मन ही है, जो नर से नारायण बनाता है

सिद्धक्षेत्र बावनगजा में जारी हैं संतों का चातुर्मास

By: tarunendra chauhan

Published: 05 Sep 2020, 11:07 AM IST

बड़वानी. प्रसिद्ध जैन तीर्थ सिद्धक्षेत्र बावनगजा में परम पूज्य मुनिश्री 108 अध्ययन सागर महाराज और परम पूज्य 105 आर्यिका विदक्षा माताजी का चातुर्मास जारी है। मुनिश्री ने धर्मसभा को संबोधित करते हुए कहा कि विषयों में आसक्त मन हमारे बंधन का कारण है और विषय रहित मन मुक्ति का आधार है। इसलिए मन ही मनुष्यों के बंधन और मुक्ति का कारण है । मन ही हमें बांधता है और मन से ही हम मुक्त होते है। मन की शक्ति प्रचंड है। एक मन है जो हमें नर से नारायण बनाता है।

मुनिश्री ने कहा कि एक मन है, जो हमे नर से नारकी बना देता है। अगर राम, राम बने है तो अपने मन की बदौलत और रावण, रावण बना है तो अपने मन की बदौलत। मन हमारी सोच का आधार है और हमारा संपूर्ण जीवन हमारी सोच से नियंत्रित होता है। सोच की दशा जैसी, हमारा जीवन वैसा। इसलिए अच्छी सोच रखे। मुनिश्री ने कहा कि मन मे पल रहे पापों का पृच्छालन भगवान की आराधना, पूजन पाठ से शांत करे। नियतिपूर्वक जीवन यापन करे। जीवन में सदा संतोष रखे। शुभ भावो का आश्रव करे। दोषों से बचे और खोटी संगति से बचकर साधु- संगति मे जीवन लगाएं। इससे जीवन अच्छा बनेगा और सोच अच्छी बनेगी।

मन के विकारों को दूर करके ही हमारा जीवन अच्छा बनता है। इसलिए मन पर संयम करना आवश्यक है। मन में अनंत विचार उठते हैं हमें उनके साथ नहीं बहना है, बल्कि उचित और अनुचित का निर्णय करना भी आना चाहिए तभी हम सही दिशा में आगे बढ़ पाएंगे और जीवन को सार्थक बना पाएंगे।

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tarunendra chauhan Desk
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