षडय़ंत्र कर एसडीएम और पटवारी ने शासन को लगाया ढाई करोड़ का चूना

अमानत में खयानत: पटवारी हुआ निलंबित, दोषियों पर कराई जाएगी एफआइआर, तत्कालीन तहसीलदार भी शामिल

By: tarunendra chauhan

Published: 18 Oct 2020, 12:37 PM IST

बड़वानी. भू-अर्जन प्रकरणों में षडय़ंत्र कर शासन को करोड़ों रुपए का चूना लगाने वाले अधिकारियों पर कार्रवाई की गाज गिरने वाली है। प्रशासनिक अफसरों ने अपने अधीनस्थ कर्मचारियों के साथ मिलकर भू-अर्जन प्रकरणों में आवेदकों से मिलीभगत कर अमानत में खयानत करते हुए शासन को ढाई करोड़ से अधिक का नुकसान पहुंचाया। जांच में जब पूरी सच्चाई सामने आई तो अब इन अधिकारियों पर कार्रवाई होगी।

कलेक्टर शिवराज सिंह वर्मा ने बड़वानी तहसील के हल्का नंबर 4 के तत्कालीन पटवारी रेवाराम गंगवाल को भू-अभिलेख रिकार्ड अद्यतन नहीं करने, विधि विरुद्ध बटांकन प्रस्तावित कर नामांतरण/बंटवारा कराने में गंभीर अनियमितता और पदीय कर्तव्यों के निर्वहन में घोर लापरवाही बरतने, आवेदकों से मिलीभगत कर सुनियोजित षडयंत्र पूर्वक शासन को आर्थिक हानि पहुंचाने का प्रयास किया। इस पर उन्हें तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है।

जानकारी के अनुसार आवेदिका मीना पति रमेशचंद्र ओचानी निवासी राजघाट रोड बड़वानी के मालिकी एवं आधिपत्य की सेगांव में स्थित 1 एकड़ भूमि सर्वे नंबर 6 1/8 जो व्यवसायिक प्रयोजन के लिए अनुभाग अधिकारी राजस्व बड़वानी द्वारा सन 2005-06 में पारित आदेश द्वारा डायवर्शन की थी।

मीना ओचानी ने सन 2011-12 में इस व्यवसायिक डायवर्ट भूमि को पुन: अनुविभागीय अधिकारी राजस्व बड़वानी के द्वारा कृषि प्रयोजन में डायवर्ट कराई। इसके बाद इस 1 एकड़ भूमि को 31 मार्च 2012 को तीन लोगों कमला बाई पति गजानंद कलाल निवासी बड़दा, राजेश पिता हीरालाल पाटीदार तथा लक्ष्मीनारायण पिता शंकरलाल गुप्ता निवासी लोहारी को 0.135 हेक्टर भूमि विक्रय की गई। इस बेची गई भूमि का नामांतरण 25 जनवरी 2014 को तत्कालीन एसडीएम बड़वानी महेश बड़ोले द्वारा स्वीकृत किया गया था, लेकिन पटवारी गंगाराम द्वारा इस आदेश पर अमल नहीं करते हुए इस भूमि को मूल खातेदार के नाम ही दर्ज रखी गई व स्वीकृत बटांकन अनुसार खसरे में त्रुटिपूर्ण बटे नंबर दर्ज किए गए तथा सन 2013 से 2017 तक रिकॉर्ड अद्यतन नहीं किया गया।

सांठगांठ से कर किया हेरफेर
21 अगस्त 2018 को सर्वे नंबर 8 1/11 रकबा 0.138 हेक्टेयर को पारिवारिक आपसी नामांतरण, बंटवारा के लिए कमला बाई, पारूवाई, कलाबाई द्वारा आवेदन प्रस्तुत किया गया। जबकि इस भूमि पर कलाबाई का कोई स्वत्व ही नहीं था। तत्कालीन तहसीलदार आदर्श शर्मा द्वारा 22 अगस्त 2016 को इस भूमि पर कमलाबाई, पारूबाई का नाम कम कर अवैधानिक रूप से कलाबाई का नाम दर्ज किया गया। इसी भूमि का विधि विरुद्ध डायवर्शन प्रवाचक बाबूलाल मालवीय द्वारा तत्कालीन एसडीएम महेश बड़ौले से मिलकर अपनी सगी बहन कलाबाई के नाम से कराया गया। इसके कारण प्रश्नाधीन भूमि के अर्जन में कलाबाई के नाम से रेफरेंस प्रकरण में अवार्ड राशि 14,39,593 रुपए के स्थान पर 2,53,40,394 रुपए का मुआवजा अधिनिर्णय पारित हुआ। इसके कारण कलेक्टर ने प्रश्नाधीन भूमि के डायवर्शन, नामांतरण, बंटवारा एवं भू-अभिलेख रिकॉर्ड अपडेशन, खसरों को अद्यतन नहीं करने तथा विधि विरुद्ध कार्य कर शासन को आर्थिक हानि पहुंचाने के कारण पटवारी रेवाराम गंगवाल को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है। संलिप्त सभी अधिकारियों के विरुद्ध अनुशासनात्मक कार्रवाई भी प्रस्तावित की जा रही है। दोषियों पर एफआईआर भी कराई जा रही है। कलेक्टर ने कुछ और प्रकरण भी पकड़े हैं। अनेक अन्य प्रकरण भी सामने आने की संभावना है। कलेक्टर की इस कार्रवाई से प्रशासनिक तंत्र में हड़कंप मचा हुआ है। अब देखना है कि ऐसे कितने मामलों में अधिकारियों ने अपने पद का दुरुपयोग कर शासन का राशि की चपत लगाई है।

भू-अर्जन में एक प्रकरण पूर्व में मिला था, जिसमें 34 लाख के भू-अर्जन को साढ़े आठ करोड़ से ज्यादा कर दिया था। भू-अर्जन का एक नया प्रकरण सामने आया है। इसमें एसडीएम के बाबू की बहन कलाबाई के नाम से लगभग 14 लाख रुपए का अवार्ड हुआ था,। इसके बाद उसे दो करोड़ 53 लाख का अवार्ड कोर्ट से हुआ है। कलाबाई भूमि स्वामी भी नहीं थी। बिना नियम प्रक्रिया के वह जमीन अपने नाम करा ली। उस जमीन का गलत तरीके से डायवर्सन करा लिया। मामले में पटवारी को निलंबित किया है। तत्कालीन एसडीएम और तत्कालीन तहसीलदार भी इसमें मिले हुए हैं। इन पर कार्रवाई करने के लिए प्रस्ताव दे रहे हैं। इनकी जानकारी जुटा रहे हैं।
शिवराजसिंह वर्मा, कलेक्टर

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