Independence Day special...आजादी के लिए 5 फीट के गड्ढे में काटे 60 दिन

Independence Day special...आजादी के लिए 5 फीट के गड्ढे में काटे 60 दिन

Satya Prakash | Publish: Aug, 14 2019 10:42:01 PM (IST) Bassi, Jaipur, Rajasthan, India

-19 वर्ष की आयु में सत्याग्रह आंदोलन से जुड़ गए थे मुक्तिलाल मोदी

 

 

इस स्वतंत्रता दिवस के उपलक्ष्य में हम पाठकों को देश की आजादी के लिए अपना सर्वस्व न्यौछावर करने वाले स्वतंत्रता सेनानियों के अनुभव और संघर्ष की कहानियों के बारे में बता रहे हैं।

 

15 अगस्त विशेष...आजादी के लिए 5 फीट के गड्ढे में काटे 60 दिन

 

-19 वर्ष की आयु में सत्याग्रह आंदोलन से जुड़ गए थे मुक्तिलाल मोदी

 

-सत्याग्रह आंदोलन के दौरान दो बार जेल में बंद रहे

 

-आंदालनकारियों को बैलगाड़ी में जोतकर चलाया जाता था

 

 

 

शाहपुरा। देश की आजादी के लिए कई वीर सपूतों ने संघर्ष करते हुए अपना सर्वस्व न्यौछावर कर दिया था। उनके संघर्ष के किस्से आज भी बड़े -बुजुर्ग लोगों की जुबान पर है। इस स्वतंत्रता दिवस के उपलक्ष्य में हम पाठकों को देश की आजादी में अपना सर्वस्व न्यौछावर करने वाले स्वतंत्रता सेनानियों के अनुभव और संघर्ष की कहानियों के बारे में बता रहे हैं।

 

 

इस कड़ी में शाहपुरा तहसील के अमरसर कस्बा निवासी स्वतंत्रता सेनानी रहे मुक्ति लाल मोदी के जीवन और देश की आजादी के लिए किए गए संषर्घ के बारे में उनके भतीजे 70 वर्षीय कैलाश मोदी और अन्य परिजनों से चर्चा की तो उन्होंने अपने ताऊ के स्वतंत्रता आंदोलन से जुड़े कई किस्से सुना दिए।

पेश है कुछ अंश---

 

 

 


आजादी का जुनून इतना कि शादी तक नहीं की


सत्याग्रह आंदोलन में सक्रिय भूमिका निभाने वाले अमरसर निवासी स्वतंत्रता सेनानी मुक्तिलाल मोदी का जन्म वर्ष 19 जून 1919 में अमरसर कस्बे के एक साधारण परिवार में हुआ। उनके भतीजे कैलाश मोदी ने बताया स्वतंत्रता सेनानी रहे ताऊ को बचपन से ही देश की आजादी का जुनून था। करीब 19 वर्ष की उम्र में ही वे सत्याग्रह आंदोलन में शामिल हो गए और दो बार जेल भी गए।

 

 

मोदी पहली बार 1938 में और दूसरी बार 1939 में सत्याग्रह के कारण जेल गए। उनके युवा होते ही शादी के लिए कई जगह से रिश्ते भी आए, लेकिन उनके दिल में देश की आजादी का जूनून था, इसलिए परिजनों को शादी करने से ही इनकार कर दिया और वे अविवाहित ही रहे। उनके भाई का परिवार आज भी अमरसर में बने वर्षों पुराने घर में निवास करता है।

 

 

 


दो माह तक रहे जेल में बंद, दी गई यातनाएं

 

स्वतंत्रता सेनानी मुक्ति लाल मोदी के भतीजे कैलाश मोदी ने बताया कि उनके ताऊ मुक्ती लाल मोदी स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान दो बार जेल गए। वे कई बार सत्याग्रह आंदोलन, जेल में दी जाने वाली यातनाओं और संघर्ष से जुड़े किस्से सुनाया करते थे। उनके मुताबिक ताऊ बताया करते थे के अंगे्रजी हुकूमत के दौरान भारत छोडो आंदोलन में शामिल होने वाले लोगों को कड़ी यातनाएं दी जाती थी।

 

 

कई बार बैल गाड़ी में जोतकर चलाया जाता था। जिससे लोगों के दिल में डर बैठा रहे और आंदोलन में शामिल नहीं हो। उन्होंने आजाद मोर्चा के गठन के बाद वर्ष 1942 में भारत छोड़ो आंदोलन का जयपुर में प्रचार-प्रसार किया।

इस आंदोलन के चलते स्वत्रंतता सेनानी मोदी को अंगे्रजों ने गिरफ्तार कर लिया। यहां से उनको अण्डमान निकोबार ले जाकर 2 माह तक जेल में बंद रखा। जहां उनको काफी यातनाएं दी गई।

 

 

 

 

60 दिन तक 5 फीट के गडढे में रहे मोदी, पैर भी नहीं फैला सकते थे


भारत छोडो आंदोलन में शामिल क्रांतिकारियों को जेल में बंद कर कड़ी यातनाएं दी जाती थी। क्रांतिकारियों को यातना देने के लिए अण्डमान निकोबार ले जाया जाता था। यहां जमीन में 5 फीट गहरे और इतनी ही चौड़ाई के गडढे में रखा जाता था। जिससे वे पैर फैलाकर सो भी नहीं सकते थे। स्वतंत्रता सेनानी मोदी को भी 2 माह तक यहीं रखा गया। क्रांतिकारी भारत माता की जय लगाते तो उनको कई दिन तक भूखा व प्यासा भी रखा जाता।

 

 

 

आजादी के बाद चार बार रहे विधायक

 

स्वत्रतंता सेनानी मोदी देश की आजादी के बाद चार बार विधायक भी रहे है। मोदी पहली बार वर्ष 1952 में बैराठ विधानसभा क्षेत्र से विधायक चुने गए। इसके बाद 1957 में भी बैराठ से और वर्ष 1962 व 1985 में कोटपूतली से विधायक बने। उन्होंने विधायक रहते हुए कोटपूतली, विराटनगर, शाहपुरा, अमरसर सहित आस पास के क्षेत्र में काफी विकास कार्य कराए।

 

 


कोटपूतली में उनको विकास पुरुष के नाम से जाना जाता है। कोटपूतली में दो सरकारी कॉलेज, सरकारी अस्पताल, धर्मशाला, कृषि विज्ञान केन्द्र, पावटा का जवाहर नवोदय विद्यालय खुलवाना उनकी ही देन है। कोटपूतली के प्रबुद्ध लोगों ने उनके नाम से एक स्मृति संस्थान भी बना रखा है। संस्थान से जुड़े लोग उनकी पुण्य तिथि, जन्मदिवस व अन्य अवसरों पर विभिन्न कार्यक्रम आयोजित करते हैं।

 

 

वहीं, अमरसर के धोबीघाट समाधिस्थल पर भी ग्रामीणों की ओर से उनकी पुण्य तिथि पर रामधुनी कार्यक्रम होता है। परिजनों की ओर से कस्बे के चौकी का बड़ खेल स्टेडियम में क्रिकेट प्रतियोगिता का आयोजन भी कराया जाता है। जिसमें प्रदेशभर की टीमें हिस्सा लेती है।

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