#GST के विरोध में उद्योग व्यापार संगठन, आंदोलन का किया ऐलान

#GST के विरोध में उद्योग व्यापार संगठन, आंदोलन का किया ऐलान
Businessman

कहा-  काला कानून व्यापारी किसी कीमत पर बर्दाश्त नहीं करेंगे

बस्ती. एक जुलाई से देश भर में जीएसटी लागू होने जा रहा है। वहीं जीएसटी के विरोध देशभर में विरोध के स्वर भी उठने लगे हैं। बस्ती का उद्योग व्यापार संगठन जीएसटी के विरोध में उतर आया है। व्यापारियों का कहना है कि यह काला कानून व्यापारी किसी कीमत पर बर्दाश्त नही किया जायेगा और इसका हर स्तर पर मुखर विरोध किया जाएगा।


प्रतिनिधि मण्डल जिलाध्यक्ष आनन्द राजपाल ने कहा कि व्यापारी हितों को लेकर 30 जून शुक्रवार को आयोजित भारत बन्द में बस्ती उद्योग व्यापार प्रतिनिधि मण्डल हिस्सा लेगा। इससे पूर्व 28 जून को शहर भ्रमण और 29 जून को मशाल जुलूस निकाल कर व्यापारियों को जागरूक किया जाएगा। 30 जून को दुकानों को बन्द रखकर जीएसटी के लिए प्रस्तावित दरों और लागू किए जाने वाले नियमों का विरोध किया जाएगा। यह विरोध तब तक जारी रहेगा जब तक सरकार इसे पारदर्शी और सरल नही बनाती।

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आनन्द राजपाल ने कहा कि जीएसटी की जो दरें और नियम घोषित किए गए हैं वह कदापि स्वागत योग्य नही है। व्यापारी कोई अपराधी और हत्यारा नही है कि उसे जेल में डाल दिया जाय। यदि भूलवश किसी व्यापारी से गलती हुई तो उसे आर्थिक दण्ड देना ही उचित होगा, न की उसे अपराधियों की तरह जेल भेजना। दोहरे दण्ड का प्राविधान व्यापारी के साथ पूरी तरह अन्याय है।  


नगर अध्यक्ष नन्द किशोर साहू ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने जीएसटी पर की गई प्रथम घोषणा में कहा था कि एक देश एक कर की व्यवस्थायुक्त जीएसटी आयेगा और उसमें कर की व्यवस्था सरल और पारदर्शी होगी। पूरे देश में एक समान कर होगा। बिना पर्चे का व्यापार, भ्रष्टाचार और कालेधन का इसमें कोई स्थान नही होगा। उन्होंने कहा कि इस घोषणा से व्यापारियों के चेहरे खिल गए थे और उन्होंने भी इसका दिल खोल कर स्वागत किया था। लेकिन आज जो जीएसटी की दरें और नियम घोषित किए गए है वह किसी भी तरह हित में नही है। व्यापारी पहले से ही लालफीताशाही, भ्रष्टाचार से परेशान है, वह पहले भी इंस्पेक्टर राज का गुलाम था और आज भी है।



नगर अध्यक्ष नन्द किशोर साहू ने कहा कि जहां केन्द्रीय राज्यमंत्री को मोबाइल नेटवर्क न मिलने के कारण पेड़ पर सीढ़ी लगा कर उस पर चढ़ कर बात करनी पड़े वहां ऑनलाइन व्यापार की बाध्यता की बात करना हास्यास्पद है। पहले सरकार को बिजली, संचार व्यवस्था को सुदृढ़ करना चाहिए तब आनलाइन व्यवस्था को लागू करना चाहिए। उन्होंने कहा कि कपड़ा, ब्राण्डेड अनाज, तिलहन, कृषि यंत्र, आवश्यक जीवनोपयोगी वस्तुओं पर जीएसटी लागू किए जाने को किसानों, व्यापारियों, आम आदमी के साथ छल किया जाना बताया। दुकान बन्द कर व्यापारी जीएसटी के वर्तमान स्वरूप का विरोध करेंगे और जरूरत पड़ी तो सड़क से संसद के समक्ष तक विरोध प्रदर्शन कर सरकार तक अपनी आवाज को और मुखर किया जाएगा।



जिला महामंत्री सूर्य कुमार शुक्ला ने कहा कि जीएसटी को सरल, पारदर्शी, व्यावहारिक बनाया जाना ही हितकर होगा। महीने में तीन रिटर्न दाखिल करने, आनलाइन रिटर्न की बाध्यता से व्यापारियों के समक्ष कठिनाई आयेगी। सरकार को इस पर पुर्नविचार कर एक सूत्रीय सरल जीएसटी कर की व्यवस्था लागू करनी चाहिए।वर्तमान जीएसटी दर से न किसानों का भला होगा न ही आम जनता का। यूरिया, कीटनाशक, कृषि यंत्र महंगा होने से किसानों के ऊपर इसका बोझ पड़ेगा। वहीं कपड़े पर टैक्स लगने से इसका असर आम आदमी पर भी पड़ेगा क्योंकि गरीब हो या अमीर कपड़ा  सभी पहनते है। लेकिन सरकार ने इस पर भी टैक्स लगा कर गरीबों के साथ अन्याय किया है।
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