हर साल नुकसान, यहां फिर भी फसल बीमा से बेरुख किसान

फसलों पर संकट मंडरा रहा है। कुछ क्षेत्रों में कपास को नुकसान पहुंचा है। प्रतिवर्ष ऐसी स्थिति बनती है। फिर भी फसल बीमा से बुरुखी बनी हुई है।

 

By: संजय दुबे

Published: 25 Aug 2017, 10:53 AM IST

सेंधवा. फसल बीमा के प्रति किसानों में अभी जागरुकता का अभाव है। इसके चलते बड़ी संख्या में किसान फसल बीमा की योजना दूरी बनाए हुए हैं। जबकि ब्लॉक क्षेत्र में अक्सर मौसमी कारणों एवं कीटों के हमले से फसलों को नुकसान पहुंचता रहता है। बीते वर्ष भी कम बारिश के चलते फसलों को नुकसान हुआ था। इसके बाद भी फसल बीमा के प्रति जागरुकता नहीं बढ़ रही है। आलम ये है कि लक्ष्य के सापेक्ष कम ही संख्या में क्षेत्र के किसानों ने फसल बीमा कराया है। अब शेष बचे किसानों को शीघ्र फसल बीमा कराने के लिए प्रेरित करने का निर्णय लिया गया है। इस संबंध में बैठक भी आयोजित की गई।

जनपद पंचायत कार्यालय सभागार में गुरुवार को बैठक का आयोजन किया गया। इसमें कृषि विभाग, उद्यानिकी विभाग एवं सहकारी सोसाइटी के अधिकारी शामिल हुए। इसमें कृषि विभाग के उपसंचालक बीएस जमरे ने क्षेत्र के ऋणी एवं अऋणी किसानों के हुए फसल बीमा की समीक्षा की। वरिष्ठ कृषि विस्तार अधिकारी एएस मंडलोई ने बताया खरीफ की फसलों के लिए 11 हजार 152 हेक्टेयर क्षेत्र में 12 हजार 948 किसानों का फसल बीमा कराने का लक्ष्य रखा गया था। इसमें से सिर्फ 7 हजार 971 किसानों ने फसल बीमा कराया है। कम किसानों के फसल बीमा होने पर अधिकारियों से कारण भी पूछे गए। 31 जुलाई तक शेष किसानों के बीमा कराने के निर्देश दिए गए हैं। बैठक में उद्यानिकी विभाग के किसानों की जानकारी भी पूछी गई। 120 किसानों ने बीमा कराया गया है। बैठक में सहकारी सोसाइटियों के अधिकारी भी शामिल हुए। गौरतलब है कि ब्लॉक क्षेत्र में लगभग 28 हजार किसान हैं। जो कपास, सोयाबीन, मक्का की फसल प्रमुख तौर पर उगाते हैं। इनमें से कई किसान उद्यानिकी भी अपना रहे हैं। अब सभी को फसल बीमा के लिए जागरूक किया जाएगा।

किसानों को करेंगे प्रेरित
वरिष्ठ कृषि विस्तार अधिकारी अनारसिंग मंडलोई ने बताया कि फसल बीमा का लक्ष्य अभी पूरा नहीं हुआ है। लक्ष्य के सापेक्ष 4 हजार 9 सौ 77 किसानों का बीमा अभी तक नहीं हुआ है। लक्ष्य पूरा करने के लिए क्षेत्र के किसानों को फसल बीमा का लाभ लेने के लिए प्रेरित किया जाएगा। इसके लिए किसानों को फसल बीमा से होने वाले लाभ के बारे में भी बताएंगे। फसल बीमा कैसे कराएं, कहां कराएं आदि के संबंध में किसानों को जानकारी देकर उन्हें जागरूक भी किया जाएगा।

50 हजार हे. भूभाग में खेती
ब्लॉक क्षेत्र में 50 हजार हे. से अधिक भूभाग में कृषि कार्य किया जाता है। क्षेत्र में की भौगोलिक स्थिति के चलते कुछ खास फसल ही उगाई जाती हैं। इनमें कपास, सोयाबीन, मक्का, चना, उड़द, मूंग, मूंगफली आदि फसलें प्रमुख हैं। इस वर्ष खरीफ के सीजन में कपास एवं मक्का की बड़े पैमाने पर खेती की गई है। इस वर्ष कपास साढ़े 11 हजार हे. में बोई गई है। जो पिछले वर्ष से अधिक है। ज्ञात हो, पिछले वर्ष कपास की फसल को नुकसान हुआ था, फिर भी बोवनी अधिक हुई।

...इधर, सूखी कपास फसल के लिए मक्का बीज वितरण
कपास की फसल सूखने को लेकर कृषि अधिकारियों की टीम ने ग्राम पिसनावल का भी दौरा किया। जहां पाया गया कि कुछ खेतों में कपास की फसल सूख गई है। साथ ही कपास की फसल के पत्ते भी पीले पड़ गए हैं। इसको लेकर कृषि विभाग की ओर से सूख चुकी कपास की फसल की जगह पर मक्का लगाने के लिए अनुदान पर बीज उपलब्ध कराया जा रहा है। साथ ही कपास की जो फसल पूरी तरह से नहीं सूख है, उसके लिए किसानों को उपचार के तरीके भी बताए जा रहे हैं। ज्ञात हो, पिसनावल में भूजलस्तर ज्यादा होने से लगभग ५० एकड़ कपास की फसल अचानक सूखने लगी थी।

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संजय दुबे Desk/Reporting
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