BJP MLA प्रेमसिंह पटेल को मिला कैबिनेट मंत्री का पद

40 साल बाद विधानसभा को मिला कैबिनेट में मंत्री पद, इसके पूर्व बीजेपी से थे शिक्षा मंत्री पटेल, 6 बार चुनाव लडऩे वाले प्रेमसिंह ने 5 बार की है जीत दर्ज, अब बड़वानी से सांसद, राज्यसभा सदस्य के बाद कैबिनेट मंत्री भी, बेरोजगारी और उच्च शिक्षा पर ध्यान देना रहेगा खास

By: vishal yadav

Published: 03 Jul 2020, 08:46 AM IST

बड़वानी. हसमुख और सरल स्वाभाव के धनी भाजपा विधायक प्रेमसिंह पटेल को कैबिनेट में मंत्री पद मिलने के बाद उनके समर्थकों में खुशी की लहर है। उनके मंत्री पद की शपथ लेते ही यहां समर्थकों ने आतिशबाजी कर जश्न मनाया। 40 साल बाद ये ऐसा मौका है जब बड़वानी विधानसभा से कैबिनेट मंत्री बनाया गया है। इसके पहले सांसद गजेंद्रङ्क्षसंह पटेल के पिता उमरावसिंह पटेल विधायक रहते हुए 1977-80 तक शिक्षा मंत्री रहे थे। अब प्रेमसिंह पटेल को केबिनेट में जगह मिली है।
प्रेमसिंह पटेल का राजनीतिक जीवन उनके गांव सुस्तीखेड़ा से 1985 में शुरू हुआ था, तब वे 1090 तक वहां के सरपंच रहे। उसके 1990 से 93 तक वे जनपद उपाध्यक्ष के पद पर रहे। फिर प्रेमसिंह पटेल को विधानसभा चुनाव का टिकट मिला और उन्होंने लगातार चार बार जीत दर्ज करते हुए, 1993-2013 तक विधायकी की। वहीं 2013 के चुनाव में इन्हें हार का सामना करना पड़ा। इस बार फिर प्रेमसिंह पटेल ने चुनाव में जीत दर्ज कर भाजपा की साख बचाई। पांच जिनों में एकमात्र आदिवासी विधायक होने के बाद अब उन्हें कैबिनेट में मंत्री पद दिया गया है। इस मुद्दे को सबसे पहले पत्रिका ने ही उठाया था।
सांसद, राज्यसभा सदस्य के बाद कैबिनेट में धाक
जिले से भाजपा समर्थित सांसद गजेंद्रसिंह पटेल, भाजपा के ही राज्यसभा सदस्य समुेरसिंह सोलंकी के बाद अब प्रेमसिंह पटेल भी मंत्री बन चुके हैं। शहर के तीनों नेताओं के बड़े पदों पर होने के बाद अब जनता ये आस लगाए बैठी है कि अब क्षेत्र के विकास को नए पंख लेंगे। क्षेत्र में उच्च शिक्षा के मामले में कोई बड़े कॉलेज नहीं हैं। तकनीकी, एग्रीकल्चर और मेडिकल की पढ़ाई केे लिए आदिवासी बहुल इलाके के विद्यार्थियों को बाहर जाना पड़ता है। वहीं उद्योगों के अभाव में यहां के मजदूरों को बाहर काम के लिए जाना मजबूरी हो गया है। इन क्षेत्रों में कार्य हो तो लोगों का बहुत फायदा होगा।
मजदूरों का पलायन रोकना है चुनौती
क्षेत्र से हर साल हो रहे हजारों मजदूरों का पलायन रोकना यहां की सबसे बड़ी चुनौती बना हुआ है। पिछले कई सालों से काम के अभाव में यहां के मजदूर गुजरात और महाराष्ट्र पलायन कर जाते है। रोजगार के अभाव में इनकी मजदूरी हो गई है कि इन्हें यहां से जाना पड़ता है। रोजगार मूलक योजनाओं के क्रियांवयन के लिए किसी भी जनप्रतिनिधि ने अब तक कोई सकारात्मक प्रयास नहीं किए है। उसी का कारण है कि यहां के गरीब आदिवासियों को दूसरे प्रदेशों का रूख करना पड़ रहा है। लोगों को रोजगार उपलब्ध कराने के लिए इन्हें प्रयास करने होंगे।
वर्जन...
अभी कोरोना से लडऩा हमारी पहली प्राथमिता है। मजदूरों का पलायान न हो, उसके लिए प्रयास किए जाएंगे। यहां उन्हें काम मिले ऐसा प्रयास करेंगे। वहीं शिक्षा के क्षेत्र में भी काम करेंगे।
-प्रेमसिंह पटेल, विधायक बड़वानी

vishal yadav Reporting
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