अस्पतालों में नहीं जीवन रक्षक दवा

- पशुओं को भगवान भरोसे छोड़ा

शाहपुरा.

पशुपालन विभाग ने शाहपुरा नोडल में ही नहीं जिले के पशुओं को भगवान भरोसे छोड़ दिया है। पशु अस्पतालों में कई दिनों से एक भी जीवन रक्षक दवा नहीं है। पशुपालकों को खुश करने के लिए विभाग ने सिर्फ सहायक दवाइयां दी थी, जो पिछले एक सप्ताह से पशु अस्पतालों में नहीं है। दवा के घोर अभाव के कारण पशु चिकित्सक दवा देने के एवज में टालमटोल रवैया अपनाने को मजबूर हैं। पशुपालक भी बाजार में दवा खरीदने को विवश हैं। जानकारी के मुताबिक शाहपुरा में दो नोडल केन्द्र है। जिनके अधीन १७ अस्पताल और २६ सब सेंटर है। जबकि पूरेे जिले में करीब ४०० संस्थाए है। जिनमें लाखों पशुओं के उपचार के लिए दवाईयां प्राप्त नहीं है। सूत्रों के मुताबिक करीब एक माह पहले पशुपालन विभाग की ओर से राज्य से दवा आपूर्ति का टेंडर निकाला गया था। टैंडर प्रक्रिया पूरी हो चुकी है, लेकिन अभी तक दवा आपूर्ति शुरू नहीं की गई है। हालांकि अधिकारियों के मुताबिक अभी १५ दिन दवा आपूर्ति होने की संभावना है। जिला स्तर पर समान्य दवा की आपूर्ति के लिए सूची तैयार की जा रही है।(का.सं.)

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सर्दी एवं बारिश में बीमारियों का रहता खतरा
मौसम बदलाव एवं बरसात के मौसम में पशुओं को कई तरह की बीमारी होती है। इसके उपचार के लिए दवा की आपूर्ति होना अनिवार्य है। चिकित्सकों के मुताबिक मौसम बदलाव और बारिश में पशुओं में डायरिया, चर्म रोग, घाव और पेट में कीडे अधिक होते है। बुखार, संक्रमण जैसी बीमारियों का भी प्रकोप रहता है। इलाके में पशुओं के उपचार के लिए एकमात्र विकल्प पशु चिकित्सालय हैं। दवा के अभाव में चिकित्सक पशुपालकों को टालमटोल रवैया अपनाने को मजबूर है।

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इन दवाओं की है कमी
नाम नहीं छापने की शर्त पर एक चिकित्साधिकारी बताया कि जिले में जीवन रक्षक दवा नहीं है। पशु चिकित्सालय में समान्य दवा भी समाप्त हो चुकी है। आम तौर पर पशुओं को डायरिया, चर्म रोग, घाव और पेट में कीड़े अधिक होते हैं। डायरिया में साइजोल, पेट में कीडे होने पर फेनबेंडाजोल, घाव में कैपक्योर दवा दी जाती है। वहीं एंटीबायोटिक दवा बुखार, फेफड़े में समस्या, कान, त्वचा, मूत्र, रक्त के संक्रमण में दी जाती है। एंटिसेप्टिक लोशन, एबजौरबेंट कॉटन, गौज व बैंडेज, मैगनिशियिम सल्फेट, सोडियम बाई कार्बोनेट, कॉपर सल्फेट, एंटी स्पाज मेडिक इंजेक्शन, एस्ट्रींजेंट पाउडर, एलवेंडाजॉल, ऐंटीजायमेटिक, डेक्सामेथाजोन इंजेक्टेबुल दवा का अभाव है।

---------शाहपुरा में की भ्रमणशील इकाई में नहीं चिकित्सक यहां पशु चिकित्सालय के अधीन करीब चार साल पहले से भ्रमणशील चिकित्सा इकाई भी संचािलत की गई थी। जिमसें एक चिकित्सक, एक कम्पउण्डर, एक चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी लगाए थे। फरवरी माह २०१९ को बजट के अभाव में भ्रमणशील इकाई से गाड़ी को हटा दिया गया था। हालांकि अब वापस चालू कर दिया है, लेकिन इसमें चिकित्सक का पद भी कई दिनों से खाली पड़ा है।
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फैक्ट फाईल
जिले में चिकित्सा संस्थाए---तकरीबन ४०० शाहपुरा में नोड़ल केन्द्र ----२पशु चिकित्सालय-----१७सब सेंटर ------२६विराटनगर में नोडल केन्द्र -----२

वर्जन----
देरी से टैंडर हुए है। कुछ कमी रह गई थी। पुन: टैंडर किए है। १०-१५ दिन में सभी जगह दवाओं की आपूर्ति हो जाएगी। -----डॉ. पदमचन्द कानखेडिया, उप निदेशक, पशुपालन विभाग।

Kailash Chand Barala
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