विशेषज्ञ और स्टाफ की कमी से जनता परेशान, मुख्यमंत्री कमलनाथ को लिखा पत्र

100 बिस्तरीय अस्पताल में मरीज होते है परेशान

By: vishal yadav

Updated: 01 Mar 2020, 11:17 AM IST

बड़वानी/सेंधवा : सिविल अस्पताल सेंधवा का स्वास्थ्य इस तरह बिगड़ा हुआ है कि इस 100 बिस्तरीय अस्पताल में विशेषज्ञ डॉक्टरों एवं पैरामेडिकल स्टाफ की कमी, आवश्यक उपकरणों, संसाधन तथा दवाईयों के अभाव में यहां डिलेवरी, बुखार एवं उल्टी-दस्त तथा कमजोरी, घबराहट के मरीजों को भी बाहर रेफर किया जाता है। हालांकि कुछ दिनों से अस्पताल की सेवाओं में स्थिरता है, लेकिन विशेषज्ञों की कमी के कारण के कई स्वास्थ्य सुविधाएं नदारद है। अस्पताल प्रबंधन को ग्रामीण क्षेत्रों में नए चिकित्सक मिले है। वहीं अन्य नर्सिंग स्टाफ की संख्या में भी बढ़ोतरी हुई है। स्पष्ट है कि जब अस्पताल स्वयं बीमार हो तो मरीजों का उपचार कैसे संभव है। इस संबंध में मुख्यमंत्री कमलनाथ को पत्र भी लिखा गया है।

विशेषज्ञ और स्टाफ की कमी से जनता परेशान

प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र सेंधवा को 100 बिस्तरीय अस्पताल में उन्नयन की घोषणा वर्ष 198 4 में तात्कालिन मुख्यमंत्री अर्जुनसिंह ने की थी। इसके बाद वर्ष 1998 में दिग्विजयसिंह के कार्यकाल में 1 करोड़ 8 7 लाख की प्रषासकीय स्वीकृति प्रदान की गई थी। इसके बाद शिवराजसिंह चौहान ने 7 जुन 2006 को धनोरा की जनसभा में 100 बिस्तरीय अस्पताल के उन्नयन की घोषणा की थी। 14 जुलाई 2008 को राज्य शासन ने इसके 100 बिस्तरीय अस्पताल में उन्नयन के आदेश जारी करते हुए। यहां 23 डॉक्टरों सहित 114 लोगों के स्टाफ के आदेश जारी किए थे।

आदेशानुसार 28 फरवरी 2009 तक इनकी पदस्थाना की जाना थी। इस आदेश का क्रियांवयन नहीं होने पर उनके द्वारा सितंबर 2012 में मप्र उच्च न्यायालय इंदौर खंडपीठ में जनहित याचिका दाखिल की गई थी। न्यायालय के आदेश के बाद 6 करोड़ 11 लाख रुपए की राशि 100 बिस्तरीय अस्पताल निर्माण के लिए स्वीकृत हुई। खंडपीठ ने अपने आदेश 13 जुन 2013 में यहां वर्ष 2008 में स्वीकृत स्टाफ की पदस्थापना 3 माह में करने के आदेश जारी किए थे। बावजूद इसके आज तक 114 स्वीकृत पदों में से अनेक पद रिक्त है। इसमें से 13 विशेषज्ञ चिकित्सकों के पद भी रिक्त पड़े हुए है।

न सोनोग्राफी मशीन न ब्लड बैंक

यहां न तो सोनोग्राफी मशीन है ना ही ब्लड बैंक ना ही ट्रामा सेंटर की व्यवस्था है। ऐसी स्थिति में ये अस्पताल नाम मात्र का 100 बिस्तरीय अस्पताल बन कर रह गया है। 1 अप्रैल 2015 से 31 जुलाई 2018 अर्थात सवा तीन वर्षों में सेंधवा अस्पताल से गर्भावस्था एवं डिलेवरी से संबंधित 108 4 मरीज, उल्टी दस्त व शरीर में पानी की कमी के 74, पेट दर्द के 73, बुखार के 55, कमजोरी के 31 पायजनिंग के 34, सांस लेने में तकलीफ के 22, घबराहट के 25, पोस्ट ऑपरेटिव प्रॉब्लम के 8 7 एवं एक्सीडेंट के 229 मरीज सेंधवा से बाहर रेफर किए गए। आंकड़े बताते है कि 100 बिस्तरीय अस्पताल में यदि बुखार एवं डिलेवरी तथा कमजोरी का इलाज यदि नहीं हो सकता है, तो फिर केवल भवन बन जाने से ये सिविल अस्पताल कैसे बन गया।

