EXCLUSIVE: संविदा कर्मचारियों का टाइपिंग टेस्ट के बिना किया गया था प्रमोशन 

 EXCLUSIVE: संविदा कर्मचारियों का टाइपिंग टेस्ट के बिना किया गया था प्रमोशन 
Forgery in Mandi Parishad

लखनऊ में आयोजित टंकण गति की परीक्षा में फेल हुए ज्यादातर कर्मचारी 

बस्ती. उत्तर प्रदेश के मंडी परिषद में एक बड़ा फर्जीवाड़ा सामने आया है। मंडी परिषद में पिछली सपा सरकार में कुछ संविदा कर्मचारियों का प्रमोशन करके उन्हें रेग्युलर के पद पर नियुक्ति दे दी गई मगर इनका टाईपिंग टेस्ट नहीं किया गया। संविदा कर्मचारी से रेग्लुयर की नियुक्ति पाये कर्मचारी लखनऊ में जब टंकण गति की परीक्षा में जब फेल हो गये, तब जाकर इस मामले का खुलासा हुआ।


कम्प्यूटर के बारे में कुछ भी जानकारी न होने के कारण उन्हे इस पद के लिये अयोग्य घोषित कर दिया गया। बावजूद इसके उन कर्मचारियों को एक बार फिर से मौका देने की तैयारी चल रही है। कम्प्यूटर टाईपिंग में फेल बाबुओ को एक बार फिर से मौका दिया गया है कि वे कुछ दिन और तैयारी कर के परीक्षा में आयें। बस्ती के मंडी परिषद में 1993 से बतौर संविदा कर्मचारी के पद पर काम कर रहे उमेश कुमार श्रीवास्तव भी ऐसे ही कर्मचारी हैं जिन्हे प्रमोशन तो दे दिया गया मगर वे टंकण की परीक्षा नहीं पास कर सके थे। उमेश श्रीवास्तव से जब यह जानने की कोशिश की गई कि वे आखिर किस हैसियत से इस पद पर काम कर रहे हैं तो उनका कहना था कि मैं टाईपिंग की परीक्षा में फेल हो गया मगर कुछ दिन में टाईपिंग सीख कर दुबारा परीक्षा दूंगा।


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इसी कार्यालय में रवि चन्द्र श्रीवास्तव वर्ष 1996 से संविदा के पद काबिज है मगर उन्हे प्रमोशन नहीं मिला जबकि उनके जुनियर रहे जलालुददीन को शासन ने पिछले साल ही संविदा कर्मी से रेग्युलर कर्मचारी बना दिया। रवि चन्द्र ने खुद के विनयमितीकरण के लिये कई बार शासन को पत्र लिखा मगर उनकी फाईल आगे नहीं बढ़ सकी।




मंडी परिषद के एक्सईएन आरएस लाल ने बताया कि उनके विभाग से दो कर्मचारी रेग्युलर किये गये हैं जिनका टाईपिंग टेस्ट होना था मगर बाबू उमेश उसमे फेल हो गये हैं। उमेश को एक मौका और दिया जा रहा है और वे जल्द ही सबकुछ सीख कर परीक्षा में पास हो जाएंगे। ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यह है कि आखिर शासन ने इन कर्मचारियों को नियुक्ति देने से पहले आखिर टंकण का प्रमाण पत्र लेना जरूरी क्यों नहीं समझा।
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