बदली सोच...बच्चों को निजी स्कूल से निकालकर दिलाया शासकीय में प्रवेश

सरकारी स्कूलों को बढ़ावा देने के लिए जनप्र्रतिनिधि व कर्मचारी आए आगे, बच्चों को निजी स्कूल से निकालकर दिलाया शासकीय स्कूलों में प्रवेश

By: मनीष अरोड़ा

Published: 22 Aug 2017, 06:43 PM IST

सचिन पाटीदार. पलसूद (बड़वानी).  सरकारी स्कूल के नाम से ही लोगों के जहन में एक तस्वीर बनती है, जिसमें फटी पुरानी टाट पट्टियों पर बैठे बच्चे, मध्याह्न भोजन की लाइन में खड़े बच्चे। जर्जर भवन जिनमें पीने का पानी नहीं, शौचालय नहीं। पढ़ाई के नाम पर सिर्फ खानापूर्ति इसी सोच के चलते पिछले कई सालों में उच्च वर्ग जिसमें अधिकारी, जनप्रतिनिधि शामिल हैं, को तो छोड़ मध्यमवर्गीय परिवार के लोग भी अपने बच्चों को सरकारी स्कूल की बजाय निजी स्कूलों में पढ़ाने लगे। हालांकि बीते कुछ वर्षों में शासकीय स्कूलों के परीक्षा परिणाम निजी स्कूलों से बेहतर रहे, लेकिन लोगों की सोच नहीं बदल पाई। अब कुछ लोगों ने निजी स्कूलों के इस मिथक को तोड़ते हुए कि निजी स्कूलों में अच्छी पढ़ाई होती हैं, सरकारी स्कूलों पर भरोसा जताया है।


लोगों में भी आएगी जागरुकता
शासकीय विद्यालयों को बढ़ावा देने के लिए जनप्रतिनिधि व कर्मचारी आगे आए है। वे अपने बच्चों के दाखिला निजी स्कूलों से निकालकर शासकीय विद्यालयों में प्रवेश दिला रहे है। ऐसा ही मामला समीपस्थ ग्राम बोराली का है। नगर व आसपास क्षेत्र में शासकीय विद्यालयों में हो रहे शिक्षा के स्तर में सुधार के प्रयासों को बल देने व शासकीय विद्यालयों में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से जनप्रतिनिधि अपने बच्चों को निजी विद्यालयों से निकालकर शासकीय विद्यालयों में प्रवेश दिलवा रहे है। इनकी इस पहल से अन्य लोगों में भी जागरुकता आएगी।

निजी का मोह छोड़, सरकारी पर भरोसा
बोराली निवासी जिला पंचायत सदस्य दिलीप खर्ते ने इस वर्ष अपनी बच्ची दुर्गा खर्ते को शासकीय उत्कृष्ट प्रावि बोराली में प्रवेश कराया, जो पूर्व में पलसूद नगर के एक निजी विद्यालय में अध्ययनरत थी। इसी प्रकार पलसूद निवासी भाजयुमो मंडल अध्यक्ष गिरजेश गोले ने अपनी बच्ची निशा, जिया एवं दिव्या का प्रवेश निजी विद्यालय से निकालकर शासकीय कन्या प्रावि पलसूद में कराया है। साथ ही नगर पलसूद निवासी जनशिक्षक विनोद अमझरे ने भी अपनी बालिका का प्रवेश शासकीय विद्यालय में कराया।


लोगों में आएगी जागरुकता
इन सब की इस पहल का नगरवासियों एवं सामाजिक कार्यकर्ताओं ने स्वागत किया। साथ ही कहा कि इस प्रकार की सभी को पहल करना चाहिए। इससे की हम महंगी शिक्षा से मुक्ति पा सके। सभी में समानता का भाव उत्पन्न हो सके। उन्होंने बताया कि शासकीय विद्यालयों में भी पढ़ाई अच्छी होती है। आप भी अपने बच्चों का प्रवेश निजी स्कूल में ना कराते हुए शासकीय विद्यालयों में कराए। ऐसे में आर्थिक भी बचत होगी। साथ ही शासकीय विद्यालयों को बढ़ावा भी मिलेगा। आप के साथ दूसरे लोग भी जागरूक होंगे।

मनीष अरोड़ा Bureau Incharge
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