फिर कैसे होगा 'हाथ' मजबूत

प्रचंड बहुमत से प्रदेश की सत्ता पर काबिज भाजपा को अखाड़ फेंकने का दावा कर रही कांग्रेस में गुटबाजी चुनाव से पहले ही नज़र आने लगी है।

By: Arun sharma

Published: 30 May 2018, 03:43 PM IST

अरुण शर्मा

जयपुर। प्रचंड बहुमत से प्रदेश की सत्ता पर काबिज भाजपा को अखाड़ फेंकने का दावा कर रही कांग्रेस में गुटबाजी चुनाव से पहले ही नज़र आने लगी है। टिकट की दावेदार और कार्यकर्ता केन्द्रीय नेतृत्व की ओर से बूथस्तर पर पार्टी की नब्ज़ टटोलने आए पदाधिकारियों के सामने एक दूसरे के कपड़े फाड़ रहे हैं। शाहपुरा विधानसभा के दो बार से कांग्रेस प्रत्याशी रहे आलोक बेनीवाल और कांग्रेस के राष्ट्रीय प्रवक्ता संदीप चौधरी के कार्यकर्ताओं में शुक्रवार को जमकर लात-घूंसे चले।

 

हालांकि शाम तक प्रदेश नेतृत्व ने बेनीवाल और चौधरी की ओर से पार्टी हित में साथ काम करने का वीडियो जारी करवाकर 'डैमेज कंट्रोल' करने का प्रयास किया, जबकि अभी तो चुनावी पिक्चर बाकी है। क्या विधानसभा चुनाव से छह महीने पहले कार्यकर्र्ताओं में इस तरह की अनुशासनहीनता चिंताजनक नहीं है ? जयपुर ग्रामीण की दस में से महज एक सीट पर काबिज कांग्रेस को इस पर गंभीरता से मनन करना होगा। दरअसल जयपुर की कई विधानसभाओं में गुटबाजी हावी है।

 

बगरू में महंगाई के खिलाफ शुक्रवार को हुए पुतला दहन कार्यक्रम में ब्लॉक स्तर पर कांग्रेस दो गुटों में बंटी रही जबकि अजमेर सांसद डॉ.रघु शर्मासमेत कई बड़े नेता भी मौजूद थे। बस्सी में गुटबाजी के किस्से आए दिन सामने आते रहे हैं। विराटनगर विधानसभा सीट के लिए एक दर्जन से ज्यादा पदाधिकारी एवं कार्यकर्ता दावेदारी की ताल ठोक रहे हैं। लेकिन ये भी कई गुटों में बंटे हैं।

 

पिछले दिनों हुए मेरा बूथ मेरा गौरव कार्यक्रम में प्रदेश प्रभारी को अपना दमखम दिखाने के लिए सब अलग-अलग नजर आए। हालांकि कोटपूतली में कांग्रेस की गुटबाजी खुलकर नजर नहीं आती, लेकिन विधायक के कार्यक्रमों में एक पीसीसी सदस्य नजर नहीं आते। जमवारामगढ़ विधानसभा भी गुटबाजी से अछूता नहीं है। ऐसे में केवल सत्ता के सपनें संजोने से काम नहीं चलेगा प्रदेश नेतृत्व को गुटबाजी को रोकने के लिए कार्यकर्ताओं को अनुशासन का पाठ भी पढ़ाना होगा।

Arun sharma Reporting
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