे हैं और सरकार अब जागी है। सरकार के मंत्री भी डूब आने के बाद अब डूब प्रभावितों के बीच पहुंच रहे है।
मेधा पाटकर सहित 12 नामजद व अन्य पर केस दर्ज
नबआं द्वारा कसरावद पुल पर किए गए चक्काजाम को लेकर बड़वानी पुलिस ने 12 नामजद सहित अन्य पर प्रकरण दर्ज किया है। पुलिस ने बताया कि चक्काजाम के कारण आमजन को परेशानी का सामना करना पड़ा। इस दौरान नबआं के कार्यकर्ताओं को समझाइश भी दी गई थी, लेकिन उन्होंने चक्काजाम खत्म नहीं किया गया। इस मामले में पुलिस ने आईपीसी की धारा 147, 149, 341 के तहत नबआं नेत्री मेधा पाटकर, राहुल यादव, पवन यादव, देवराम कनेरा, मुकेश भगोरिया, कमला यादव, सनोबर बी, वाहिद मंसूरी, राजा, रोहित राजपूत, कैलाश अवास्या, कैलाश ड्रायवर व अन्य के खिलाफ केस दर्ज किया।
मंत्री के सामने रख दी कच्ची रोटियां, पानी वाली दाल
इस तरह का खाना हम डूब प्रभावितों को मिल रहा है। कच्ची रोटियां और पानी वाली पतली दाल खिलाई जा रही है। मंगलवार को अस्थाई पुनर्वास पाटी नाका टीन शेड में एनवीडीए मंत्री सुरेंद्रसिंह बघेल के सामने विस्थापितों का दर्द फूट पड़ा। यहां डूब प्रभावितों ने खाने से लेकर अन्य व्यवस्थाओं से अवगत कराया। वहीं, डूब के बाद भी पुनर्वास नीति का लाभ नहीं मिलने की बात भी विस्थापितों ने कही। इस पर मंत्री बघेल ने कई विस्थापितों को मौके पर ही लाभ दिलाने के लिए कलेक्टर व एसडीएम को निर्देशित किया। मंगलवार को मंत्री बघेल ने डूब प्रभावित गांवों का निरीक्षण किया और पुनर्वास स्थलों की व्यवस्थाएं भी देखी।
सुबह 10.30 बजे मंत्री बघेल पाटी नाका स्थित टीन शेड पहुंचे। यहां कई डूब गांवों के करीब एक हजार परिवार अस्थाई पुनर्वास के लिए लाए गए हैं। यहां भोजन की गुणवत्ता को लेकर मंत्री ने निर्देश दिए कि खाना टीन शेड में ही बनाया जाए। दूर डूब गांवों से आए बच्चों की पढ़ाई के लिए अस्थाई पुनर्वास के पास स्थित स्कूल में एडमिशन दिलाने, टीन शेड से चार किमी दूर की गई मवेशियों की व्यवस्था टीन शेड के पास ही कराने के निर्देश दिए। यहां कई परिवारों को उन्होंने तत्काल प्लाट और 5.80 लाख के अनुदान देने के निर्देश भी कलेक्टर को दिए। 12 अगस्त को राजघाट टापू जाते समय करंट लगने से मृतक चिमन दरबार की पत्नी वैशाली को भी तत्काल प्लाट उपलब्ध कराने के साथ ही संविदा पर नौकरी दिए जाने के निर्देश भी कलेक्टर अमित तोमर को दिए।
पुनर्वास स्थलों और डूब ग्राम पहुंचे मंत्री
पाटी नाका टीन शेड में प्रभावितों से चर्चा के बाद मंत्री बघेल पुर्नवास स्थल पेंड्रा, भवती, सौंदूल, जांगरवा, बिजासन, मोरकट्टा में निरीक्षण करने पहुंचे। यहां रहवासियों ने पुर्नवास स्थलों पर बनी नालियों, सड़कों को ओर व्यवस्थित कराने, शमशान घाट की व्यवस्था कराने की मांग की। इसके बाद मंत्री बघेल ने डूब प्रभावित ग्राम छोटी कसरावद, पिछोड़ी, सोंदूल, जांगरवा, भवती, अमलाली, बिजासन, मोरकट्टा पहुंचकर डूब प्रभावितों से चर्चा कर उनकी समस्याओं को जाना। इस दौरान ग्रामीणों ने बताया कि कई ग्राम के मोहल्ले टापू बन गए है। वहीं कई ऐसे मकान भी डूब रहे है, जिन्हें डूब की सीमा से बाहर बताया गया था। इस पर बघेल ने बताया कि जिन ग्रामों में कोई मोहल्ला टापू बन गया है, वहां आकस्मिक रूप से पहुंच मार्ग बनाकर आवागमन की व्यवस्था कराई जा रही है। वहीं ऐसे मकान या जमीन जो अभी डूब की सीमा से बाहर थे, लेकिन डूब रहे है। उनका सर्वे कराकर प्रकरण तैयार कराकर मुआवजा दिलवाया जाएगा।
सुबह मंत्री को दिखाई पतली दाल, रात में आ गई कीड़े वाली दाल
पाटी नाका टीन शेड में मंगलवार को विस्थापितों ने एनवीडीए मंत्री सुरेंद्र बघेल के सामने भोजन को लेकर शिकायत की थी। यहां डूब प्रभावितों ने मंत्री को कच्ची रोटियां और पानी वाली पतली दाल भी दिखाई थी। मंत्री ने निर्देश दिए थे कि भोजन टीन शेड में ही बनाया जाए। मंत्री के जाते ही आदेश भी हवा हो गए। सुबह तो पतली दाल डूब प्रभावितों के लिए आई थी। शाम को तो कीड़े वाली दाल भी संबंधित ने भेज दी। दाल देखकर डूब प्रभावितों का आक्रोश बढ़ गया और टीनशेड में जमकर हंगामा किया। इस दौरान रात 8 बजे तक भी कोई जिम्मेदार अधिकारी टीनशेड में नहीं पहुंचा था।
नए सिरे से करवाएंगे सर्वे
हमारी सरकार डूब प्रभावितों को प्लाट और 5.80 का लाभ दिला रही है। 60 लाख और 15 लाख का पैकेज गुजरात सरकार द्वारा दिलवाया जाएगा। पूर्व सरकार के सारे सर्वे फेल हो गए है। हमारी सरकार दोबारा सर्वे करवाकर केंद्र और गुजरात सरकार से नया पैकेज मांगेगी।

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