लॉकडाउन का असर : किराना सहित अन्य सामग्री उधारी मिलना बंद, किसान परेशान

Covid-19 lockdown effect - हाथ पर हाथ धरे बैठे छोटे किसान, गेहूं का भाव कम, बेकार हो रही सब्जियां

By: KRISHNAKANT SHUKLA

Published: 23 Apr 2020, 12:07 PM IST

बड़वानी : कोरोना संक्रमण को रोकने के लिए देश में लगाए लॉक डाउन से गांव भी अछूते नहीं रहे। ऐसे में किसानों को दोहरी समस्याएं झेलना पड़ रही है। इसमें सबसे अधिक समस्या छोटे किसानों की सामने आ रही हैं, जिनका रकबा कम होने से समर्थन मूल्य पर भी गेहूं नहीं बेच पा रहे है। किसान हाथ पर हाथ धरे बैठे नजर आ रहे हैं। वहीं सब्जी उत्पादन से जुड़े किसानों को परिवार पोषण के लिए कोई विकल्प नहीं मिल पा रहा है।

खेतों में सब्जियों का पर्याप्त उत्पादन हो रहा हैं, लेकिन मंडियां बंद होने से आर्थिक संकट खड़ा हो गया है। वहीं गांवों में आवश्यक सामग्री किराना सहित अन्य वस्तुओं की दुकानों पर उधारियां पूरी तरह बंद हो गई है। ऐसे में किसानों को परिवार पालन के लिए चिंता सताने लगी है। साथ ही भविष्य में खेतों में कैसे उपज-फसल लगाएंगे, इस पर चिंतन शुरु हो गया है।

राजपुर क्षेत्र के ग्राम जोड़ाई के शांतिलाल नरगावे उनके किसानों में शामिल हैं, जिनका पंजीयन समर्थन मूल्य पर गेहूं बिक्री के लिए नहीं हुआ। इसका कारण उनका रकबा सिर्फ चार एकड़ का है। शांतिलाल ने बताया कि पानी की कमी से चार एकड़ में लगाया गेहूं प्रभावित हो गया। लॉक डाउन में दूसरी आजीविका बंद हो गई। शासन की ओर से अब तक कोई राहत नहीं मिली है। वहीं आगामी बारिश में फसल कैसे लगएंगे, इस पर चिंतन कर रहे है।

ग्राम नरावला के मंशाराम जमरे ने बताया कि सीमित मात्रा में सब्जी उगाकर आजीविका चलाते है। लॉक डाउन में सब्जी बिकना बंद हो गई। गांव में भी कोई नहीं खरीद रहा। आजीविका बंद होने से आर्थिक दिक्कतें आ रही है। गांव में किराना सामान की उधारी मिलना बंद हो गई। आगे सब्जी की खेती कैसे करेंगे, यह चिंता खाए जा रही है। वैसे कुछ रकबे में गेहूं लगाया हैं, लेकिन पंजीयन नहीं होने से समर्थन मूल्य पर नहीं बेच सकते। बाहर बेचने पर 1500-16 00 रुपए क्ंिवटल से अधिक भाव नहीं मिलेगा।

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