सेवा बनी परेशानी: 108 की सेवा के लिए परिजनों को करना पड़ इंतजार

सीएस ने अपने मोबाइल से किया महिला का रजिस्ट्रेशन, जिला अस्पताल में देखने को मिला मामला, मीडिया और अधिकारियों का लिया सहारा

खबर लेखन : मनीष अरोरा

ऑनलाइन खबर : विशाल यादव
बड़वानी. जिले में जननी एक्सप्रेस के नाम संचालित 108 एंबुलेंस की सेवा को लेकर भले ही बड़े-बड़े दावे किए जा रहे है, लेकिन हकीकत कुछ और ही है। इसकी सेवा इतनी आसान नहीं है। ऐसा ही हाल शुक्रवार को जिला महिला अस्पताल परिसर में देखने को मिला। यहां मरीजों और उनके परिजनों को 108 के लिए घंटे इंतजार करना पड़ा। बावजूद उन्हें सेवा के लिए परेशान होना पड़ा। आखिर में उन्हें वाहन उपलब्ध नहीं हो सका। मीडिया के बाद आला अधिकारियों का सहारा लेना पड़ा, तब कही जाकर वाहन उपलब्ध हो पाया है।
जानकारी के अनुसार धनोरा से अपनी बहु का इलाज कराने जिला अस्पताल पहुंचे दुर्गेश यादव ने बताया कि वे यहां पर बहु अनिता पति मुकेश को प्रसव के लिए लाए थे। लेकिन बच्चा मृत पैदा हुआ, इसके बाद शुक्रवार की सुबह 11 बजे उसे अस्पताल से छूट्टी दे दी गई। इससे वे अपनी बहु को अस्पताल के बाहर लेकर आ गए और घर जाने के लिए 108 पर कॉल किया, लेकिन बात ही नहीं हो पाई। इसपर गांव में एक दोस्त को फोन किया, तो उसने 108 पर कॉल किया, जहां से जवाब मिला की आधे घंटे में एंबुलेंस उपलब्ध हो जाएगी, लेकिन डेढ़ घंटे तक भी वाहन उपलब्ध नहीं हो पाया है। मरीज के परिजनों की इस शिकायत के बाद सिविल सर्जन अनिता सिंगारे भी जिला अस्पताल पहुंची, जिन्होंने कॉल सेंटर पर फोन लगाकर जानकारी ली, जहां से पता चला कि अनिताबाई के नाम से वहां पर कोई रजिस्ट्रेशन ही नहीं हुआ है। इस तरह से कॉल सेन्टर पर बात होने के बावजूद भी वाहन उपलब्ध नहीं हो पा रहा है। हालांकि बाद में सीएस ने अपने मोबाइल से ही महिला के नाम का रजिस्ट्रेशन कॉल सेंटर पर करवाते हुए, वाहन के पायलट से बात कराई और फिर वह मरीज को लेकर उसके गांव के लिए रवाना हुआ।
ऐसे लोगों को होना पड़ा परेशान
जिला अस्पताल परिसर में कई लोग ऐसे मौजूद थे, जो 108 एंबुलेंस का इंतजार करते नजर आए, जबकि अस्पताल परिसर के बाहर दो-दो वाहन खड़े नजर आए, लेकिन इन्हें जवाब मिल रहा था वाहन फिलहाल उपलब्ध नहीं है।
केस-1
राजपुर क्षेत्र के ग्राम जलगोन से आये प्रकाश पाटील ने बताया कि वे अपनी पत्नी के साथ एक माह के नवजात को दिखाने के लिए अस्पताल आए थे, अब घर जाना है, जिसके लिए उन्होंने 108 पर दो से तीन बार कॉल किया, जहां से जवाब मिल रहा है, फिलहाल गाड़ी खराब है।
केस-2
इसी तरह से दवाना क्षेत्र के ग्राम टिडगारिया से आए विजय धनगर ने बताया कि वे अपनी बहन को प्रसव के लिए लेकर आए है, जिसे शुक्रवार को छूट्टी मिल चुकी है। अब घर जाने के लिए 108 कॉल सेंटर पर लगातार कॉल कर रहे है, लेकिन जवाब मिलता है सभी गाडिय़ा व्यस्त है।
सेवा के बदलें मांगते हैं शुल्क
शासन द्वारा 108 एंबुलेंस की सेवा नि:शुल्क उपलब्ध कराई जा रही है। जिसका लाभ लेने के लिए टोल फ्री नंबर 108 पर कॉल करना होता है। इसके 18 मिनट के भीतर उक्त सेवा उपलब्ध कराए जाने का प्रावधान है, लेकिन ये दावे कितने सही होते हैं इसका अंदाजा शुक्रवार को महिला अस्पताल में देखने को मिल गया। जहां अनिताबाई व रुक्मिणीबाई जैसी महिला अस्पताल के बाहर वाहन के इंतजार में बैठी नजर आती है और परिजन परेशान होती है। जिला अस्पताल में घंटों तक वाहन के लिए परेशान होने वाले दुर्गेश यादव ने बताया कि उन्होंने जब अस्पताल में खड़े वाहन चालकों से बात की तो 200 से 500 रुपए तक सेवा शुल्क की मांग की गई।
उपलब्ध करा दिया है वाहन
जानकारी मिलने के बाद अस्पताल पहुंची। इसके बाद कॉल सेंटर पर बात कर वाहन उपलब्ध कराया गया है। 108 पर कॉल करने के बाद रुपयों की मांग की जा रही है तो उसकी शिकायत होनी चाहिए, कार्रवाई कराई जाएगी।
-डॉ.अनिता सिंगारे, सीएस, जिला अस्पताल

मनीष अरोड़ा Bureau Incharge
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