दर्जा फर्स्ट, सुविधाएं फुस्स

-भवन तो दूर पशुधन के लिए छाया-पानी की भी दरकार

By: Kailash Chand Barala

Updated: 06 Oct 2019, 06:40 PM IST

शाहपुरा.
प्रदेश के पशुपालकों को राहत देने के उद्देश्य से राज्य सरकार जहां नि:शुल्क दवा वितरण जैसी योजनाएं संचालित कर रही है, वहीं दूसरी तरफ पशु चिकित्सालयों के पास खुद का भवन भी नहीं है। स्वयं की जमीन नहीं होने के कारण वर्षों से अस्पताल किराए व उधार के भवन में संचालित किए जा रहे है। खुद का भवन नहीं होने से चिकित्साकर्मियों को अस्पताल संचालन के लिए बार-बार जगह बदलनी पड़ रही है। शाहपुरा उपखंड में ९ नोडल केन्द्र, १७ पशु चिकित्सालय और २६ उप केन्द्र है। जिनमें अधिकतर में भवन, छाया, पानी और शौचालय का भी अभाव है। छाया-पानी के अभाव में उपचार के लिए आने वाले हजारों पशुओं को परेशान होना पड़ता है।
शाहपुरा व राड़ावास नोडल केन्द्र व इनके अधीन आने वाले अधिकतर उपकेन्द्र भी उधार के भवनों में एक-एक कमरें में संचालित हो रहे है। शाहपुरा का अ श्रेणी का पशुचिकित्सालय एवं नोडल केन्द्र स्कूल भवन में चल रहा है। इधर, हाल ही में राड़ावास में घोषित हुआ नोडल केन्द्र भी उधार के भवन में संचालित है। सरकार ने दोनों अस्पतालों को अ श्रेणी का दर्जा तो दे रखा है, लेकिन भूखण्ड सहित भौतिक सुविधाएं उपलब्ध नहीं करवाई है। राड़ावास के राजकीय पशु चिकित्सालय को क्रमोन्नत कर इसी वर्ष नोडल केन्द्र घोषित किया है। नोडल केन्द्र के अधीन क्षेत्र के 15 ग्राम पंचायतों के अधीन आने वाले पशु चिकित्सालय व पशु चिकित्सा उप केंद्र शामिल है। पशुओं के उपचार के लिए जगह की बात तो दूर, चिकित्सकों के खुद के बैठने के लिए भी जगह नसीब नहीं है।(का./नि.सं.)
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जमीन मिले तो बने भवन
जयपुर जिला कलेक्टर की ओर से क्षेत्र के उपखंड अधिकारियों को सभी सरकारी संस्थाओं के लिए भूमि आवंटित करने के निर्देश दिए जा चुके है। उसके उपरांत भी अधिकांश ग्राम पंचायतों के जनप्रतिनिधियों ने रुचि नहीं दिखाई है। ऐसे में पशुचिकित्सालयों के पास भवन बनाने के लिए खुद के पट्टे नहीं है।
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वर्ष १९९० से संचालित है राड़ावास में
राड़ावास में वर्ष 1990 से पशु चिकित्सा उप केंद्र संचालित हुआ था। जिसे वर्ष 2000 में पशु चिकित्सालय में क्रमोन्नत किया गया। इसके बाद वर्ष 2013 में प्रथम श्रेणी और मई 2019 में इसे नोडल केन्द्र घोषित किया गया। करीब 30 वर्ष गुजर जाने के बाद भी चिकित्सालय को खुद का भवन नसीब नहीं हुआ। वर्तमान में पशु चिकित्सालय भामाशाह द्वारा निर्मित भवन में संचालित है। जो पूरी तरह से जर्जर है। बारिश में पानी टपकता है। यहां नोडल केन्द्र में मीटिंग हॉल, स्टॉफ रूम, स्टोर रूम, शौचालय, चारदीवारी का भी अभाव है। पशुओं के लिए छाया, पानी की व्यवस्था भी नहीं है।
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इनके पास नहीं है पट्टे
अमरसरवाटी क्षेत्र के अधीन आने वाले पशु चिकित्सालय राडावास, बिशनगढ़, बिलंादरपुर, करीरी, पशु चिकित्सालय के पास जमीन के पट्टे नहीं है। वहीं नायन, अमरसर में भवनों का निर्माण कार्य निर्माणाधीन है। यहीं स्थिति पशु चिकित्सा उप केन्द्रों की है। शाहपुरा और राड़ावास नोडल केन्द्र के अधीन २६ में से अधिकतर उपकेन्द्र किराए व उधार के भवन में चल रहे है। पंचायत से पट्टे नहीं मिलने से भवन नहीं बनाए जा रहे है। शाहपुरा और राड़ावास नोडल के अधीन १७ राजकीय अस्पताल में है। जिनमें से करीब ८ के पास खुद के भवन नहीं।
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भ्रमणशील इकाई में नहीं चिकित्सक
यहां पशु चिकित्सालय के अधीन करीब चार साल पहले से भ्रमणशील चिकित्सा इकाई भी संचािलत की गई थी। जिमसें एक चिकित्सक, एक कम्पउण्डर, एक चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी लगाए थे। फरवरी माह २०१९ को बजट के अभाव में भ्रमणशील इकाई से गाड़ी को हटा दिया गया था। हालांकि अब वापस चालू कर दिया है, लेकिन इसमें चिकित्सक का पद भी कई दिनों से खाली पड़ा है।
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फैक्ट फाईल
शाहपुरा में नोड़ल केन्द्र ----२
पशु चिकित्सालय-----१७
सब सेंटर ------२६
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इनका कहना है----
सरकार ने मई माह में नोडल केन्द्र घोषित किया था। अभी खुद का भवन नहीं है। सुविधाओं के लिए विभाग को लिखा गया है। नोडल केंद्र पर हर माह मीटिंग का आयोजन होता है। नोडल केन्द्र में मीटिंग हॉल, स्टॉफ रूम, स्टोर रूम, शौचालय, चारदीवारी का भी अभाव है। पशुओं के लिए छाया, पानी की व्यवस्था भी नहीं।
-----डीडी गौतम, प्रभारी, नोडल केन्द्र राड़ावास।

Kailash Chand Barala Reporting
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