खून के रिश्तों ने ठुकराया,'इंसानियत' ने अपनाया

Makar Sankranti special एक विधवा मां की दर्द भरी दास्तां

आमेर(अचरोल). कहावत में है कि खून के रिश्तों से बढ़कर प्रेम 'इंसानियत' का रिश्ता होता है। कुछ ऐसा ही वाक्या आमेर तहसील में देखने को मिला है। सर्दी में कई दिनों से ठिठुरती अपनों की ठुकराई एक महिला को एक जने ने सहारा दिया। जयपुर निवासी एक जने ने धार्मिक स्थलों के बाहर भीख मांग कर गुजर बसर करने वाली महिला को किराए पर कमरा दिलवाया और उसकी 16 माह से सेवा कर रहा है। महिला की जुबानी माने तो उसका भरा-पूरा परिवार होने के बावजूद वह दर—दर की ठोकरे खाने को मजबूर है। यह कहानी है मूलत: उदयपुर की रहनेवाली नर्भदा की।

यह कहानी है बेवा की

85 साल की नर्मदा उदयपुर की रहने वाली है। 40 वर्ष पहले नर्भदा के जीवन में एक तूफान आया और उसे बुरी तरह से झकझोर दिया। नर्मदा के पति का देहांत होने के बाद उसका किसी ने साथ नहीं दिया। अपना पेट काटकर संतान को सक्षम बनाया आज वही मां खाने के निवाले को तरसती हुई भीख मांगने को मजबूर हो गई। दर-दर की ठोकरे खाने के बाद फुटपाथ को ही इस बूढ़ी मां ने अपना घर बना लिया।

15 साल पहले बेटे के साथ आई थी जयपुर

नर्मदा ने बताया कि 40 साल पहले वह अपने 15 साल के बेटे के साथ जयपुर आई थी। झोटवाड़ा, खातीपुरा, सहित जयपुर के अनेक जगहों पर घर-घर मजदूरी करके जैसे-तैसे अपने बेटे को पाला और पढ़ाई लिखाया और शादी कर दी।

रेलवे स्टेशन पर छोड़ गया बेटा

महिला ने बताया कि बेटे की शादी के बाद जब घर का खर्च बढऩे लगा तो उसे 2013 में जयपुर रेलवे स्टेशन छोड़कर चले गए। वह पांच साल से भीख मांगकर पेट पाल रही है। इस दौरान एक शिक्षिका उसे फुटपाथ से अपने घर काम करवाने के लिए गैटोर जगतपुरा ले गई। वहां 2 माह तक काम किया। मजदूरी मांगी तो उसे पैसे देने की बजाय शिवदासपुरा वृद्धाआश्रम में छोड़ कर आ गई। वह माहौल अनुकूल नहीं होने पर 15 माह बाद जयपुर आ गई और भीख मांगकर गुजर बसर करती है।

इंसानियत निभाई

आमेर महल aamer mahal के सामने समाजसेवी रिम्मू खंडेलवाल इस महिला की सेवा कर रहा है। टोंक फाटक निवासी रिम्मू खंडेलवाल ने महिला को आमेर में कमरा दिलवाया और उसके भोजन की व्यवस्था की। रिम्मू ने बताया कि किसी पर्यटक ने उसे इस महिला के आमेर में भीख मांगने की सूचना दी। वह भीख मांग कर फुटपाथ पर सोती है। मैने वहां जाकर देखा तो वह फुटपाथ पर भीख मांग रही थी। उसे आमेर में एक कमरा दिलाकर उसकी सेवा कर रहा हूं।

Surendra Desk
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