दर्दनाक हादसे को आज एक साल: बिजली कड़कते ही कांप उठती है रूह, लाडलों को खो चुके दो परिवार आज भी सदमे से नहीं उभरे

पिछले गणतंत्र दिवस पर चैनपुरा में दो स्कूली छात्रों की बिजली गिरने से
हुई थी मौत

By: vinod sharma

Published: 26 Jan 2018, 02:46 PM IST

बस्सी (जयपुर)। साल गुजर गया। सरकारी सहायता राशि मिली गई। सबकुछ सामान्य हो गया, लेकिन आकाशीय बिजली गिरने के कारण अपने लाडलों को खो चुके दो परिवार सदमे से अब तक नहीं उभर पाए हैं। स्कूली बच्चे भी इस कदर डरे हुए हैं कि आकाश में बिजली कड़कते ही रूह कांप उठती है। यह स्थिति चैनपुरा गांव के उन परिवारों की है, जो 26 जनवरी 2017 को स्कूल जाने के दौरान बिजली गिरने के कारण दो बच्चों को खो चुके हैं। राजस्थान पत्रिका ने गुरुवार को इस दर्दनाक घटना को सालभर पूरा होने पर पीडि़त परिवारों से वस्तुस्थिति जानी।

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घर की रौनक ही चली गई
जैसे ही पत्रिका संवाददाता अशोक मीना के घर पहुंचा तो उसकी मां व भाई असहज नजर आए। वे गुमशुम थे। मां मांगीदेवी रो रही थी तो भाई व अन्य लोग सुस्ते थे। परिवार की अन्य महिलाओं का कहना था कि बेटे का गम थोड़ी भुला सकां छा। उंकी बार-बार याद आव छै। उंके जाबा सूं, घर की रौनक ही चली गई। घर को आंगणो सूनो हो ग्यो। महावर मोहल्ले में रहने वाले यादराम महावर के यहां पहुंचे तो माता-पिता मजदूरी करने गए थे, लेकिन घर पर मिली मृतक गणेश की बहन भाई की फोटो को गोद में लेकर उसके साथ बिताए पलों को याद कर सुबक रही थी। उसने बताया कि भाई की मौत को एक साल पूरा हो गया, लेकिन अब तक वो परिवार के हर सदस्य को याद आता है।

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क्रिकेट खेल रहे बच्चों पर भी गिरी थी
मोहनपुरा पंचायत के भागीरथपुरा की ढाणी में भी 26 जनवरी 2017 को ही सुबह 9 बजे क्रिकेट खेलते समय तेज बारिश शुरू होने पर कुछ बच्चे एक बबूल के पेड़ के नीचे छिप गए। इसी पेड़ पर बिजली गिर जाने से नौ बच्चे झुलस गए थे।

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मास्साब, गिरेगी तो नहीं
राजकीय उच्च प्राथमिक विद्यालय चैनपुरा के प्रधानाध्यापक कालूराम मीना ने बताया कि दो स्कूली बच्चों के आकाशीय बिजली से दम तोडऩे के बाद जैसे बिजली कड़कती है। स्कूली बच्चे डर जाते हैं। बच्चों को इस कदर खौफ बन गया कि पूछ उठते हैं कि मास्साब, गिरेगी तो नहीं। यही हाल बच्चों के परिवारों का ही नहीं, बल्कि गांव के अन्य परिवारों को भी है। मौसम खराब होने एवं बिजली कड़कने पर कोई भी परिवार अपने बच्चों को बाहर नहीं निकलने देता है। खुद प्रधानाध्यापक ने बताया कि उन्होंने तो खराब मौसम होने पर बच्चों को नहीं आने की नसीहत दे रखी है। हालांकि सालभर में ऐसा कोई दिन आया नहीं है।

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बीमा के प्रति रहें जागरूक
जानकार सूत्रों का कहना है कि सरकारी विधालयों में पढऩे वाले बच्चों का राज्य बीमा एवं प्रावधायी विभाग की ओर से सुरक्षा दुर्घटना बीमा योजना के तहत बीमा करवाया जाता है। घटना-दुर्घटना में मौत का शिकार होने पर आश्रित लोग विद्यालय प्रशासन के सहयोग से पत्रावलियां तैयार करके इस योजना का लाभ ले सकते हैं।

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यह था मामला
जानकार सूत्रों के अनुसार बस्सी तहसील की ग्राम पंचायत मोहनपुरा के गांव चैनपुरा के राजकीय उच्च प्राथमिक विधालय में 26 जनवरी 2017 को गणतंत्र दिवस समारोह मनाया जा रहा था। मौसम खराब था। हल्की बारिश आ रही थी। इस कार्यक्रम में हिस्सा लेने के लिए चैनपुरा गांव के ही सातवीं कक्षा में अध्ययनरत अशोक मीना पुत्र लक्ष्मीनारायण मीना एवं आठवीं कक्षा में अध्ययनरत गणेशनारायण महावर पुत्र यादराम कोली घर से करीब करीब एक किलोमीटर दूर स्थित स्कूल में जा रहे थे। इसी दौरान आकाश में बिजली चमकने लगी तो वे डरकर सड़क किनारे स्थित नीम के पेड़ के नीचे जा छिपे । चंद मिनट बाद ही बिजली उन दोनों बच्चों पर गिरी, जिससे वे बुरी झुलस गए। सूचना पर स्कूल प्रशासन ने ध्वजारोहण के बाद कार्यक्रम स्थगित कर दिया। वहीं ग्रामीणों ने दोनों बच्चों को सवाई मानसिंह चिकित्सालय जयपुर में पहुंचाया, जहां उनकी मौत हो गई। इसके बाद दोनों परिवारों में ही नहीं, बल्कि स्कूल एवं पूरे गांव में मातम छा गया था।

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इनका कहना है
मृतक छात्र अशोक मीना एवं गणेशनारायण महावर की स्मृति में गणतंत्र दिवस समारोह मनाए जाने के बाद श्रद्धांजलि कार्यक्रम भी आयोजित करेंगे, जिसमें दोनों छात्रों को पुष्पांजलि अर्पित की जाएगी।
कालूराम मीना, प्रधानाध्यापक, राजकीय उच्च प्राथमिक विधालय चैनपुरा

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