नौ साल : नो डिकॉय ऑपरेशन

Arun Sharma

Publish: Apr, 17 2018 09:06:34 PM (IST)

Kotputli, Jaipur, Rajasthan, India
नौ साल : नो डिकॉय ऑपरेशन

कैसे सुधरे लिंगानुपात, तीन बार बढ़ाई प्रोत्साहन राशि, फिर भी नहीं आया कोई आगे

कोटपूतली . कन्या भ्रूण हत्या की रोकथाम व प्रसव पूर्व भ्रूण परीक्षण पर अंकुश लगाने के लिए राज्य सरकार की ओर से शुरू की गई मुखबिर योजना में बदलाव के बाद भी क्षेत्र में इसका कोई असर नजर नहीं आ रहा है। योजना में वर्ष 2015 में बदलाव कर डिकॉय में शामिल गर्भवती महिला को एक लाख रुपए व सहयोगी महिला को 50 हजार रुपए देने का प्रावधान किया गया था, लेकिन इसके बाद भी क्षेत्र में पीसीपीएनडी एक्ट के तहत डिकॉय की एक भी कार्रवाई नहीं हुई। दिलचस्प बात यह है कि गत छह साल में एक भी मुखबिर ने प्रसव पूर्व भू्रण परीक्षण की सूचना परिवार कल्याण विभाग को नहीं दी।
इनाम राशि बढ़ाई
मुखबिर योजना 2009 में शुरू की गई थी। उस समय भू्रण परीक्षण की सूचना देने पर मुखबिर को इनाम की राशि 50 हजार रुपए तय की गई थी। इसके बाद 2012 में राशि को बढ़ाकर दो लाख रुपए कर दिया गया, लेकिन स्वास्थ्य विभाग को कन्या भ्रूण हत्या की एक भी सूचना नहीं मिली। परिवार कल्याण विभाग ने 2015 में प्रोत्साहन राशि 2.50 लाख रुपए कर दी। इसके तहत मुखबिर एवं डिकॉय गर्भवती महिला को एक-एक लाख व सहयोगी महिला को 50 रुपए देने का प्रावधान किया गया। सूचना देने के बाद डिकॉय ऑपरेशन सफल होने पर ही सम्बन्धित को इनाम की राशि देने का प्रावधान है।
यह है योजना
चिकित्सा विभाग ने घटते लिंगानुपात पर नियंत्रण के लिए प्रसव से पूर्व भ्रूण भू्रण परीक्षण कर बेटियों को जन्म देने से रोकने व भ्रूण की तकनीकी जांच पर अंकुश के लिए पीसीपीएनडी एक्ट के तहत मुखबिर योजना शुरू की गई थी। इसमें सरकारी व निजी चिकित्सालयों व सोनोग्राफी सेन्टरों पर प्रसव पूर्व भ्रूण परीक्षण की सूचना देने वालों को इनाम देना तय किया था, लेकिन योजना परवान नहीं चढ़ सकी।

किस्तों में भुगतान
मुखबिर की सूचना को बोगस ग्राहक बनकर भ्रूण परीक्षण की कार्रवाई को अधिकारी द्वारा सत्यापित किया जाएगा। सूचना में परीक्षण करने वाले चिकित्सक व महिला का नाम सही पाए जाने पर अलग-अलग किस्तों में भुगतान किया जाता है। प्रोत्साहन राशि भुगतान प्रक्रिया जटिल होने से मुखबिर इसमें रुचि नहीं लेते है और उनके आवेदन नहीं आते हंै।

हरियाणा टीम ने की थी कार्रवाई
यहां पीसीपीएनडी एक्ट के तहत सख्ती होने के बाद भ्रूण परीक्षण पर काफी हद तक अंकुश लगा है। पिछले दिनों हरियाणा की टीम ने बनेटी में एक नीम हकीम को फर्जी सोनोग्राफी करते पकड़ा था। हरियाणा के दलाल एक महिला को सोनोग्राफी के लिए यहां लेकर आए थे।
प्रसव के आंकड़े
वर्ष कुल ***प्रसव ***मेल*** फिमेल
2014-15 ***10105*** 5379*** 4726
2015-16 ***9048 ***4959*** 4089
2016-17 ***10862*** 5646 ***5216

इनका कहना है...
पिछले छह साल भ्रूण परीक्षण की मुखबिर से कोई सूचना नहीं मिली है। भ्रूण परीक्षण की सूचना पर इनाम का प्रावधान है, लेकिन अब क्षेत्र में पूरी तरह अंकुश लग चुका है।
विजय तिवारी,
ब्लॉक कार्यक्रम अधिकारी, कोटपूतली

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