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बाघ दर्शनः स्थानीय युवाओं को ना आय, ना रोजगार, होटल पर बाहरी राज

— रणथम्भौर पार्क के निकट गांवों का अध्ययन
— बाहरी लोग ही उठा रहे फायदा, होटल कारोबार में स्थानीय लोगों को मिल रहे केवल हल्के काम

बस्सी

Published: December 24, 2021 09:28:45 am

अभिषेक सिंघल
जयपुर. दुनियाभर के पर्यटकों को लुभा रहा रणथम्भौर का बाघ दर्शन स्थानीय लोगों को आय और रोजगार के ज्यादा साधन मुहैया नहीं करवा पा रहा है। हाल ही में हुए एक शोध में लोगों की राय के अनुसार पार्क के आस पास स्थानीय लोग पर्यटन से उत्पन्न आय के अवसरों से वंचित हैं। इससे पहले के शोध में पर्यटन को स्थानीय अर्थव्यवस्था में बढ़ावा देने वाला बताया गया था। नए शोध से जंगल के निकट के लोगों की आजीविका सुधारने के लिए व्यापक प्रयास की जरूरत सामने आती है। प्रदेश की बाघ परियोजनाओँ के आस पास बड़ी संख्या में ग्रामीण रह रहे हैं जिनकी इन जंगलों पर निर्भरता है।
रणथम्भौर: नहीं थम रहा बाघ- बाघिनों के जंगल से बाहर आने का सिलािसला
रणथम्भौर: नहीं थम रहा बाघ- बाघिनों के जंगल से बाहर आने का सिलािसला
अरूणा राव व शालिनी सक्सेना का शोध पत्र वाइल्डलाइफ टूरिज्म एंड लोकल कम्युनिटी, एविडेंस फ्रॉम इंडिया में रणथम्भौर बाघ परियोजना के पास बसे शेरपुर व मेई कलां गांव के 224 परिवारों का सर्वे किया गया है। शेरपुर के 95 में से 42 परिवार पर्यटन से आय अर्जित कर रहे हैं। 53 परिवार अन्य गतिविधियों पर निर्भर हैं। शेरपुर पर्यटन गतिविधियों के केन्द्र में है तो मेई कलां पार्क के दूसरी तरफ स्थित है। शोध में सामने आया है कि पर्यटन क्षेत्र में अधिकांश अच्छे काम बाहरी लोगों के पास जा रहे हैं जबकि स्थानीय लोगों को केवल सीजनल और कम तनख्वाह वाले काम ही मिलते हैं। फोरेस्ट गाइड के लिए स्थानीय लोगों को कोई तरजीह नहीं मिलती है। होटल, जंगल सफारी, हैंडीक्राफ्ट जैसे व्यवसाय चंद हाथों में सिमटे हुए हैं।

सर्वे के अनुसार- लोगों की राय
52 % - अच्छी सड़कें, स्वास्थ्य व अन्य सुविधाएं नहीं
42 %- जमीन की कीमतों का अच्छा असर नहीं
73 % - क्षेत्र में आय असंतुलन बढ़ा
55 %- क्षेत्र में अपराध बढ़ा
53 % - स्थानीय युवाओं पर विपरीत प्रभाव
इनका कहना है...
वाइल्डलाइफ टूरिज्म का स्थानीय लोगों की आय बढ़ाने में ज्यादा योगदान नहीं है। स्थानीय लोगों को निर्णय प्रक्रिया में शामिल कर नीतियों में उनकी भागीदारी बढ़ाए जाने की जरूरत है।
— अरूणा राव, एसोसिएट प्रोफेसर, दिल्ली विश्वविद्यालय
रणथम्भौर टाइगर कंजर्वेशन फाउंडेशन का पैसा स्थानीय विकास पर खर्च होना चाहिए। पर्यटन क्षेत्र के कौशल विकास संबंधि संस्थान खोले जाने चाहिए।
- धर्मेंद्र खांडल, कंजर्वेशन बायोलॉजिस्ट, रणथंभौर
प्रशासन स्थानीय लोगों को रोजगार में प्राथमिकता देने के नियम बनाए ताकि रणथम्भौर के विकास के साथ-साथ लोगों को रोजगार मिल सके।
- रूप सिंह, अध्यक्ष, बाघ संरक्षण एवं ग्रामीण विकास समिति
.........
होटल इंडस्ट्री के बढ़ने से अवसर भी बढ़ रहे हैं, लेकिन स्थानीय लोगों में टेक्नीकल ज्ञान का अभाव है। यहां इंस्टिट्यूट ऑफ होटल मैनेजमेंट भवन चालू हो तो युवाओँ की भागीदारी बढ़ सकेगी।
— अभय माहेश्वरी, उपाध्यक्ष, होटल एसोसिएशन, रणथम्भौर, सवाईमाधोपुर
रणथम्भौर बाघ परियोजना
कुल 62 गांव
5 गांव विस्थापित
23 गांवों का जल्द विस्थापन

सरिस्का टाइगर रिजर्व
29 गांवों का होना है विस्थापन
3 गांवों को किया विस्थापित
6 गांवों का जल्द विस्थापन

मुकुंदरा हिल्स टाइगर रिजर्व
14 गांवों का किया जाना है विस्थापन
1 गांव का पूर्ण विस्थापन
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अभिषेक सिंघल

News Editor in Rajasthan Patrika, Editorial In charge Jaipur Rural edition. PGDJ (Hindi) From IIMC, New Delhi.

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