सावां नदी का सीना छलनी, जिम्मेदारों ने जिम्मेदारी टाली

सावां नदी का सीना छलनी, जिम्मेदारों ने जिम्मेदारी टाली

Surendra Singh | Publish: Sep, 02 2018 11:22:05 PM (IST) Bassi, Rajasthan, India

अधिकारियों के टालमटोल रवैये के कारण वसूल रहे मुंहमांगे दाम

आंधी. पर्यावरण संरक्षण एवं नदियों का स्वरूप बिगडऩे से बचाने के लिए सुप्रीप कोर्ट ने बजरी खनन पर पूर्ण रोक लगा दी हो, लेकिन बजरी माफिया बेरोकटोक खनन कर रहे हैं। रोक के बावजूद माफिया रोजाना सैकड़ों वाहन बजरी खनन कर मुंहमांगे दाम पर बेचान कर रहे हैं, लेकिन जिम्मेदार मूकदर्शन बने हैं। क्षेत्र में नाभावाला गांव के समीप सैंथल सागर बांध से निकलने वाली सांवा नदी के बहाव पेटे तथा नदी से सटी खातेदारी भूमि पर भी बड़े पैमाने पर धडल्ले से बजरी का अवैध खनन हो रहा है। रोचक बात यह है कि माफिया ट्रैक्टर- ट्रॉलियों में बजरी भरकर खुलेआम जिम्मेदार अधिकारियों के सामने क्षेत्र के कोथून-मनोहरपुर व अलवर- दौसा वाया टहला राजमार्गों से गुजरते हंै, लेकिन पुलिस, राजस्व एवं खनिज विभागों के जिम्मेदार अधिकारी चुप्पी साधे हैं।

रोजाना 120-150 ट्रॉली बजरी खनन

स्थानीय लोगों की मानें, तो यहां सवा सौ से डेढ़ सौ ट्रॉली बजरी खनन होता है। सैंथल सागर बांध की मुख्य वेस्टवेयर से पीलवा गांव तक लगभग पांच किलोमीटर दूरी तक नदी के बहाव पेटे और नदी से सटी खातेदारी भूमी पर करीब दो दर्जन लोग बजरी का अवैध खनन कर रहे हैं। बजरी खदानों में दिनरात जेसीबी मशीनों और ट्रैक्टर-ट्रॉलियों का जमघट लगा रहता है।

जयपुर तक सप्लाई, भाव भी मुंह मांगे

खनन में लिप्त माफिया बजरी को मनोहरपुर, जमवारामगढ़, कानोता, दौसा, बांदीकुई के अलावा जयपुर तक सप्लाई करते हैं। जानकारों के अनुसार सावां नदी की बजरी जयपुर में 14-15 हजार रुपए प्रति ट्रॉली के भाव से बिकती है। वहीं जमवारामगढ़ तक इसके प्रति ट्रॉली 6 से 7 हजार तक के भाव हैं। बजरी के मुंह मांगे दाम मिलने से अवैध खनन में लिप्त लोगों की चांदी हो रही है। जमवारामगढ़ उपखंड क्षेत्र में गौरव पथ, सम्पर्क सड़क, सरकारी भवनों और गांवों के आम रास्तों के निर्माण में यही बजरी काम में ली जा रही है।

दूसरी सीमा बताकर जिम्मेदार कर रहे किनारा

सैंथल सागर बांध की मुख्य वेस्टवेयर से हांडा साहब की बगीची (ग्रास फ ार्म) तक नदी का बहाव क्षेत्र और खरताला गांव राजस्व सीमा तक नदी से सटी खातेदारी भूमि जमवारामगढ़ उपखंड क्षेत्र में पड़ती है। बगाची पीलवा तक का बहाव क्षेत्र और इससे सटी खातेदारी भूमि दौसा राजस्व क्षेत्र में आती है। बजरी माफिया दोनों की राजस्व क्षेत्र में स्थित भूमि में खनन कर रहे हैं। ऐसे में दौसा राजस्व एवं खनिज विभाग के अधिकारी इस खनन को जमवारामगढ़ का क्षेत्र बताते हैं। इधर, जमवारामगढ़ के प्रशासनिक अधिकारी भी इसे दौसा क्षेत्र में खनन बताकर किनारा कर रहे हैं। कार्रवाई की बजाय एक-दूसरे पर जिम्मेदारी डालकर पल्ला झाड़ लेते हैं।

जिम्मेदारों की जबानी


हमारे राजस्व क्षेत्र में हो रहे अवैध खनन को रोकने के लिए राजस्व विभाग की टीम दबिश देकर कार्रवाई करती रही है। अवैध खनन में लगे लोगों से जुर्माना भी वसूला जाता है। बार-बार कार्रवाई करने के बाद भी पूर्णतया अंकुश नहीं लगा पाया। अब खातेदारों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई करने के लिए उन्हें नोटिस जारी किए जा रहे हैं। जमवारामगढ़ क्षेत्र की सीमा में कार्रवाई नहीं होने से हमें भी नुकसान हो रहा है।
देवी सिंह, तहसीलदार, दौसा
खनिज विभाग बजरी परिवहन करने के दौरान ही कार्रवाई कर सकता है। दौसा राजस्व क्षेत्र से निकलने वाली ट्रॉलियों पर तो समय-समय पर कार्रवाई की जा रही है, लेकिन अधिंकाश ट्रॉलियां जमवारामगढ़ क्षेत्र से जाती हैं, जहां हम कार्रवाई नहीं कर सकते। वैसे कितने ही प्रयास कर लें, बजरी खनन पर पूरी तरह अंकुश नहीं लग सकता।
सोनू अवस्थी, खनिज विभाग सर्वेयर, दौसा
अवैध खनन की बजरी का परिवहन करने वाली टै्रक्टर-ट्रॉलियों को पकड़कर खनिज विभाग के सुपुर्द कर दिया जाता है। फि र भी हमारे क्षेत्र से अधिक परिवहन हो रहा है, तो कार्रवाई में तेजी लाई जाएगी।
दिलीप सिंह, थानाधिकारी, आंधी
नाभावाला के समीप सांवा नदी के बहाव पेटे की राजस्व भूमि और नदी से सटी खातेदारी भूमि में अवैध बजरी खनन की जानकारी मिली थी। राजस्वकर्मियों को भेजकर कार्रवाई भी की थी। अवैध बजरी खनन का अधिकांश क्षेत्र दौसा राजस्व सीमा का है। इसमेंं कार्रवाई भी वहीं के अधिकारी करेंगे।
ज्ञानचंद जैमन, तहसीलदार, जमवारामगढ़

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