होमगार्ड स्थानीय गोताखोर का सहारा लेकर बचाते हैं डुबते हुए को

होमगार्ड स्थानीय गोताखोर का सहारा लेकर बचाते हैं डुबते हुए को

Rahul Singh | Publish: Jan, 15 2019 01:06:53 AM (IST) Barwani, Barwani, Madhya Pradesh, India

नर्मदा में किसी के डूबने पर स्थानीय गोताखोरों की लेना पड़ती मदद, पर्वों पर नर्मदा स्नान के लिए आते बड़ी संख्या में श्रद्धालु, होती है अकसर घटनाएं

बड़वानी. होमगार्ड जिस बाढ़ आपदा प्रबंधन के लिए जानी जात है, उसका ही प्रबंधन बड़वानी होमगार्ड के पास नहीं है। पिछले छह सालों से होमगार्ड के पास एक भी प्रशिक्षित गोताखोर नहीं है। नर्मदा में डूबने पर होमगार्ड को स्थानीय गोताखोरों की मदद लेना होती है।
कई बार गोताखोर ढूंढने, उसे घटनास्थल तक ले जाने में डूबने वाले की मौत तक हो जाती है। वहीं, नर्मदा में विशेष अवसरों, पर्वों पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते है। ऐसे में किसी घटना से निपटने के लिए भी होमगार्ड को तटों पर नाविको, मछुआरों का सहारा लेना पड़ता है। अब होमगार्ड गोताखोरों को प्रशिक्षित करने में लगा हुआ है।
होमगार्ड को पहले कानून व्यवस्था का अंग मानते हुए पुलिस के सहयोग के लिए रखा जाता था। पांच साल पहले होमगार्ड को राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन बल के साथ मिलाकर आपदा प्रबंधन के लिए तैयार किया गया था। जिले में रहने वाले होमगार्ड बल को आपदा प्रबंधन का काम देखना होता है। जिले का एक हिस्सा सरदार सरोवर बांध की डूब में है और कईडूब गांव अभी भी आबाद है। ऐसे में बारिश के दिनों में आपदा प्रबंधन का काम होमगार्ड के ही जिम्मे होता है।
ऐसे समय बल तैनात तो होता है, लेकिन किसी प्रकार की बाढ़ या पानी बढऩे की स्थिति में असहाय होता है। नर्मदा में पर्वों के दौरान बल जरूर तैनात किया जाता है, लेकिन वो भी सिर्फ तट पर से या नदी में नाव में घुमते हुए देख ही सकता है। किसी के डूबने की घटना में बल कोई काम नहीं आता।

नहीं होती प्रशिक्षित गोताखोरों की भर्ती
भले ही होमगार्ड को स्टेट डिजास्टर रिस्पांस फोर्स का हिस्सा बना दिया, लेकिन अब तक होमगार्डमें गोताखोरों की भर्ती का कोई विशेष प्रावधान नहीं है। उज्जैन सिंहस्थ में नए जवानों की अस्थाई भर्ती जरूर हुई थी, लेकिन इसमें से अधिकतर को तैरते भी नहीं आता है। बाद में इन जवानों को स्थाई करते हुए विभिन्न जिलों में भेज दिया गया। नए जवान आने से होमगार्ड का बल तो बढ़ा, लेकिन गोताखोर फिर भी नहीं मिल पाए। अब होमगार्ड कार्यालय द्वारा इन जवानों को गोताखोरी का प्रशिक्षण दिया जा रहा है। हालांकि ये बेसिक प्रशिक्षण है, इसके बाद इनका मुख्य प्रशिक्षण कलकत्ता स्थित ट्रेनिंग सेंटर में होगा, जिसके बाद ही जिले को प्रशिक्षित गोताखोर मिल पाएंगे।
संसाधनों की भी कमी
होमगार्ड के पास प्रशिक्षित गोताखोरों की कमी के साथ संसाधनों की भी कमी है। सिंहस्थ भर्ती के ४६ नए जवान मिलने से होमगार्ड के बल में वृद्धि हुई है, मगर संसाधन नहीं बढऩे से अभी भी परेशानी बनी हुई है। होमगार्ड के पास दो वाहन जिसमें एक डिस्ट्रिक कमांडेंट और एक बड़ा वाहन ही है। ८-८ जवानी शिफ्ट में २४ जवानों की ड्यूटी क्विक रिस्पांस टीम में कोतवाली थाने में लगा रखी है। किसी भी घटना-दुर्घटना के दौरान अलग से वाहन नहीं होने से टीम को पुलिस वाहनों पर निर्भर रहना पड़ता है। डूब प्रभावित क्षेत्र होने से हर साल सरदार सरोवर बांध में पानी भरने से आपदा प्रबंधन के लिए भी सिर्फ दो ही रबर बोट है। हर साल बाढ़ आपदा प्रबंधन के लिए प्रशासन को किराये की बोट लगानी पड़ती है।

&प्रशिक्षित गोताखोर नहीं है, स्थानीय गोताखोरों की मदद लेना पड़ती है। नए सैनिक मिले है, जिन्हें गोताखोरी का बेसिक प्रशिक्षण देकर पानी से डर दूर किया जा रहा है। अगले प्रशिक्षण के लिए ट्रेनिंग स्कूल कलकत्ता भेजा जाएगा। संसाधन बढ़ाने के लिए कई बार प्रशासन को लिख चुके हैं। ५० गोताखोर तैयार करने का लक्ष्य है।
केआरबी सिंह, डिस्ट्रिक कमांडेंट होमगार्ड

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