अगर यूपी सरकार ऐसे ही लापरवाही करती रही तो, बर्बाद हो जायेंगे सैकड़ों गांव के लोग 

 अगर यूपी सरकार ऐसे ही लापरवाही करती रही तो, बर्बाद हो जायेंगे सैकड़ों गांव के लोग 
flood preparation in up

लोगों की धड़कनें तेज, सरकार को नहीं है चिंता

बस्ती. यूपी में 100 दिन की सरकार के कामकाज का मंगलवार को सीएम योगी डिप्टी सीएम दिनेश शर्मा और केशव प्रसाद मौर्या ने रिपोर्ट कार्ड जारी किया। पर यूपी के पूर्वां हिस्से में मानसून कि दस्तक से पहले किसी भी तरह की बाढ़ से निपटने की तैयारी न होना यह भी बतचा रहा कि आने वाले समय में इस मसले पर सरकार की उदासीनता का शिकार सैकड़ों गांव के लोगों को होना पड़ सकता है। 


अधूरी तैयारी ने बढ़ा ग्रामीणों की चिंता

जी हां पूर्वांचल में अब मानसून कभी भी दस्तक दे सकता है और बारिश के दिन करीब होते जा रहे हैं। जैसे-जैसे बारिश केस दिन पास आ रहे हैं वैसे- बैसे बस्ती जिले में सैक़ड़ों ग्रामीणों की धड़कनें तेज हो रही हैं। लोगों कि चिंता ये हैं कि अगर थोड़ी सी भी बारिश ज्यादा हो गई तो यहां सैकड़ों गांव बाढ़ की चपेट में आ जायेंगें और नदी में समां जायेंगे। पर शायद सरकार इस दिन का इंतजार कर रही है। जी हां ये बात इसलिए कि ग्रामीणों की सुरक्षा के लिए प्रशासन ने अब तक कोई भी तैयारी नहीं की। न तो बंधे को ही मजबूत बनाया गया है कि बाढ़ को रोका जा सके। लोगों ने प्रशासन से कई बार गुहार लगाई पर प्रशासन भी आखिर करे तो क्या करे। इस सबंध में सहायक अभियंता बलराम यादव कहते हैं कि हमने सरकार से बाढ की सुरक्षा के इंतजामात के लिए 80 करोड़ रूपये की मांग की थी पर सरकार की तरफ मात्र तीस करोड़ रूपये भेजे गये। आखिर हम कहां से बाढ़ प्रबंधन के काम को पूरा करें। 



मुख्मंत्री को भी भेजा पत्र 
 घाघरा नदी के किनारे बसे सैकड़ों गांवों के लोगों को बाढ़ से बचाने के लिए प्रशासन ने कोई पुख्ता इंतजाम नहीं किया है। ऐसे में घाघरा नदी के किनारे बसे  ग्रामीणों में दहशत ब्याप्त है। ग्रामीण इस मामले को लेकर जिला प्रशासन से मुख्यमंत्री तक शिकायती पत्र भेज चुके हैं और मिले भी हैं। लेकिन इनकी शिकायत पर कोई सुनने वाला नहीं है। 


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महज तीस करोड़ में कैसे होगी सुरक्षा 

अधिकारी बजट न मिलने का रोना रोकर अपना पल्ला झाड़ते नजर आ रहे हैं।  गौरतलब यह है कि आखिर ग्रामीणों की फरियाद सरकार तक कब पहुंचेगी और इस परेशानी का कोई स्थायी हल आखिर कब तक निकल पायेगा। कल्याणपुर गांव से महज 10 मीटर की दूरी पर घाघरा की धारा बह रही है। ग्रामीणों का कहना है की इस बर्ष बाढ़ आयी तो दो हजार आबादी वाला गांव नदी मे विलीन हो जायेगा। शासन से महज तीस करोड़ रूपये मिल पाए हैं जिसमें रेनकोट और रैट होल को पूरा करा लिया गया है। शेष धन राशि आने का प्रशासन इंतजार कर रहा है। पर सवाल ये है कि इस तरह की लापरवाही लोगों के लिए बड़े खतरे का सामान बनती जा रही है। 
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