मैड़ पीएचसी को 15 वर्ष से महिला चिकित्सक का इंतजार

मैड़ पीएचसी को 15 वर्ष से महिला चिकित्सक का इंतजार

Satya Prakash Sharma | Publish: Sep, 02 2018 08:12:27 PM (IST) Bassi, Jaipur, Rajasthan, India

विराटनगर तहसील के मैड़ क्षेत्र में चार प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र है, लेकिन किसी भी पीएचसी में महिला चिकित्सक नहीं है। ऐसे में गर्भवती महिलाओं को परेशानी उठानी पड़ती है।

 

क्षेत्र की चार पीएचसी में नहीं है महिला चिकित्सक

गर्भवती महिलाओं को होती है परेशानी

शाहपुरा (जयपुर )। सरकार गर्भवती महिलाओं के स्वास्थ्य को लेकर कई योजनाओं की क्रियान्वित कर लाभ देने की वाह-वाही लूट रही है, लेकिन ग्रामीण क्षेत्र के सरकारी अस्पतालों की हकीकत कुछ और ही है। अधिकांश पीएचसी में तो महिला चिकित्सक ही नहीं है। विराटनगर तहसील के मैड़ क्षेत्र में चार प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र है, लेकिन किसी भी पीएचसी में महिला चिकित्सक नहीं है। ऐसे में गर्भवती महिलाओं को परेशानी उठानी पड़ती है। यह स्थिति है क्षेत्र के मैड़, बलेसर, तेवड़ी व आमलोदा प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्रों की। तेवड़ी और आमलोदा में केन्द्र को उपस्वास्थ्य केन्द्र से प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र में क्रमोन्न्त करने के बाद भी भवन उपलब्ध नहीं कराया गया। भवन के अभाव में प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र आज भी उपस्वास्थ्य केन्द्र के पुराने भवन में ही संचालित है। यहां स्टाफ सहित अन्य सुविधाओं की भी कमी है। इतनी बड़ी आबादी के बीच स्वास्थ्य सुविधाएं नहीं होना चिंता का विषय है। ग्रामीणों का कहना है कि अस्पतालों में महिला चिकित्सक नहीं होने से गर्भवती महिलाओं को सरकारी योजनाओं का पूरा लाभ नहीं मिल पा रहा है। प्रसव के लिए भी महिलाओं को दूर अन्य अस्पतालों में जाना पड़ता है। सबसे बड़ी मैड़ पीएचसी में भी कई सालों से महिला चिकित्सक की नियुक्ति नहीं हो सकी। जिससे महिलाओं को प्रसव के लिए विराट नगर, शाहपुरा या जयपुर जाना पड़ता है।


कब होगा इंतजार खत्म

मैड़ क्षेत्र की महिलाएं पिछले 15 वर्ष से महिला चिकित्सक की नियुक्ति का इंतजार कर रही है। ग्रामीणों ने बताया कि 15 वर्ष पहले महिला चिकित्सक की नियुक्ति की थी। उस दौरान यहां समूचे कूण्डला क्षेत्र की महिलाएं प्रसव व अन्य उपचार के लिए आती थी, लेकिन अब महिला चिकित्सक नहीं होने से अन्यत्र जाना पड़ रहा है। ग्रामीण गैंदालाल भार्गव, रामकुमार सिंह शेखावत, मोनू सारस्वत, शशीकान्त चतुर्वेदी ने बताया कि ग्रामीण काफी समय से मांग कर रहे हैं, लेकिन अधिकारी और जनप्रतिनिधि ध्यान नहीं दे रहे। जबकि महिला चिकित्सक के नहीं होने से महिलाओं को उपचार व प्रसव के लिए विराटनगर और शाहपुरा जाना पड़ता है।

 

नाम मात्र के हो रहे प्रसव

 

स्वास्थ्य विभाग के निर्देशानुसार प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्रों पर प्रति माह पांच प्रसव करवाना अनिवार्य है। जबकि उक्त पीएचसी में महिला चिकित्सक नहीं होने से नाम मात्र के प्रसव हो रहे हैं। यहंा पुरुष चिकित्सक ही प्रसव कराते हैं। जिससे महिलाएं अन्य अस्पतालों का रुख कर लेती है।

 

कई गांवों के बीच एक केन्द्र, उसमें भी सुविधा नहीं

 

इलाके में मैड़ का प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र सबसे बड़ा है। हजारों लोगों की आबादी उपचार के लिए इसी स्वास्थ्य केन्द्र पर निर्भर है, लेकिन यहां भी न महिला चिकित्सक है और न ही अन्य सुविधाएं। इस स्वास्थ्य केन्द्र में पुरावाला, जोधुला, तालवा, बेरकी, सताना, स्वामियों की ढाणी, बिहाजर सहित दर्जनों गांवों और ढाणियों के लोग उपचार के लिए आते हैं। यहां महिला चिकित्सक नहीं होने से अधिक परेशानी होती है। अधिकतकर महिलाओं को प्रसव के लिए विराट नगर या शाहपुरा ही जाना पड़ता है।

 

तेवड़ी व आमलोदा में वर्षभर में एक भी प्रसव नहीं हुआ

चारों पीएचसी में हुए प्रसव के आंकड़े सरकारी निर्देशों और दावों की पोल खोलने के लिए काफी है। चारों केन्द्रों में पिछले एक वर्ष में मात्र 29 प्रसव हुए हैं। मैड़ अस्पताल में अप्रेल 2017 से मार्च 2018 तक 28 प्रसव हुए है। जबकि बलेसर पीएचसी में एक प्रसव और तेवड़ी व आमलोदा पीएचसी में तो भवन के अभाव में एक भी प्रसव नहीं हो सका।

 

झोलाछाप कूट रहे चांदी

इलाके के सरकारी अस्पतालों में आवश्यक सुविधाएं नहीं होने से झोलाछाप चांदी कूट रहे हैं। ग्रामीण क्षेत्र की महिलाएं झोलाछाप के जाल में फंसकर उपचार लेती रहती है। इनके खिलाफ भी कार्रवाई नहीं की जाती।

 

मैड़ पीएचसी में महिला चिकित्सक लगाने की मांग की हुई है। शीघ्र ही महिला चिकित्सक लगवाने का प्रयास किया जाएगा। --------डॉ फूलचंद भिण्डा, विधायक, विराटनगर

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