बाबा भदेश्वर नाथ मंदिर में स्थापित शिवलिंग को दोनों हाथों से छूते ही बढ़ जाता है आकार, सावन में लगती कांवरियों की भारी भीड़

बाबा भदेश्वर नाथ मंदिर में स्थापित शिवलिंग को दोनों हाथों से छूते ही बढ़ जाता है आकार, सावन में लगती कांवरियों की भारी भीड़
Bhadeshwar Nath Temple

Sarweshwari Mishra | Updated: 26 Jul 2019, 12:45:07 PM (IST) Basti, Basti, Uttar Pradesh, India

पिछले कई सालों से शिवलिंग की बनावट में काफी बदलाव देखने को मिल रहा है

बस्ती. यूपी के बस्ती में स्थित बाबा भदेश्वर नाथ मंदिर में एक ऐसा शिवलिंग स्थापित है जिसे आज तक कोई भी भक्त अपने दोनों बांहों में नहीं ले सका है। भक्त जब शिवलिंग को अपनी बांहों में लेना चाहते हैं तो शिवलिंग का आकार अपने आप बड़ा हो जाता है। पिछले कई सालों से शिवलिंग की बनावट में काफी बदलाव देखने को मिल रहा है। लोगों के अनुसार शिवलिंग का आकार पहले बहुत छोटा था, लेकिन अब वह काफी बड़ा हो गया है। सावन में बाबा भदेश्वरनाथ मंदिर में लगातार कांवरियों का रेला उमड़ रहा है। बम-बम भोले के नारों से चारों दिशाएं गूंज उठी हैं जनपद के विख्या बाबा भदेश्वनाथ मंदिर में श्रावण मास को लेकर आने वाले 30 तारीख को 5 लाख शिव भक्तों का रेला जल चढ़ाने पहुंचेगा। भक्त जल चढ़ाएंगे और पूजन अर्चन कर बाबा से आशीर्वाद भी लेंगे।

 

पूरे मण्डल की पहचान है बाबा भदेश्वरनाथ मंदिर
अपने आप में कई पौराणिक कथाओं को समेटे बाबा भदेश्वरनाथ मंदिर पूरे मण्डल की पहचान है। श्रावण मास में अयोध्या से जल लेकर लाखों श्रद्धालु यहां जलाभिषेक करते हैं। इसके अतिरिक्त महाशिवरात्रि में भी यहां श्रद्धालुओं का तांता लगा रहता है। प्रत्येक सोमवार को भी श्रद्धालु इस मंदिर में सैकड़ों की संख्या में पूजा करने आते हैं। लोगों की मान्यता है कि यहां पर जलाभिषेक और पूजन अर्चन से मनोकामना पूर्ण होती है। लोक मान्यताओं के अनुसार रावण हर रोज कैलाश जाकर भगवान शिव की पूजा करता था और वहां से एक शिवलिंग लेकर आता था।

 

 

दैवीय आपदाओं से भाग खड़े हुई थी ब्रिटीश सेना
मंदिर के पुजारी ने बताया कि उसी दौरान ये शिवलिंग भी रावण कैलाश से लेकर आया था। वहीं लोगों के अनुसार अज्ञातवास के दौरान राजा युधीष्ठिर ने यहां शिवलिंग की स्थापना कर पूजा की थी। लोक कथाओं के अनुसार घने वन के बीच यह स्थल स्थित था। बताया जाता है ब्रिटिशकाल इस क्षेत्रफल पर कब्जा करने आई बिट्रिश सेना को दैवीय आपदाओं के कारण भागना पड़ा था। लोककथाओं में एक बार चोरी का भी जिक्र आता है। बताया जाता है कि कुछ चोरों ने शिवलिंग की खुदाई भी की, लेकिन काफी खुदाई के बाद भी जब शिवलिंग का अंत नहीं मिला तब वहीं जब वो भागने लगे तो उनके गाड़ी का पहिया वहीं धंस गई और पत्थर बन गया। पुजारी बताते हैं कि इस शिवलिंग को कोई अपने बाजुओं में नहीं समा सकता है।

BY-Satish Srivastava

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