3 विशेषज्ञ मिले, लेकिन ग्रामीण क्षेत्रों में देंगे सेवाएं

वर्तमान डीएम ओएस कनेश ने बताया कि शासन की ओर से 3 चिकित्सक सेंधवा विधानसभा को मिले है, जिन्हें धनोरा, बलवाड़ी और वरला के प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों पर तैनात किया गया है। वहीं 19 एएनएम और 6 कम्युनिटी हेल्थ ऑफिसर मिले है। चिकित्सकों सहित नर्सिंग स्टाफ के मिलने के बाद सेंधवा सिविल अस्पताल की व्यवस्थाओं में कोई खास सुधार नहीं हुआ है। अभी भी कई मरीजों को रेफर किया जा रहा है। महिला चिकित्सक की कमी के चलते सैकड़ों महिलाएं और गर्भवती महिलाओं को इलाज के लिए निजी अस्पतालों की राह देखना पड़ रही है। 3 माह पहले सेंधवा सिविल अस्पताल में पदस्थ महिला चिकित्सक को सेंधवा से हटाकर अन्य जगह का प्रभार दिया गया। वहीं एक अन्य महिला चिकित्सक पद पद से इस्तीफा दे चुके है।

हालांकि जिला अधिकारियों द्वारा उन्हें मनाने की कवायद चल रही है। सीएमएचओ को नए विशेषज्ञों की डिमांड भेजी गई है, जो जल्द पूरी हो सकती है। महिला चिकित्सक की नियुक्ति के लिए प्रयास किए जा रहे हैं। हड्डी रोग विशेषज्ञ के लिए मशीनें व अन्य सुविधाओं की डिमांड बड़वानी भेजी जा चुकी है। जैसे ही डिमांड पूरी होगी सिविल अस्पताल में हड्डी से संबंधित ऑपरेशन शुरू किए जाएंगे। नसबंदी सहित अन्य ऑपरेशन सिविल अस्पताल में शुरू कर दिए गए है।

23 नए उप स्वास्थ्य केंद्रों के लिए भूमि का जल्द होगा आवंटन

सूत्रों से प्राप्त जानकारी के अनुसार सेंधवा विधानसभा में धनोरा, बलवाड़ी, भानपुरा, चाचरिया और झोपली सेक्टरों में जल्द ही उप स्वास्थ्य केंद्र बनाए जाने की कवायद चल रही है। ब्लॉक मेडिकल ऑफिसर कार्यालय द्वारा 4 सितंबर 2019 को सभी सेक्टर सुपरवाइजर को पत्र लिखकर इस विषय में भूमि के संबंध में कार्रवाई करने और कार्यालय को अवगत कराने के निर्देश दिए थे। हालांकि इसके बाद क्या कार्रवाई हुई, इसकी जानकारी नहीं लग पाई है। इसी तरह 28 दिसंबर 2019 को सिविल हॉस्पिटल कार्यालय द्वारा तहसीलदार सेंधवा और वरला को एक पत्र जारी करके उप स्वास्थ्य केंद्रों के भवन निर्माण के लिए शासकीय भूमि आवंटन करने के संबंध में पत्र जारी किया गया था। पत्र के माध्यम से लोक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग के द्वारा कई स्थानों पर उप स्वास्थ्य केंद्र भवन निर्माण प्रस्तावित होना बताकर मध्यप्रदेश गृह निर्माण एवं अधोसंरचना विकास मंडल को निर्माण के लिए जमीन उपलब्ध कराए जाने के विषय में चर्चा की गई थी। हालांकि इस पत्र के बाद पूरे मामले में क्या प्रगति हुई। फिलहाल ये बड़ा सवाल है।

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