करौली हादसे के बाद अब खुली हैं परिवहन विभाग की नींद

-एक सप्ताह में 24 के चालान, 4 बस सीज और 40 हजार रुपए का जुमार्ना वसूला
-स्कूली बसों की जांच के लिए चलाया अभियान

By: Kailash Chand Barala

Updated: 03 Mar 2019, 08:07 PM IST


शाहपुरा.
परिवहन विभाग और निजी स्कूल प्रशासन की लापरवाही ने करीब एक सप्ताहभर पहले करौली में एक बच्चे की जिंदगी को लील ली थी। हादसे के बाद प्रदेशभर में स्कूली बसों को लेकर परिवहन के हाथ-पांव फूल गए थे। इस पर परिवहन आयुक्त एवं शासन सचिव के निर्देश पर नियमों को दरकिनार कर दौड़ रही बाल वाहिनीयों के खिलाफ अब कार्रवाई शुरू की है। जबकि पहले परिवहन विभाग के अधिकारी गहरी नींद में सो रहे थे।यहां शाहपुरा जिला परिवहन विभाग के आंकड़ों पर गौर किया जाए तो 2018, अप्रेल माह से 22 फरवरी तक एक साल में महज 22 स्कूली बसों का चालान कर 40 हजार 500 रुपए का जुर्माना वसूला है। जबकि हादसे के बाद महज सप्ताह भर में ही 24 स्कूली बसों का चालान और ४ बसों को सीज कर 40 हजार रुपए की आय अर्जित की है। इसी से अंदाजा लगाया जा सकता है कि परिवहन विभाग कितनी गहरी नींद में सो रहा था। यहां शाहपुरा जिला परिवहन विभाग कार्यालय के अधीन विराटनगर और शाहपुरा क्षेत्र में करीब १५० बाल वाहिनी पंजीकृत है। दोनों उपखण्ड क्षेत्र में ११९ निजी स्कूलों में बाल वाहिनी संचालित की जा रही है। परिवहन विभाग में पंजीकरण से कई गुना वाहन स्कूल बसों के रुप में सड़कों पर दौड़ रहे हैं। जिनमें बसों के अलावा मैजिक, टैंपो भी शामिल है। इन वाहनों की क्षमता से ज्यादा बच्चों को बैठाया जाता है। परिवहन विभाग की अनदेखी से स्कूली वाहन संचालकों के हौसले इस कदर बुलंद थे कि नियम कायदों को ताक पर रखकर बसों को दौड़ाया जा रहा है। नियमों के मुताबिक स्कूली बसों में दो इमरजेंसी गेट, प्रथम उपचार बॉक्स, आग बुझाने का उपकरण आदि होने चाहिए। साथ ही बस के कर्मचारियों को निर्धारित ड्रेस कोड में रहना आवश्यक है, लेकिन क्षेत्र मेें संचालित बसों में अब भी नियमों की पालना होती नजर नहीं आ रही है।(का.सं.)

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ऐसे हुआ था करौली में हादसा
करीब एक सप्ताह पहले करौली के एक निजी स्कूल के बच्चे ने अपनी जान गंवा दी। यह हादसा हिण्डौन सिटी मार्ग पर गुडला गांव में हुआ था। निजी स्कूल की खटारा बस बच्चों को गुड़ला गांव से बच्चों को करौली ला रही थी। बस के अंदर चालक के पीछे एक हिस्से में धरातल की चद्दर जर्जर होने से कक्षा एक का विद्यार्थी बस के अंदर से नीचे गिर गया था। जिससे बच्चे को बस के पहियों ने कुचल दिया था।

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विभाग की तीन टीम जांच में जुटीहादसे के बाद जिला परिवहन विभाग की तीन टीम स्कूलों बसों की जांच कर रही है। तीनों टीमों में करीब पांच सदस्य है। यहां तहसील क्षेत्र में अनेक निजी स्कूल खुले हुए है। जिनमें कई स्कूलों में संचालित वाहनों की व्यवस्था सुरक्षा के लिहाज से फिट नहीं है। ज्यादातर ग्रामीण क्षेत्र में हालात खराब है।

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ये हैं कार्रवाई के आंकड़े
परिवहन विभाग के अधिकारियों के मुताबिक अप्रेल २०१८ से १ मार्च तक नियमों के विपरित चल रहे ४६ स्कूली बसों का चालान व ४ बसों को सीज कर ८० हजार ५०० रुपए की आय अर्जित की गई है। इनमें से हादसे के बाद २४ बसों का चालान, ४ बसे सीज और ४० हजार रुपए की आय शामिल है। अधिकारियों ने बताया कि इनमें बिना फिटनेश, बिना इंडीकेटर, बिना प्रदूषण प्रमाण पत्र, बिना ड्राइविंग लाइसेंस, बिना पेंट, बिना फस्र्ट एड बॉक्स और बिना रिफ्लेक्टर के दौडऩे वाले वाहन शामिल है।

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स्कूली वाहनों के लिए ये नियम जरूरी
-स्कूल बस का रंग सुनहरी पीला।
-आगे पीछे स्कूल बस लिखा हो।
-बस चालक के पास पांच साल पुराना ड्राइविंग लाइसेंस जरूरी।
-स्कूल बसों के साथ-साथ ड्राइवर का भी पंजीकरण जरूरी।
-चालक व सहायक के पास भी हो ड्राइविंग लाइसेंस।
-बस में सीट क्षमता से अधिक बच्चे नहीं होने चाहिए।
-बस में सीट के नीचे बैग रखने की व्यवस्था होनी चाहिए।

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इनका कहना है------
शाहपुरा और विराटनगर क्षेत्र में नियमों के विपरित संचालित वाहनों के खिलाफ कार्रवाई की जा रही है। इसके लिए तीन टीम लगी हुई है। वर्ष २०१८ से १ मार्च तक ४६ का चालान, ४ बसों को सीज करने की भी कार्रवाई की है। आगे भी कार्रवाई जारी रहेगी। ---धर्मपाल आसीवाल, जिला परिवहन अधिकारी,

Kailash Chand Barala Reporting
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