अधिक मास में करें यह काम, चतुर्गुणा मिलेगा फल

19 वर्ष पश्चात यह संयोग बना, 18 सितंबर को शुरू होगा अधिक मास, शारदीय नवरात्र स्थापना 17 अक्टूबर को, पुरुषोत्तम मास में कराए गए पूजा, जाप, कथा, यज्ञ आदि का फल शास्त्रों में चतुर्गुणा बताया है।

By: Gourishankar Jodha

Published: 16 Sep 2020, 11:34 PM IST

प्रागपुरा। सोलह दिवसीय श्राद्ध पक्ष 17 सितंबर को समाप्त हो जाएगा, इसके बाद अधिक मास 18 सितंबर से शुरू होगा। इस कारण अब शारदीय नवरात्र 17 अक्टूबर से शुरू होंगे।
अधिक मास में नित्य नैमितिक और कार्य तीनों प्रकार के कार्य कर सकते है। अन्य माह में किए गए पूजा-जाप एवं यज्ञ का फल कलियुग में चतुर्थांश ही प्राप्त होता है, किन्तु पुरुषौत्तम मास में कराए गए पूजा, जाप, कथा, यज्ञ आदि का फल शास्त्रों में चतुर्गुणा बताया है।

2001 के बाद 19 वर्ष पश्चात बना संयोग
ज्योतिषाचार्य पंडित सुरेशचन्द्र शास्त्री बताया की दो आश्विन माह होने से श्राद्ध पक्ष एवं नवरात्र के मध्य 1 माह का अधिक माह होगा। दूसरा आश्विन माह 16 अक्टूबर को समाप्त हो जाएगा। इसके बाद 17 अक्टूबर से नवरात्र प्रारंभ होंगे। शास्त्री ने बताया की सन् 2001 के बाद 19 वर्ष पश्चात यह संयोग बना है कि आश्विन माह दो है।

अंतिम पक्ष शुद्ध होता
शास्त्रीय मान्यता के अनुसार प्रारंभ के 15 दिन 1 पक्ष शुद्ध माह फिर 1 माह अधिक मास पूरा होने पर अंतिम पक्ष शुद्ध होता है, इस बार अधिक मास है। इस कारण नवरात्र स्थापना 17 अक्टूबर को आरंभ होगा व 16 अक्टूबर 2020 तक मांगलिक कार्य बंद रहेंगे।

यज्ञ आदि कार्य सम्पन्न करा सकत
इस माह में शास्त्रानुसार उपवास का उद्यापन करना निषेध कहा गया है। इस माह में गृह प्रवेश, प्रतिष्ठा तथा विवाह भी निषेध है, किन्तु अधिक मास को पुरुषौत्तम मास भी कहते है। इसमें किए गए जाप, यज्ञ, हवन, भागवत-राम कथा का फल चार गुना प्राप्त होता है। अत: यज्ञ आदि कार्य सम्पन्न करा सकते है।

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