जयपुर के कानोता में नदी से चांदी कूटने की मची होड, रोजाना दौड़ रही 200 ट्रैक्टर ट्रॉली

Dhund nadee mein ho raha bajaree ka avaidh khanan: जयपुर-आगरा राष्ट्रीय राजमार्ग की सीमा से लगती ढूंढ नदी क्षेत्र में अवैध रूप से बजरी और मिट्टी खनन जारी है।

By: vinod sharma

Published: 27 Nov 2019, 04:50 PM IST

कानोता(जयपुर). जयपुर-आगरा राष्ट्रीय राजमार्ग की सीमा से लगती ढूंढ नदी क्षेत्र में अवैध रूप से बजरी और मिट्टी खनन जारी है। नदी से लगते सड़क मार्गों पर बजरी-मिट्टी से भरी ट्रैक्टर ट्रॉलियां दौड़ रही हैं। illegal mining in Dhund River खनिज विभाग की कार्रवाई नहीं होने से गोरखधंधे से जुड़े लोगों के हौसले बुलंद हैं।

नदी हो रही खोखली और खननकर्ता कर रहे मौज...
ऐसे में नदी खोखली हो रही है और खननकर्ता मौज कर रहे हैं। ऐसे में हाईकोर्ट के आदेश की अवहेलना हो रही है। सूचना के बाद भी जिम्मेदार कार्रवाई का आश्वासन देकर पल्ला झाड़ रहे हैं। illegal mining in Dhund River बस्सी उपखंड क्षेत्र के कानोता से होकर गुजर रही dhund nadi ढूंढ नदी में खनन पर कोई रोकटोक नहीं होने से खननकर्ता जब चाहे जेसीबी और ट्रैक्टर की कडाई से खुदाई कर लेते हैं। ये खेल कानोता से गुजर रहे राष्ट्रीय राजमार्ग स्थित ढूंढ नदी पुल से मात्र 500 मीटर की दूरी पर ही चल रहा है, जबकि यहां से आए दिन आला अधिकारियों का आना-जाना लगा रहता है।

नदी का अस्तित्व खतरे में...
खननकर्ताओं की मनमर्जी और अधिकारियों की अनदेखी से dhund nadi ढूंढ नदी का अस्तित्व खतरे में है। यहां सैकड़ों बीघा जमीन पर मिट्टी और बजरी का खनन किया जा रहा है। नदी के अस्तित्व के साथ ही पर्यावरण को भी नुकसान पहुंच रहा है। illegal mining in Dhund River कानोता ढूंढ नदी में चल रहे खनन के खेल के चलते यहां राजमार्ग सहित आसपास की सड़कों पर प्रतिदिन बजरी और मिट्टी के लदे सैकड़ों ट्रैक्टर दौड़ लगाते रहते हैं। dhund nadi रात्रि और तड़के बजरी से भरी ट्रैक्टर-ट्रॉलियां भरकर बिकने के लिए रवाना होती हैं। जानकारों की मानें तो बजरी से भरी एक ट्रैक्टर-ट्रॉली की कीमत 5 से 6 हजार रुपए और मिट्टी की एक ट्रॉली 400 से 500 रुपए तक बताई जा रही है।

रोजाना 100-200 ट्रॉली खनन...
क्षेत्र में खननकर्ता पर बड़ी कार्रवाई नहीं होने से नदी में लगे दर्जनभर पैड़ो (मिट्टी भरने के लिए लगाया गया जुगाड़) से रोजाना 150 से 200 ट्रैक्टर-ट्रॉलियां बजरी और मिट्टी से भरकर निकलती हैं। नदी में मिट्टी और बजरी भरने के लिए ट्रैक्टर-ट्रॉलियों के चालक लाइन लगाकर इंतजार करते देखे जा सकते हैं। कई बार तो अधिक चक्कर लगाने के लिए तड़के 5 बजे ही dhund nadi नदी से ट्रैक्टर-ट्रॉलियां मिट्टी-बजरी भरकर रवाना हो जाती हैं।

मिट्टी बेचकर कर रहे भरत...
कानोता थाना क्षेत्र में काफी संख्या में ईंट भट्टे संचालित हैं। भट्टा संचालकों द्वारा खेतों की मिट्टी अच्छे दामों में खरीदी जाती है। उन खेतों से करीब दो से ढाई फीट गहराई तक मिट्टी खोदकर कच्ची ईंट बनाने के काम ले ली जाती है। उसके बाद जमीन मालिक खननकर्ता से मिलकर औने-पौने दामों में मिलकर खेत में फिर से मिट्टी भरने का ठेका दे देते हैं। उसके बाद खननकर्ता रात में जेसीबी, डम्पर और टै्रक्टर लगाकर नदी से मिट्टी की खुदाई कर खेतों में मिट्टी डालकर मोटी रकम वसूलते हैं।

यहां से दौड़ रहे ट्रैक्टर-ट्रॉली...
कानोता क्षेत्र के रामरतनपुरा, बाल्यावाला, ड्योड़ा चौड़, सुमेल, बगराना, विजयपुरा सहित आसपास के गांवों की सड़कों पर मिट्टी और बजरी से लदे ट्रैक्टर-ट्रॉलियां सरपट दौड़ते नजर आ रहे हैं। खनन विभाग के अधिकारियों द्वारा करीब डेढ़-दो महीने पहले परिवहन कर रहे वाहनों पर कार्रवाई की गई थी लेकिन नदी क्षेत्र में हो रहे खनन पर जिम्मेदार ध्यान नहीं दे रहे।

पेड़ भी हो रहे धाराशायी...
जानकारी अनुसार खनन में जुड़े लोगों ने मिट्टी खनन के साथ वन विभाग के सैकड़ों हरे पेड़ों को उखाड़कर ले गए है। कई पेड़ों को उखाड़कर वही फेंक दिया है। ऐसे में वन विभाग को लाखों रुपए की चपत लग रही है। पर्यावरण को नुकसान हो रहा है वो अलग है। इसके बावजूद वन विभाग इनके खिलाफ कार्रवाई में सुस्ती कर रहा है।

इनका कहना है...
खननकर्ता नदी क्षेत्र से चोरी छिपे मिट्टी का दोहन कर रहे हैं। साथ ही वन विभाग के पेड़ों को भी नुकसान पहुंचा रहे हैं। खननकर्ता के खिलाफ कार्रवाई ही जाएगी। जेडीए और खनन विभाग के साथ मिलकर पैडे हटाए जाएंगे।
-सीताराम मीणा, रेंजर, वन विभाग कानोता

ढूंढ नदी में अवैध खनन को लेकर खननकर्ता के खिलाफ कानोता पुलिस के साथ मिलकर जल्द ही कार्रवाई की जाएगी।
-रिंकू कोली, सर्वेयर, खनन विभाग

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