टापू बने गांव में रहने को मजबूर लोग, कई डूब प्रभावित हुए बेघर

सरदार सरोवर की डूब आने के बाद भी दो साल से नहीं हुआ पुनर्वास, टीनशेड में कर रहे जीवन यापन
डूब आने के बाद भी नहीं मिल रहा अधिकार, अब भी चल रही है अधिकारों की लड़ाई

By: tarunendra chauhan

Published: 30 Sep 2020, 12:10 PM IST

बड़वानी. सरदार सरोवर बांध के बैक वाटर की डूब से प्रभावित नर्मदा पट्टी के लोगों को बिना पुनर्वास के दो सालों से डूब का सामना करना पड़ रहा है। पिछले दो सालों से आ रही डूब के कारण प्रभावित खासी परेशानियों का सामना कर अब भी अपने अधिकारों के लिए संघर्ष कर रहे हैं। कई लोग टापू बने गांवों में रह रहे हैं और कई ऐसे प्रभावित जिनके मकान डूबे हैं, वे टीनशेड की शरण रहकर अपना जीवन यापन कर रहे हैं।

नर्मदा घाटी में पिछले 34 सालों से जो संघर्ष चले आ रहा है, वह आज भी जारी है। डूब गांवों में कई परिवार ऐसे हैं, जिन्हें पुनर्वास का लाभ नहीं मिला है। कई परिवारों को बसाहटों में भूखंड मिलना बाकी है। वहीं कई परिवार ऐसे हैं, जिन्हें घर बनाने के लिए 5 लाख 80 हजार रुपए दिए जाने हैं। पुनर्वास नीति का लाभ मिले बिना ही नर्मदा घाटी में आई डूब के विरोध में ये आज भी डंटे हुए हैं। डूब गांव राजघाट की हम बात करें तो टापू बना ये गांव चारों तरफ करीब डेढ़ किमी की परिधि में पानी से घिरा हुआ है। यहां न तो बिजली की सुविधा है और न पीने के पानी के लिए हैंडपंप है। उसके बाद भी यहां प्रभावित परिवार निवास कर रहे हैं। ये लोग पीने का पानी नर्मदा के बीच में जाकर लाते हैं।

पिछले साल डूब आने के बाद से कई प्रभावित परिवार टीनशेड में रह रहे हैं। वहीं डूब का असर कम होने के बाद कुछ परिवार फिर से मूलगांव में रहने पहुंच गए थे। इस बार डूब आई तो उन्हें फिर से टीनशेड में रहने के लिए आना पड़ा। टीनशेड में रहने वाले डूब प्रभावितों को भी कई परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। इन लोगों को यहां से खेती का कार्य करने में दिक्कते आ रही है। खेतों की दूरी बढ़ जाने के कारण खेतों तक आने-जाने में इन्हें ज्यादा समय लग रहा है।

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tarunendra chauhan Desk
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