'जिंदगी की दो बूंद की जगह भेजी 'दवा मुसीबत की, पल्प पोलियो अभियान में लापरवाही

पोलियो की वैक्सिन के डिब्बों में निकली रोटा वायरस वैक्सिन, आंगनवाड़ी कार्यकर्ता की सूझबूझ से पकड़ में आई गलती, दोंदवाड़ा स्थिति पोलियो बूथ का मामला

By: मनीष अरोड़ा

Published: 13 Mar 2018, 11:03 AM IST

बड़वानी. पल्प पोलियो अभियान के तहत बड़ी चुक सामने आई है। जिला मुख्यालय के पानसेमल ब्लॉक के गांव दोंदवाड़ा में पोलियो बूथ पर सोमवार को पोलियो की वैक्सिन की जगह रोटा वायरस वैक्सिन भेज दी गई। अच्छी बात यह रही है कि बच्चों को दवा पिलाने से पहले ही एक आंगनवाड़ी कार्यकर्ता ने दवा को देखकर गलती पकड़ ली। सूचना पर पानसेमल बीएमओ मौके पर पहुंचे, निरीक्षण किया और फिर दवा बदलवाई गई।

बूथ पर 4 बॉक्स पोलियो वैक्सिन के भेजी गई थी
बीएमओ डॉ. राजेश ढ़ोल ने बताया कि दोंदवाड़ा पोलियो बूथ पर 4 बॉक्स पोलियो वैक्सिन के भेजी गई थी। लेकिन दो बॉक्स में रोटा वायरस वैक्सिन निकल गई। बूथ पर मौजूद आंगनवाड़ी कार्यकर्ता ने सूझबूझ दिखाते हुए इसकी सूचना दी। जैसे ही सूचना मिली हम मौके पर पहुंचे और मामले की जांच की। बूथ पर 2 बॉक्स में 3 से 4 रोटा वायरस वैक्सीन की वॉयल निकली। उसे हटाकर तुरंत कोल्ड चैन प्वॉइंट पहुंचाई। बूथ पर किसी भी बच्चों को यह दवा नहीं पिलाई गई। वहीं जिला टीकाकरण अधिकारी ने बताया पहले कभी ऐसा नहीं हुआ। मामले की जांच की जाएगी।

40 डिब्बे पहुंचते हंै कोल्ड प्वॉइंट से
बीएमओ ने बताया पानसेमल ब्लॉक में 30 हजार बच्चों को पोलियो की दवा पिलाने का लक्ष्य रखा था। मोयदा में कोल्ड चैन प्वॉइंट बनाया गया है। जहां से 40 पोलियो वैक्सिन के डिब्बे बूथों पर पहुंचते है।

क्या है रोटा वायरस ?
रोटा वायरस वैक्सिन शिशु को दस्त की गंभीर बीमारी होने पर दिया जाता है। बच्चों को लगने वाले टीकों में रोटा वायरस का भी टीका होता है। जिसके लगने के बाद यदि बच्चों को दस्त लग भी जाए तो ज्यादा गंभीर स्थिति होने का अंदेशा नहीं रहता। यह वैक्सिन रोटा वायरस के विषाणु द्वारा होने वाले गंभीर दस्त से शिशु को बचाता है। अगर शिशु को किसी दूसरे कारण से दस्त होते है तो रोटावायरस का टीका उसे रोकने में मदद नहीं कर सकता है।

यह दुष्प्रभाव हो सकते हैं रोटा वायरस के
रोटावायरस के वैक्सीन से होने वाले साधारण संभावित दुष्प्रभाव से दिल का तेज धड़कना, शरीर का पीला पडऩा, सांस लेने मे तकलीफ, घबराहट होती है।

इन्हें दिया जाता है डोज
- पहली खुराक-6 सप्ताह(डेढ़ माह की उम्र में)
- दूसरी खुराक-10 सप्ताह(ढ़ाई माह की उम्र में)
- तीसरी खुराक-14 सप्ताह की उम्र में

फैक्ट फाइल...
-2.45 लाख बच्चों को पोलियो दवा पिलाने का लक्ष्य।
-1.49 लाख बच्चों को पहले दिन पिलाई दवा।
- 8 हजार 386 दवाई के वॉयल पिलाए।
- 1475 बूथ जिले में बनाए।

वर्जन...
हर वर्ष पोलियों अभियान चलाया जाता है। इससे पहले कभी ऐसा नहीं हुआ। रोटा वायरस वैक्सीन देने से अभियान का उद्देश्य पूरा नहीं होता। मामले की जांच की जाएगी।
-डॉ.प्रमोद गुप्ता, जिला टीकाकरण अधिकारी

मनीष अरोड़ा Bureau Incharge
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