Navratri: पहाड़ी गुफा की मां मनसा करती मनोकामना पूर्ण

देवी दर्शन: ग्राम रूपाहेडी कलांं स्थित मां मनसा मंदिर मनोकामना लेकर दूर दराज से आने वाले श्रद्धालुओं की आस्था के चलते यहां नवरात्रा में मेला सा माहौल रहता है

By: Gourishankar Jodha

Published: 18 Oct 2020, 09:46 PM IST

कोटखावदा। ग्राम रूपाहेडी कलां में चारों ओर हरियाली से आच्छादित पहाड़ी पर स्थित गुफा में विराजमान हैं मनसा माता। मनोकामना लेकर दूर दराज से आने वाले श्रद्धालुओं की आस्था के चलते यहां नवरात्रा में मेला सा माहौल रहता है। एक ओर हरियाली ये लदी पहाड़ी और दूसरी ओर उस पर माता का मंदिर, ऐसे में यह आस्था और आकर्षण का केन्द्र है।
बताया जाता है कि यहां सैकड़ों वर्ष पुरानी पहाड़ी पर स्थित प्राकृतिक गुफा में माताजी का स्थान है और बाहर पहाड़ी की एक तरफ भर्तृहरि बाबा का धूणा स्थित है। लोगों का मानना है कि यहां पर पहाड़ी पर सबसे पहले भर्तृहरि बाबा धूणा लगाकर रहते थे और तपस्या करते थे। जिनके जाने के बाद बाबा यहां पर पदचिन्ह छोड़ गए जो आज भी स्थित हैं। धूणा पर पूजा-अर्चना होती है। वहीं प्राकृतिक गुफा में माता मनसा जी विराजमान हैं।

Navratri: पहाड़ी गुफा की मां मनसा करती मनोकामना पूर्ण

गाजे-बाजे से करने आते हैं पूजन...
माताजी की पूजा अर्चना के लिए प्रतिदिन सैकड़ों श्रद्धालु सैकड़ों सीढिय़ां चढ़कर दर्शन करने आते हैं। मनोकामना पूरी होने पर प्रसादी व सवामणियां करते हैं। जागरण व भजन संध्या होती रहती है। बच्चों के मुंडन भी होते हैं। माताजी का सैकड़ों सालों से चैत्र शुक्ल अष्टमी को भव्य मेला भरता है। यह मेला राजा महाराजाओं के समय से ही भरता आ रहा है। क्षेत्र के सैकड़ों श्रद्धालु सामूहिक रूप से अनाज सहित अन्य सामग्री लेकर गाजे-बाजे से माता जी का पूजन करने आते हैं।

अंधा कुआं बढ़ाता है आश्चर्य...
माता की गुफा में मंदिर के पास वर्षों पुराना एक अंधा कुआं स्थित है। जिसे लेकर कई किवदंतियां भी हैं। इसके बारे में कहते हैं कि इस कुएं में अगर कोई वस्तु गिर जाए तो वह टोंक जिले की निवाई तहसील स्थित कुंड में जाकर निकलती है। कोरोना काल को छोड़ दें तो यहां वर्षभर पदयात्राओं का दौर चलता रहता है। ऐसे में आस्था के केन्द्र माताजी मंदिर पर कई श्रद्धालु वर्षों से प्रतिदिन सीढिय़ां चढ़कर गुफा में उनके दर्शन कर सुख समृद्धि व खुशहाली की कामना करने आते हैं।

बरसात के लिए करते हैं मन्नत...
कहा जाता है कि अगर क्षेत्र में बरसात नहीं हो और बरसात के लिए माताजी से सामूहिक रूप से मन्नत की जाती है, तो उसके बाद बरसात अच्छी होती है। क्षेत्र के लोग खुशहाली के लिए माताजी को ही श्रद्धा का केन्द्र मानते हैं।

दूर तक आती है घंटों की आवाज...
जब यहां शाम को माता जी के मंदिर पर पूजन के दौरान आरती होती है और उसमें बजने वाले शंख, नगाड़ा और घंटियों की आवाज कई किलोमीटर दूर तक आती है। जिससे श्रद्धालु अपने-अपने घरों से ही सुनकर माता को प्रणाम करके आशीर्वाद लेते हैं।

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