जंगल से आबादी में भटक रहे वन्यजीव, मानव जीवन को खतरा

wildlife wandering in search of water : जलस्रोत सूखने से वन्यजीव को पानी नहीं मिल रहा और वन्य जीव आबादी में आ रहे हैं।

By: vinod sharma

Published: 03 Dec 2019, 05:21 PM IST

शाहपुरा/अजीतगढ़. पहाड़ी इलाकों के आसपास बसे लोग वन्य जीवों को लेकर दहशत में जीवन यापन करने को मजबूर है। वन क्षेत्र में बघेरा, भेडिया, जरख, नीलगाय, सियार आदि वन्य जीव अधिक है। अधिकतर जलस्रोत सूखने से वन्यजीव को पानी नहीं मिल रहा और वन्य जीव आबादी में आ रहे हैं, इससे लोगों के जीवन के साथ वन्यजीवों के मारे जाने का भी खतरा रहता है।

जंगलों की कटाई और पहाड़ों का सफाया....
जंगलों की कटाई और पहाड़ों के सफाया होने से वन्य जीवों का जीवन खतरे में है। बारिश कम होने से वनक्षेत्र के अधिकतर जलाशय भी रीते हैं। ऐसे में भोजन और पानी की तलाश में वन्य जीव अब रिहायशी इलाकों की ओर मूवमेंट कर रहे हैं, लेकिन वन विभाग कोई उचित कदम नहीं उठा रहा है। जयपुर ग्रामीण के शाहपुरा, बीलवाड़ी, विराटनगर और अजीतगढ़ वन रेंज क्षेत्र के जंगलात में वन्य जीवों के लिए बनाए कुण्ड, खेळी, टांके, एनीकट, तलाई और अन्य जलस्रोत रीते है। ऐसे में वन्यजीवों के पानी की तलाश में आए दिन आबादी क्षेत्र में आने की शिकायतें सामने आ रही है।

छह माह में आधा दर्जन शिकायतें...
वन विभाग के आंकड़े देखे तो बीते छह माह में ही आधा दर्जन गांवों में वन्यजीवों के आने की शिकायतें आ चुकी है। इस माह में शाहपुरा में ग्राम कांट, देवन, राड़ावास, बिशनगढ़, व बिलवाड़ी, मैड़ क्षेत्र में वन्यजीवों के आने की शिकायतें मिली है। जबकि बीते तीन दिन पहले अजीतगढ़ कस्बे की सड़कों पर एक पैंथर ने खूब आतंक मचाया। वहीं मैड़ क्षेत्र में तो पिछले सालों एक महिला का पैंथर ने शिकार ही कर लिया था। बीती दो दिन पहले एक गीदड़ रामपुरा में सूखे कुए में गिर गया था। शनिवार को मनोहरपुर में सरसों के खेत में पैंथर आने से लोग 4 घंटे भयभीत रहे।

पैंथर का सड़क पर आतंक...
अजीतगढ़ कस्बे में 3 नवम्बर को पैंथर ने सड़कों पर आतंक मचाते हुए एक व्यक्ति को पंजा मारकर जख्मी भी कर दिया था। करीब 6 घंटे तक लोग दहशत में रहे थे। बाद में जयपुर से पहुंची वन विभाग की टीम ने पैंथर को बेहोश कर पकड़ा।

घास खोद रही महिला का शिकार...
करीब तीन साल पहले जोधूला में पैंथर ने पहाड़ी की तलहटी में घास खोद रही महिला का शिकार कर लिया था। उस दौरान पैंथर ने जोधूला समेत कई गांवों में मवेशियों का शिकार भी किया था। कुकडेला में पैंथर ने मकान में घुसकर सात बकरियों का शिकार भी किया था।

सरसों के खेत में आया पैंथर, 4 घंटे बाद ट्रेंकुलाइजर...
मनोहरपुर के घासीपुरा स्थित सांपलों की ढाणी के एक सरसों के खेत में दो दिन पहले पैंथर घुस गया था। 4 घंटे बाद ट्रेंकुलाइजर कर पैंथर को को पकड़ा।

यहां बने जलस्रोत....
शाहपुरा रेंज क्षेत्र के पीललोद, काली पहाड़ी, देवन, पापड़ा, तालवृक्ष, बिशनगढ़, अरड़की बांध, साईवाड़, पीपलोद सहित कई दर्जनों स्थानों पर जलस्रोत बने हुए है। इनमें अधिकतर तो बारिश के दौरान भरते है, लेकिन दो-तीन माह बाद ही रीते हो जाते हैं। वर्तमान में खेळी को छोड़कर सभी स्रोत रीते हैं। हालांकि आधा दर्जन जगह खेळियों में वन विभाग टैंकरों से पानी डलवाता है, लेकिन ये जंगल से बाहर भी और अपर्याप्त है।

पानी का बजट कम...
वन विभाग के शाहपुरा वन रेंज में 8 हजार 772 हैक्टेयर वन क्षेत्र आता है। जिनमें 20.75 हैक्टयेर में अतिक्रमण भी है। इसमें कई दर्जन स्थानों पर प्राकृतिक व कृत्रिम जलस्रोत बने हुए हैं। इनमें से करीब आधा दर्जन स्थानों पर निर्माण की गई खेळियों में तो वन विभाग टैंकरों से ही पानी डलवाता है। इसके लिए विभाग से सालभर के लिए महज 30 हजार का बजट मिलता है, जो नाकाफी है। यहीं हाल विराटनगर, बीलवाड़ी और अजीतगढ़ क्षेत्र का है।

अजीतगढ़ का वन क्षेत्र
श्रीमाधोपुर वन विभाग के रेंज कार्यालय के अधीन श्रीमाधोपुर व खंडेला क्षेत्र में कुल वन क्षेत्र 8686.25 हैक्टेयर है। जिसमें दस वाटरहॉल है। अजीतगढ़ वन नाका क्षेत्र में 750 हैक्टयर वन क्षेत्र है। जिसमे मानगढ, हथौरा, सीपुर क्षेत्र आता है। वन विभाग ने यहॉ नागाजी, इन्द्रा कॉलोनी, जगदीशपुरी, सीपुर में वाटर हॉल बनाए हुए हैं। झाडली वनपाल क्षेत्र में रूपपुरा, उदलवास, नारै सहित 1050 हैक्टरयर वन क्षेत्र है। जिसमें तीन वाटरहॉल बन हुए हंै। क्षेत्र के वन विभाग के द्वारा वन्य जीवों के लिए बनाए अधिकत्तर वाटरहॉल सूखे पड़े है। अजीतगढ़ क्षेत्र में अरावली की पहाडिय़ों से निकल कर भोजन पानी की तलाश में कई बार पैंथर के आने और मवेशियों का शिकार करने के मामले सामने आए हैं।

इनका कहना है
वनक्षेत्र में टैंकरों से पानी डलवाया जाता है। हालांकि बारिश की कमी के चलते कई जगह जलस्रोत रीते पड़े हैं। पानी की तलाश में वन्यजीव बाहरी क्षेत्र में चले जाते हैं।
बाबूलाल मीणा, फोरेस्टर, शाहपुरा

वन क्षेत्रों में वन्य जीवों के लिए पेयजल के लिए पर्याप्त बजट नहीं मिलता है। अप्रेल, मई, जून माह में मामूली बजट आता है। जिससे पूर्ति नहीं हो पाती है। अन्य समय में भामाशाहों व जन सहयोग से पेयजल की व्यवस्था करनी पड़ती है।
देवेन्द्र सिंह राठौड़, रेंजर, श्रीमाधोपुर

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