Farmers - फसल बीमा के नाम पर ठगाए किसान, अधिकांश को एक और दो अंको में मिली राशि

बहुत कम राशि मिलने से किसानों में आक्रोश, किसान संघ ने भी जताई नाराजगी

By: tarunendra chauhan

Updated: 19 Sep 2020, 11:15 AM IST

बड़वानी. फसल बीमा योजना में किसानों को क्लेम की राशि बहुत कम मिली है। पिछले साल खरीफ सीजन में अतिवृष्टि से जिन किसानों की फसलें खराब हुई थी, उन किसानों को बीमा राशि के नाम पर किसी को 8 रुपए तो किसी को केवल 11 रुपए ही दिए गए हैं। कुछ किसानों को 14 तो किसी को 17 और 22 रुपए तक राशि दी जा रही है। ऐसे में किसानों में आक्रोश पनप रहा है।

जिले के ठीकरी विकासखंड के बांदरकच्छ गांव की महिला किसान लक्ष्मीबाई जायसवाल को मात्र 8 रुपए की बीमा राशि मिली है। जिले के पानसेमल विकासखंड के ग्राम मोयदा में दस किसानों को मजह 11-11 रुपए मिले हैं। वहीं लखनगांव के किसान सुखदेव यादव, मंशाराम, राधेश्याम यादव, गौराबाई, बसंती राठौड़, राजू नायक, नरेंद्र यादव को सिर्फ 14 रुपए की राशि मिली है। ऐसे ही राजपुर विकासखंड के सिवई गांव में कालीबाई नामक महिला को दो खातों में 17-17 रुपए और निहाली के दो किसानों को 23 रुपए दिए हैं। वहीं जिले के पाटी विकासखंड के गांव बोकराटा में सात किसानों को 22-22 रुपए की राशि मिली है। जिले के किसानों को फसल नुकसानी की इतनी कम बीमा राशि मिलने से किसान खुद का अपमान समझ रहे हैं।

किसानों को बीमा राशि बहुत कम मिलने के बाद किसान संघ पदाधिकारी भी इस पर नाराजगी जाहिर कर रहे हैं। किसान संघ जिलाध्यक्ष मंशाराम पंचोले ने बताया कि किसानों के साथ बीमा कंपनियों की सीधी लूट है। जितना प्रीमियम भरवा रहे हैं, उतनी राशि भी नहीं मिली है। किसानों को मक्का की फसल की नुकसानी 8 रुपए मिली है। 8 रुपए में तो आज की स्थिति में एक किलो मक्का मिल रही है। किसानों को समर्थन मूल्य भी नहीं मिल पा रहा है। इस तरह से किसानों को स्वाभिमान खत्म करने की कोशिश की जा रही है। सरकार ने इसकी जांच कराना चाहिए। साथ ही इसमें संशोधन भी करना चाहिए।

पिछले साल हुई फसल नुकसानी का बीमा किसानों को मिला है। प्रधानमंत्री फसल बीमा में इस बार संशोधन किया है। पहले पटवारी हल्का 100 हेक्टेयर का था, अब इसे घटाकर 50 हेक्टेयर कर दिया है। किसानों को बीमा मिलना फसल कटाई पर निर्भर करता है। उस हल्के की उपज कितनी है, औसत उपज कितनी है। इन सबको केल्क्यूलेट करके ही बीमा कंपनी दावा तय करती है।
केएस खपेडिय़ा, उपसंचालक कृषि

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