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भाई की शहादत के बाद भी हर साल ससुराल से मायके आकर बहन उनकी प्रतिमा को बांधती है रक्षासूत्र


...ताकि रक्षाबंधन पर शहीद भाई की कलाई सूनी नहीं रहे

बस्सी

Published: August 22, 2021 10:41:21 pm


शाहपुरा। भाई -बहन का अटूट रिश्ता होता है। जिन बहनों के भाइयों ने अपने देश की रक्षा के लिए अपने प्राण न्यौछावर कर दिए, उनकी बहनें सुदूर से आकर भी अपने भाई की प्रतिमा पर ही वर्ष राखी बांधती है। ताकि भाई-बहन के प्यार का प्रतीक रक्षाबंधन के त्यौहार पर अपने भाई की कलाई सूनी नहीं रहे।
भाई की शहादत के बाद भी हर साल ससुराल से मायके आकर बहन उनकी प्रतिमा को बांधती है रक्षासूत्र
भाई की शहादत के बाद भी हर साल ससुराल से मायके आकर बहन उनकी प्रतिमा को बांधती है रक्षासूत्र
शाहपुरा के ग्राम रामपुरा निवासी नक्सली हमले में शहीद मुकेश कुमार बुनकर की बहनें अपने भाई की शहादत के बाद भी पिछले 8 साल से हर बार रक्षाबंधन पर अपने ससुराल से पीहर आकर छोटे भाई की प्रतिमा को राखी बांधकर याद करती है। बहन हंसा देवी करीब 30 किलोमीटर दूर अपने ससुराल विराटनगर क्षेत्र से पीहर रामपुरा सिर्फ इसलिए आती हैं ताकि रक्षाबंधन पर उसके शहीद हुए छोटे भाई की कलाई सूनी न रह जाए। शहीद की चचेरी बहन गोठी देवी, बबली देवी, किरण व महिमा देवी भी हर साल करीब 40 किमी दूर अपने ससुराल से आकर भाई की प्रतिमा पर रक्षासूत्र बांधती है।
रविवार को रक्षाबंधन पर अपने शहीद भाई की कलाई पर रक्षा सूत्र बांधते ही बहन हंसा देवी की आंखों से आंसू छलक पड़े। वह अपने भाई को याद कर फफक पड़ी।

उल्लेखनीय है कि कोबरा बटालियन के जवान मुकेश कुमार बुनकर झारखंड में पदस्थापन के दौरान 24 सितंबर 2012 को नक्सलियों से लड़ते हुए शहीद हो गए। अपने छोटे भाई को खोने के बाद बहन हंसा देवी आज भी उसे अपने नजदीक ही मानती है। रामपुरा में स्थापित भाई की प्रतिमा की कलाई पर हर साल राखी बांधती आ रही है। वह रक्षाबंधन ही नहीं, भैयादूज, दीपावली, होली जैसे सभी त्यौहार घर आकर भाई की प्रतिमा के साथ मनाती हैं। इस दौरान शहीद के पिता रामसहाय बुनकर, वीरांगना बीना देवी, पुत्र बृजेश कुमार, भाई विकास, बाबूलाल, बेटी मोनिका, ममता, ऋषिका, समाजसेवी पूरणमल बुनकर सहित अन्य परिजन भी बहनों के साथ मौजूद थे।

बहन बोली -भाई की शहादत पर गर्व है, लेकिन उसकी कमी हमेशा महसूस होती है
रक्षाबंधन के दिन भाई साथ बिताए पलों को याद कर बहनों के आंसू छलक आए। बहनों ने बताया कि हम सभी भाई -बहन जब छोटे थे तो आपस में मिलजुल कर रहते थे। भाई छोटा था इसलिए भैयादूज पर उससे लेने के बजाय हम उसे उपहार देती थी। आज उसकी कलाई पर राखी सजाती हूं, लेकिन उपहार नहीं दे पाती, इस बात का गम जरूर है। भाई की कमी हमेशा महसूस होती है, लेकिन गर्व है कि उसने देश के लिए बलिदान दिया है।
शहीद परिवार ने समस्याओं के निस्तारण की मांग की


शहीद के परिजनों ने बताया कि बेटा देश की रक्षा के लिए शहीद हुआ इस पर हम सभी को गर्व है, लेकिन सरकार शहीदों को कुछ माह बाद ही भूल जाती है, इसका गम है। शहीद मुकेश कुमार के परिजनों ने बताया कि शहीद के नाम पर आज तक न तो सरकारी विद्यालय का नामकरण हुआ और न ही शहीद स्मृति स्थल का पट्टा जारी हुआ। उन्होंने फर्जी सैनिक द्वारा हजारों रुपए व मूल दस्तावेजों को धोखाधड़ी कर ले जाने के मामले में कार्रवाई करने, शहीद पार्क, पेट्रोल पंप आवंटन करने की भी सरकार से मांग की है।

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