हरी पत्तियों की नहीं हड्डियों की शौकीन है ये बकरी

बकरी को हड्डी खाते देख लोग अचंभित हैं। पहली बार लोगों ने मांसाहारी बकरी देखी है। हड्डी नहीं मिलने पर बकरी चिल्लाने लगती है।

By: संजय दुबे

Published: 18 Aug 2017, 01:58 PM IST

सेंधवा. आम वैज्ञानिक धारणा है बकरियां शाकाहारी होती हैं। लेकिन हरा चारा और पत्तियां खाने वाली बकरी अचानक हड्डियां खाना शुरू कर दे और वह भी चारे की तुलना में कहीं ज्यादा तो इसे आप क्या कहेंगे। यकीनन इस बात पर यकीन ही नहीं होगा, लेकिन सेंधवा से करीब 6 किलोमीटर दूर नवलपुरा कांकड़ा फल्या में एक ऐसी बकरी है जो चारा छोड़ कर हड्डियां खाती है।

यह हड्डीखोर बकरी है फल्या में किसानी करने वाले अरमा सिंह की। हालांकि ऐसी ही एक बकरी सेंधवा के निवाली रोड निवासी तफज्जुल के पास थी। उनकी बकरी भी हड्डियां खाती थी, लेकिन करीब चार माह पहले वह बकरी मर गई। कांकड़ा फल्या के अरमा सिंह की बकरी इसलिए खास है कि यह चारे के बजाय हड्डियां ज्यादा खाना पसंद करती है। एक दो दिन हड्डियां नहीं मिले तो यह बकरी बेचैन हो जाती है और जोर जोर से चिल्लाने लगती है। ऐसे में कहीं से भी अरमा सिंह को हड्डियों का इंतजाम करना ही पड़ता है।

चार वर्ष से खा रही हड्डी
अरमा सिंह ने बताया करीब आठ वर्ष पहले वह बकरी का बच्चा खरीद कर लाया था। तभी से यह बकरी उसके पास है। चार साल तक तो बकरी ने सामान्य खानपान ही किया। चार वर्ष पहले एक श्वान ने मुर्गी को मार दिया। उसकी हड्डी इस बकरी ने अचानक की ही चबा ली। उसके बाद से ही इसकी खुराक में हड्डियां शामिल हो गर्इं। पहले तो हम समझ ही नहीं पाए। लेकिन हड्डी नहीं मिलने पर बकरी जोर-जोर से चिल्लाने लगी तो उसे खोल दिया गया। बाहर खेत मेंं उसे हड्डी मिली तो वह उसे खा गई। अरमा ने बताया कि यह घटना मेरे बेटे ने देखी और उसने इधर-उघर से हड्डियां जमा की और बकरी के आगे डाल दी। कुछ देर बाद बकरी सारी हड्डियां खा गई।

हड्डियां बनी मुसीबत
अरमा सिंग ने बताया कि अब बकरी के लिए हड्डियां जमा करना मुसीबत बन गया है। आस पास मरे पशुओं की हड्डियों से काम चल जाता था। लेकिन अब खरीदने की नौबत तक आने लगी है। बकरी चारा खाती है, लेकिन उससे उसका पेट नहीं भरता। ऐसे में दिन-ब-दिन वह दुबली होती जा रह है।

क्या कहते हैं जानकार
अरमा सिंह ने बताया बकरी की इस असामान्य हरकत के बाद उसने पशु चिकित्सक बालकृष्ण बाविस्कर को बुलाकर भी दिखाया था। पशु चिकित्सक बाविस्कर कर कहना है कि वैसे तो बकरियां जो भी चीज सामने होती है मुंह में भर लेती हैं। लेकिन हड्डियां चबा कर खाना अपने आप में हैरत में डालने वाली बात है। उन्होंने बताया कि इस संबंध में यूपी के बरेली में स्थिति आईवीआरआई सेंटर के वैज्ञानिकों को भी जानकारी दी गई है। वह भी इस बकरी का परीक्षण करने की मंशा जता चुके हैं।

संजय दुबे Desk/Reporting
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