टीनशेड की बिजली काटी, अंधेरे में गुजर रही डूब प्रभावितों की रातें

दो वर्ष से परेशान हो रहे हैं डूब गावों के लोग, अब तक नहीं हुआ पुनर्वास

By: tarunendra chauhan

Published: 21 Nov 2020, 12:04 PM IST

बड़वानी. सरदार सरोवर बांध के बैक वाटर से बेघर हुए डूब प्रभावित अपने आशियानों की आस में टीनशेड में गुजारा कर रहे हैं। पिछले दो सालों से कई गांवों के लोग अस्थाई टीनशेड में रह रहे हैं। इनकी परेशानियां कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। शहर के पाटी नाका स्थित टीनशेड में पिछले चार दिनों से बिजली कट जाने से यहां के लोगों की रातें अंधेरे में गुजर रही है। बिजली कट जाने के बाद कोई भी जिम्मेदार इनकी सुध लेने को तैयार नहीं है।

डूब आने के बाद से बेघर हुए डूब प्रभावित गांवों से आए परिवार अपने बच्चों के साथ परेशानियों के बीच अपना जीवन यापन करने को मजबूर हैं। बिजली कट जाने के बाद रात के समय इन लोगों को ज्यादा परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। बिजली नहीं होने से दिन ढलने के पहले ही ये लोग खाना बनाने में जुट जाते हैं। वहीं रात के अंधेरे में टीनशेड में जहरीले जीवों का भी डर बना हुआ है। एक तरफ तो प्रदेश के मुख्यमंत्री डूब प्रभावितों की समस्याओं को सुलझाने के बयान दे रहे हैं। वहीं दूसरी तरफ एनवीडीए और जिला प्रशासन के जिम्मेदार टीनशेड में रहने वालों के साथ ऐसा सुलूक कर रहे हैं। अब आखिर बेघर हुए ये लोग किससे उम्मीद करें।

कई लोगों को नहीं हुआ पुनर्वास
बांध के बैक वाटर की डूब पिछले दो सालों से नर्मदा पट्टी में आ रही है। डूब के कारण कई गांव डूब गए और कईयों के मकान जलमग्न हो चुके हैं। उसके बाद से ही डूब प्रभावित परिवार अस्थाई टीनशेड की शरण में रह रहे हैं। पिछले साल आई डूब के बाद कुछ महीनों तक तो प्रशासन ने इनके भोजन की व्यवस्था की, लेकिन उसके बाद इनकी सुध लेना बंद कर दिया। तभी से इनकी परेशानियां बढ़ गई हैं। इनके पास न तो रोजगार के कोई साधन है और न ग्रहस्थी चलाने के लिए रुपए।

कई गांव और खेत बने हुए हैं टापू
डूब आने के बाद से नर्मदा पट्टी के कई गांव और खेत टापू में तब्दील हो चुके हैं। टापू बने खेतों तक पहुंचने के लिए किसान नावों के सहारे आ-जा रहे हैं। नावों के सहारे की उनकी खेती का कार्य चल रहा है। ऐसे में हादसे का डर बना रहता है। डूब आने के बाद टापू बने गांवों और खेतों तक पुल-पुलियाओं के निर्माण की बात एनवीडीए ने कही थी, लेकिन उनका काम अब तक शुरू नहीं हो पाया है। दो सालों बाद भी पुल-पुलियाओं का कार्य शुरू नहीं होना विभाग की कार्यशैली का दर्शा रहा है।

हमें पिछले साल ही हमें टीनशेड को हटाना था। हमारे पास में नवंबर तक ही परमिशन थी। सबकुछ खाली कराना था। उसके बाद भी हमने इन्हें वहां रहने दिया है। वहीं प्रभावितों का पुनर्वास नहीं होने के संबंध में पुछा तो उन्होंने बतायाकि जिन्हें पैकेज नहीं मिले हैं, उनका कार्य भू-अर्जन अधिकारी को देखना है।
एसएस चंगौड़, कार्यपालन यंत्री एनवीडीए बड़वानी

पाटी नाका टीनशेड का 8 लाख रुपए का बिल बकाया है। बिल नहीं भरने के कारण बिजली काटी है।
पीसी पटेल, सहायक यंत्री विविकं बड़वानी

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