बेटी के इलाज के लिए दर-दर भटक रहा पिता, 6 लाख कर चुका खर्च, पर हालत जस के तस

ajay shrivastav

Publish: Nov, 14 2017 03:54:14 (IST)

Keskal, Chhattisgarh, India
बेटी के इलाज के लिए दर-दर भटक रहा पिता, 6 लाख कर चुका खर्च, पर हालत जस के तस

किसान पिता कर्ज में डूबा, घर के गहने बिके, एक माह पहले आश्रम में बीमार हुई, लड़ रही मौत से, परिजन ने आश्रम अधीक्षिका पर लापरवाही का लगाया आरोप

केशकाल/धनोरा . बेटी के इलाज में किसान पिता कर्ज में डूब गया। जिंदगी भर की जमा पूंजी खर्च हो गई और घर के गहने तक बिक गए। रिश्तेदारों से भी लाखों रुपए उधार ले चुका है। यह कहानी कोरकोटी के किसान तामेश्वर रजक की है। तामेश्वर की बेटी मंजू धनोरा आश्रम में पढ़ रही थी।

अधीक्षिका की लापरवाही की वजह से बेटी की हालात बिगड़ी
सितंबर माह में मलेरिया से पीडि़त होने के बाद कोमा में चली गई। अब तक हालत में सुधार नहीं हुआ है। तामेश्वर का कहना है, आश्रम अधीक्षिका की लापरवाही की वजह से बेटी की हालात बिगड़ी और अब वह मौत से लड़ रही है। पाइप के सहारे दूध और पानी पिलाकर बेटी को माता-पिता जिंदा रखे हुए है

धनोरा आदिवासी आश्रम में नवमीं कक्षा में पढ़ाई कर रही थी। बीते सितंबर माह में वह बीमार पड़ी। 19 सितंबर को आश्रम प्रबंधन उसे इलाज के लिए शासकीय अस्पताल ले गया, जहां डॉ हिमांशु ने जांच की तो मलेरिया की पुष्टि हुई। दवाई दी गई। इसके बाद उसकी हालत और भी बिगड़ गई पर प्रबंधन ने ध्यान नहीं दिया। 21 सितंबर को बच्ची के बीमार होने की सूचना मंजू के माता-पिता को दी गई। वे आश्रम पहुंचे पर आश्रम अधीक्षिका के केशकाल जाने की वजह से दिन भर मिल नहीं सके।

बच्ची की हालात बेहद गंभीर बताते उसे बाहर ले जाने कहा
शाम चार बजे माता पिता जब मंजू से मुलाकात की तो उसकी तबियत बेहद खराब थी। वह चलने-फिरने की हालत में नहीं थी। चार लोगों ने उठाकर उसे गाड़ी में बिठाया। 22 सितंबर को शासकीय अस्पताल ले गए जहां डॉक्टर हिमांशु ने बच्ची की हालात बेहद गंभीर बताते उसे बाहर ले जाने कहा। परिजन बच्ची को कोण्डागांव में ले जाने पर उसे जगदलपुर रेफर किया गया। इस दौरान वह कोमा में चली गई। जगदलपुर में भी हालत नहीं सुधरी तो परिजन उसे विशाखापटनम ले गए।

6 लाख रुपए खर्च पर नहीं सुधरे हालत
इलाज का खर्च वहन करने में अक्षम तामेश्वर की मदद विधायक संतराम नेताम ने करते उनके पत्र पर मंजू को रायपुर के अंबेडकर अस्पताल में भर्ती कराया गया। लंबे इलाज व लाखों रुपए खर्च के बाद भी जब स्वास्थ्य नहीं सुधरा तो माता-पिता बेटी को वापस कोरकोटी ले आए। अब तक इलाज में छह लाख रुपए खर्च हो चुके हैं। यह रकम तामेश्वर ने घर के गहने बेचकर व रिश्तेदारों से कर्ज लेकर इक_ा किया है। करीब चार लाख रुपए का कर्ज उन्होंने बेटी के इलाज के लिए लिया है।

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