लोअर गोई बांध की पिचिंग दरकी, भरने से पहले ही छोडऩा पड़ा पानी

लोअर गोई बांध की पिचिंग दरकी, भरने से पहले ही छोडऩा पड़ा पानी
Lowergoi dam pitching rate

Manish Arora | Updated: 10 Aug 2019, 11:55:10 AM (IST) Barwani, Barwani, Madhya Pradesh, India

बांध के निचले हिस्से में बाढ़ का खतरा, सिलावद में बहा श्मशान, निर्माण कार्य में आई लापरवाही सामने, दूसरी ओर की पिचिंग में भी दरार

बड़वानी. सिलावद क्षेत्र में सिंचाई के लिए बनी अति महत्वपूर्ण शहीद भीमा नायक बांध परियोजना लोअरगोई में लापरवाही का मामला सामने आया है। लगातार हो रही बारिश के चलते निर्माण कार्य की गुणवत्ता पिचिंग दरकने से सामने आ गई। शुक्रवार को बांध के नौवें गेट की पिचिंग दरक गई और पत्थर नीचे जा गिरे। वहीं, बांध के पहले गेट के पास भी पिचिंग में दरारें आ गई। जिसके बाद बांध पूरा भरा नहीं होने के बाद भी सात गेट खोल पानी छोडऩा पड़ा। अचानक छोड़े गए पानी से बांध के निचले क्षेत्र में बाढ़ का खतरा भी मंडराया।
शुक्रवार सुबह 4.30 बजे लोअरगोई बांध की एक ओर की पिचिंग दरक गई। जिसके बाद इसकी गुणवत्ता पर सवाल खड़े होने लगे है। बांध की क्षमता से आधा भी पानी नहीं भरा है और पिचिंग दरकने से उसके सात गेट खोलने पड़े। यहां मौजूद ग्रामीणों ने बताया कि सुबह यहां पहुंचे अधिकारियों ने गेट खुलवाए है। उल्लेखनीय है कि बांध निर्माण की गुणवत्ता को लेकर पूर्व में भी कई बार सवाल उठ चुके है। इसके पूर्व बांध में दरार होने की जानकारी भी मिली है। गुणवत्ताहीन निर्माण के चलते बांध की पिचिंग कमजोर होने से कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है। पिचिंग दरकने के बाद यहां इंजीनियर आरएस मंडलोई भी मौके पर पहुंच गए थे। जब उनसे पिचिंग दरकने संबंधी बात की तो पहले तो उन्होंने ऐसा कुछ भी होने से साफ इनकार कर दिया।
चार साल में होना था पूरा, हो गए आठ साल
लोअरगोई बांध की लागत 332.55 करोड़ रुपए बताई जा रही है। आठ साल पहले इसका निर्माण कार्य आरंभ हुआ था, जिसे 48 माह यानि चार साल में पूरा होना था। परियोजना आरंभ हुए आठ साल हो चुके हैं, लेकिन काम अब भी अधुरा पड़ा हुआ है। इस दौरान ठेकेदार कंपनी छह बार एक्सटेंशन (समयावधि) ले चुकी है। छह बार समयावधि बढ़ाने के बाद भी ये कार्य पूर्ण नहीं हो पाया है। कार्य की प्रगति को लेकर विभागीय अधिकारियों की मानें तो अभी तक डेम, गेट, टनल और केनाल नेटवर्क का काम करीब 82 प्रतिशत पूर्ण हो गया है। वहीं निर्माण कार्य कर रही कंपनी के जिम्मेदारों ने की मानें को मात्र 5 प्रतिशत काम ही शेष रह गया है। ऐसे में विरोधाभास की स्थिति भी बन रही है। विभाग के अधिकारी कार्य को पूर्ण कराने के लिए प्रयास कर रहे हैं, लेकिन ठेकेदार ने काम बंद कर रखा है।
उफान पर नदी, निचले क्षेत्रों में नुकसान
पिछले तीन दिनों से लगातार हो रही बारिश से अंचल के सभी नदी-नाले उफान पर बह रहे हैं। गुरुवार की रात्रि में हुई तेज बारिश के चलते लोअर गोई डेम से भी रात्रि से ही पानी छोड़ा जा रहा है। इससे शुक्रवार सुबह नदी ने रौद्र रूप अख्तियार कर लिया। बताया जा रहा है कि डेम में पानी बढऩे पर नौ में से करीब सात गेट पांच मीटर तक खोले गए। इससे नदी में तेजी से पानी बढऩे लगा। गोई नदी में आई बाढ़ के चलते सिलावद में नदी किनारे बने दो में से एक मुक्तिधाम बह गया। गत वर्ष ही नदी के दोनों किनारों पर टीनशेड के मुक्तिधाम बनाए गए थे। नदी का तेज बहाव नदीपार के मुक्तिधाम को बहाकर ले गया। वहीं नदी किनारे हाल ही में निर्मित नवीन मटन मार्केट में भी पानी घुस गया।
गुणवत्ता ठीक नहीं हैं, कार्रवाई करेंगे
बांध में अभी कार्य बाकी है। डी वाटरिंग सिस्टम नहीं हुआ है। गेटों को उठाने के लिए लाइट की व्यवस्था नहीं है। बांध की गैलरी में पंपिंग भी ठीक नहीं हैं। कार्य की गुणवत्ता भी ठीक नहीं है। इसके लिए हमने पत्र भी लिखें हैं। ठेकेदार कंपनी ने बांध का कार्य ठीक नहीं किया है। पिचिंग धंसी है तो इस मामले में भी हम कार्रवाई करेंगे।
जगदीश तोमर, कार्यपालन यंत्री लोअर गोई परियोजना

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