शिक्षा विभाग के आदेशों से बनी विवाद की स्थिति, निजी स्कूल संचालकों में रोष


विभाग ने अप्रेल में बिना टीसी प्रवेश नहीं देने और अब बिना टीसी प्रवेश देने के आदेश किए जारी


बिना टीसी प्रवेश नहीं देने, आरटीई की बकाया राशि का भुगतान करने और स्कूल खोलने की मांग

By: Satya

Published: 12 Jul 2021, 09:41 PM IST


शाहपुरा। शिक्षा विभाग की ओर से कक्षा 1 से 8वीं तक विद्यार्थियों के स्कूलों में प्रवेश को लेकर जारी किए गए अलग-अलग आदेशों से निजी स्कूल संचालकों व अभिभावकों में विवाद की स्थिति उत्पन्न हो गई है। विभाग ने अप्रेल माह में बिना टीसी विद्यार्थियों को प्रवेश नहीं देने के आदेश जारी किए थे, वहीं अब तीन दिन पहले आरटीई नियमों का हवाला देते हुए बिना टीसी के ही प्रवेश देने के आदेश जारी किए हैं। जिससे निजी स्कूल संचालकों में रोष है।

शाहपुरा ब्लॉक के निजी स्कूलों के संगठन स्कूल शिक्षा परिवार की ओर से सोमवार को विभाग के उक्त आदेशों को लेकर विरोध जताया गया। साथ ही बिना टीसी प्रवेश नहीं देने के आदेश ही यथावत रखने, आरटीई की सत्र 2020-21 की पुनर्भरण राशि का भुगतान करने, लम्बे समय से बंद स्कूलों को खोलने सहित विभिन्न मांगों को लेकर सोमवार को मुख्यमंत्री व शिक्षा मंत्री के नाम उपखंड अधिकारी शाहपुरा मनमोहन मीणा को ज्ञापन दिया।

इस दौरान स्कूल शिक्षा परिवार के संगठन मंत्री ने बताया कि शिक्षा विभाग द्वारा जारी स्कूल संचालन के लिए विभिन्न निर्देश जारी कर रखे हैं। पूर्व में जारी आदेशों की पालना की जगह नित नए नियम की पालना के करने के आदेश जारी कर दिए जाते हैं। जिसकी वजह से निजी विद्यालय एवं अभिभावकों के मध्य विवाद की स्थिति उत्पन्न हो गई है।

उन्होंने बताया कि पूर्व में शिक्षा विभाग द्वारा 9 अप्रेल 2020 को बिना टीसी प्रवेश नहीं लेने के आदेश जारी किए थे, और अब जुलाई माह में शिक्षा विभाग के निदेशक ने पुन: नया आदेश जारी कर कक्षा एक से आठवीं तक बिना टीसी प्रवेश देने के आदेश दिए हैं। जिससे विद्यालय एवं अभिभावकों में विवाद की स्थिति बनी हुई है। निजी स्कूल संचालकों ने बताया कि बिना टीसी प्रवेश के आदेशों से दो साल से आर्थिक संकट से जूझ रहे निजी विद्यालयों की फीस भी अटक जाएगी। इससे कोरोना काल में जूझ रहे निजी स्कूल संचालकों का और ज्यादा आर्थिक संकट बढ जाएगा।

संचालकों ने विद्यालयों के हितों को ध्यान में रखते हुए स्थाई आदेश जारी करने की मुख्यमंत्री व शिक्षामंत्री से मांग की है। इसके अलावा प्रवेश की अनिवार्यता रखने की भी मांग की। जिस प्रकार से सरकारी स्कूल की शाला दर्पण वर्ष पर खुली रहती है, उसी प्रकार से निजी विद्यालयों की पोर्टल भी वर्षभर खुली रहनी चाहिए। निजी विद्यालयों के विरुद्ध भेदभाव पूर्ण रवैया नहीं अपनाने तथा सत्र 2020 -21 की आरटीई की बकाया राशि का भुगतान शीघ्र करने की भी मांग की।

इस मौके पर संगठन मंत्री बाबूलाल गुर्जर, जिला उपाध्यक्ष सुरेंद्र व्यास, विधि सलाहकार एडवोकेट अरुण कुमार टांक, मनोहर लाल सैनी, विकास यादव, प्रकाश शर्मा, अर्जुन लाल यादव, दिनेश सेन, धर्म चंद सैनी, सुरेश कुमार नटवाडिया, जयराम जाट, अंजना हल्कारा, महेश यादव, पूरणमल यादव, किशोर कुमार रेगर, सुभाष चंद्र शर्मा, रविंद्र कुमार पारीक, सीताराम सामोता, कैलाश शर्मा आदि कई निजी विद्यालय संचालक उपस्थित रहे।

स्कूलों को खोलने की मांग
निजी सकूल संचालकों ने कोरोना काल में लम्बे समय से बंद स्कूलों को खोलने की भी मांग की है। ताकि बच्चों, शिक्षकों और अभिभावकों को राहत मिल सके और शिक्षण कार्य पटरी पर लौट सके।

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