scriptBuddhaham Sharanam Gachami echoed for years, now the silence spread | वर्षों तक गूंजा बुद्धम् शरणम् गच्छामी, अब पसरा सन्नाटा | Patrika News

वर्षों तक गूंजा बुद्धम् शरणम् गच्छामी, अब पसरा सन्नाटा

— सांची व सारनाथ के बौद्ध स्तूपों की तरह गुम्बदाकार था
— देखरेख के अभाव में रह गए अवशेष

बस्सी

Updated: January 13, 2022 10:11:49 pm

जयपुर. जिले के विराटनगर में स्थित विश्वप्रसिद्ध प्राचीन बौद्ध स्तूप जीर्णशीर्ण होकर खंडहर में तब्दील हो गया है। देखरेख के अभाव में इस पौराणिक विरासत का नामोनिशान मिटने को है। मौर्य राजवंश के चक्रवर्ती सम्राट अशोक महान कलिंग युद्ध में हुए नरसंहार से व्यथित होकर बौद्ध धर्म स्वीकारने के बाद यहां बौद्ध स्तूप आए थे। उस समय विराटनगर बैराठ के नाम से जाना जाता था। बैराठ में जिस बौद्ध स्तूप में वर्षों तक बुद्धम् शरणम् गच्छामी की गुंज रही वहां अब सन्नाटा पसरा है। बदहाल हो चुका यह स्थल बौद्ध धर्म के प्रचार प्रसार का केंद्र रहा है।
विराटनगर में बदहाल विश्वप्रसिद्ध प्राचीन बौद्ध स्तूप। फोटो - अनिल खंडेलवाल
विराटनगर में बदहाल विश्वप्रसिद्ध प्राचीन बौद्ध स्तूप। फोटो - अनिल खंडेलवाल
यह है इतिहास
ऐसे अनेक चिन्ह हैं जिनसे पता चलता है कि यहां पर कभी बौद्ध एवं जैन सम्प्रदाय के अनुयायियों का विशेष प्रभाव था। विराटनगर में दक्षिण की ओर पहाड़ी है। इस पर दो समतल मैदान हैं। इसके मध्य गोलाकार परिक्रमा युक्त मन्दिर आयताकार चारदीवारी से घिरा हुआ है। इसके गोलाकार भीतरी द्वार पर खम्भे लगे हुए थे। ये अवशेष बौद्ध स्तूप के हैं जिसे सांची व सारनाथ के बौद्ध स्तूपों की तरह गुम्बदाकार बनाया गया था। यह बौद्ध मंदिर गोलाकार ईंटों की दीवार से बना हुआ है। बाहर प्लेटफार्म पर बौद्ध भिक्षु एवं भिक्षुणियों आदि के चिंतन-मनन करने के लिए श्रावक गृह बने थे। यहां बनी 12 कोठरियों के अलावा अन्य कई कोठरियों के अवशेष भी चारों तरफ देखे जा सकते हैं। ये कोठरियां साधारणतया वर्गाकार रूप में बनाई गई थी। पश्चिम की तरफ शिला खण्डों को काटकर गुहा-गृह बनाया गया था। इसमें भी भिक्षुओं एवं भिक्षुणियों के निवास का प्रबंध रहता था। गुहा गृह के नीचे कुंड भी बनाया गया था, जिसमें पानी इकट्ठा किया जाता था। बताया जाता है कि यहां एक शिलालेख था। इसे भाबरू शिलालेख के नाम से भी जाना जाता था। इसे कालान्तर में कोलकाता के संग्रहालय में रखवा दिया गया।
वर्तमान में ऐसा है हाल...
किसी समय मंत्रों से गुंजायमान रहने वाला ये स्तूप अब खंडहर में तब्दील हो गया है। अब यहां केवल सन्नाटा पसरा है। पहाड़ पर होने के कारण यहां कम ही लोगों की आवाजाही है। स्तूप की दीवारें भी क्षतिग्रस्त हो गई हैं, लेकिन इसका आधार अभी भी मौजूद है।
इनका कहना है...

मेरे कार्यकाल में इसके जीर्णोद्धार से संबंधित कोई पत्रावली नहीं आई है और ना ही इसे लेकर अभी कोई योजना है।
— सुनिल शर्मा, एसडीएम, विराटनगर

विराटनगर का बौद्ध स्तूप भारतीय पुरातत्‍व सर्वेक्षण विभाग के अधीन है। इसके लिए वे ही कुछ कर सकते हैं।
— मुकेश शर्मा, अधिशासी अभियंता, पुरातत्व विभाग जयपुर

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