एक कर्मचारी के भरोसे आधा दर्जन गांव, पशुपालक भटकने को मजबूर

Arun Sharma

Publish: Oct, 13 2017 05:19:19 (IST)

Bassi, Jaipur, Rajasthan, India
एक कर्मचारी के भरोसे आधा दर्जन गांव, पशुपालक भटकने को मजबूर

बड़वा के पशु औषधालय का मामला..

बस्सी (जयपुर)। सरकार ने ग्रामीणों की मांग पर बड़वा ग्राम पंचायत मुख्यालय पर पशु औषधालय खोल तो दिया लेकिन स्वीकृत स्टाफ की नियुक्ति नहीं की गई, जिससे एक कर्मचारी के भरोसे इसे संचालित किया जा रहा है। स्थिति यह है कि एक मात्र कर्मचारी के सरकारी काम से जाने पर औषधालय बंद रहता है, जिससे बीमार पशुओं को लेकर आने वाले पशुपालकों को खाली हाथ लौटना पड़ रहा है।

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सूत्रों ने बताया कि ग्राम पंचायत बड़वा में कई दशकों से पशु चिकित्सा उप केन्द्र संचालित था। इसमें बड़वा समेत कानेटा, अपरेटा, झाझवाड़ समेत आस-पास के गांव-ढाणियों के पशुपालकों के पशुओं का भार होने पशुपालकों को पर्याप्त सुविधाएं नहीं मिल पाती थी। आस-पास पशु चिकित्सालय नहीं होने पर राज्य सरकार ने करीब दस साल पहले पशु उप केन्द्र को पशु औषधालय का दर्जा दे दिया, लेकिन सुविधाओं में इजाफा नहीं करने से आज भी पशुपालकों की पहले जैसी ही स्थिति है।

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दर्जा बढ़ा, स्टाफ नहीं
सूत्रों ने बताया कि पशु औषधालय का दर्जा मिलने के बाद पशुपालन विभाग ने यहां एक पद पशु चिकित्सा सहायक, एक पद पशुधन परिचर एवं एक पद सफाईकर्ता का स्वीकृत किया। इसकी पालना में यहां से पशुधन सहायक को हटाकर विभागीय अधिकारियों ने पशु चिकित्सा सहायक की नियुक्ति तो यहां कर दी, लेकिन अब तक अन्य स्टाफ नहीं लगाया गया, जिससे एक कर्मचारी के भरोसे ही औषधालय संचालित है। यहां प्रतिदिन पशुपालक पांच-छह पशु इलाज के लिए लाते हैं।

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झोलाछापों की मौज
पशु औषधालयों एवं पशु चिकित्सा उप केन्द्रों में स्टाफ की कमी के चलते अप्रशिक्षित झोलाछाप की मौज है। सरकारी पशु केन्द्रों में इलाज नहीं मिलने की स्थिति में ग्रामीणों को मजबूरन कथित चिकित्सकों की मदद लेनी पड़ती है। कई बार पशुओं की जान पर बन जाती है।

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पशुधन परिचर व सफाईकर्मी का पद रिक्त
बड़वा में एकमात्र पशु चिकित्सा सहायक होने के कारण उसे पशुओं के इलाज में भी परेशानी आती है, क्योंकि पशुपालक तकनीकी रूप से अनुभवी होते नहीं है और यहां स्वीकृत पशुधन परिचर एवं सफाईकर्मी का पद रिक्त होने के कारण सहयोगी नहीं मिल पाते हैं, जिससे बीमार पशुओं के इलाज में परेशानी होती है। बड़वा क्षेत्र निवासी कैलाशनारायण मीना, किशनलाल मीना, हीरालाल मीना ने बताया कि बड़वा से करीब दो किलोमीटर दूर पड़ासौली गांव में भी पशु उप केन्द्र है, लेकिन यह भी सप्ताह में तीन दिन ही खुलता है, क्योंकि यहां कार्यरत पशुधन सहायक को तीन दिन के लिए जटवाड़ा के पशु चिकित्सालय में जाना पड़ता है, जिससे पड़ासौली केन्द्र सोमवार, मंगलवार व बुधवार को बंद रहता है। ऐसे में बीमार पशुओं का इलाज कहां करवाएं।

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दर्जा बढ़ा, स्टाफ नहीं
सूत्रों ने बताया कि पशु औषधालय का दर्जा मिलने के बाद पशुपालन विभाग ने यहां एक पद पशु चिकित्सा सहायक, एक पद पशुधन परिचर एवं एक पद सफाईकर्ता का स्वीकृत किया। इसकी पालना में यहां से पशुधन सहायक को हटाकर विभागीय अधिकारियों ने पशु चिकित्सा सहायक की नियुक्ति तो यहां कर दी, लेकिन अब तक अन्य स्टाफ नहीं लगाया गया, जिससे एक कर्मचारी के भरोसे ही औषधालय संचालित है। यहां प्रतिदिन पशुपालक पांच-छह पशु इलाज के लिए लाते हैं।
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बड़वा के पशु औषधालय में स्टाफ की कमी के कारण पशुधन परिचर एवं सफाईकर्मी का पद रिक्त है। भर्तियां हो नहीं रही है। भर्ती निकालना सरकार के स्तर का काम है।
डॉ. जयराम बैरवा, संयुक्त निदेशक, पशुपालन विभाग जयपुर

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पशु औषधालयों की समस्याओं एवं रिक्त पदों के बारे में उच्चाधिकारियों को अवगत करवा रखा है। अकेला कर्मचारी होने के कारण मजबूरी में इसे बंद करके विभागीय कार्यों के लिए जाना पड़ता है।
प्रकाश शर्मा, प्रभारी, पशु औषधालय बड़वा (बस्सी)

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