तीन साल बाद भी नहीं मिला न्याय, तो गंगाराम ने चुना यह रास्ता

 तीन साल बाद भी नहीं मिला न्याय, तो गंगाराम ने चुना यह रास्ता
Self Immolation

गांव के तालाब से अवैध अतिक्रमण हटाने की लड़ाई लड़ रहे गंगाराम

बस्ती. गांव के तालाब से अवैध अतिक्रमण हटाने की तीन साल से लड़ाई लड़ रहे गंगाराम यादव न्याय नहीं मिलने पर मंगलवार को जिलाधिकारी कार्यालय के सामने आत्मदाह करने पहुंच गया, हालांकि पुलिस की तत्परता से उसे गिरफ्तार कर लिया। मामला बनकटी विकास खण्ड के बेहिल गांव का है। गंगाराम का कहना है कि उसने इस बावत सबसे पहला प्रार्थना पत्र 12 जुलाई 2014 को दिया था। तीन साल से उसे तरह तरह से भटकाया जा रहा है।





आरोप है कि आरोपियों को बचाने के लिये अफसर हर स्तर तक जाने को तैयार हैं। इससे पूर्व गंगाराम जिलाधिकारी कार्यालय पर 15 से 18 जून 2015 तक आमरण अनशन भी कर चुका है। अधिकारियों ने जूस पिलाकर अनशन तोड़वाते समय वादा किया था कि उसके प्रार्थना पर पूरी पारदर्शिता के साथ कार्रवाई की जायेगी लेकिन मौके पर पहुंचे अधिकारियों ने गंगाराम को ही दोषी करार दिया और कहा पहले अपना घर तुड़वा तो।


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गंगाराम ने बिना किसी देर के मजदूर लगवाकर अपना घर ध्वस्त करा दिया और राजस्व अधिकारी आधी अधूरी कार्यवाही करके चले आये। इतना ही नही इसके बावजूद तालाब पर कब्जा जारी रहा और अफसर कार्यवाही से बचते रहे। 11 जुलाई को नायब तहसीलदार ने तालाब से अतिक्रमण हटवाने को कहा था, गंगाराम से जेसीबी का इंतजाम करने को कहा गया थाा। गंगाराम जेसीबी का प्रबंध कर नायब तहसीलदार का पूरे दिन इंतजार करता रहा किन्तु वे मौके पर नही पहुंचे।


मामले की शिकायत डीएम से सीएम तक सभी से की गई, लेकिन न्याय नही मिला। उल्टे नायब तहसीलदार ने गंगाराम को झूठी शिकायतों का आदी बताकर मामले का निस्तारण कर दिया। इसी तरह गुणवत्ताविहीन निस्तारण कर अधिकारी मुख्यमंत्री कार्यालय को भी गुमराह करते रहे। गंगाराम ने कहा कि नीचे से ऊपर तक अधिकांश अफसर भ्रष्ट हैं। कोई भी पारदर्शिता के साथ समस्या का निस्तारण नही करना चाहता। ऐसे में आत्मदाह के अलावा और कोई रास्ता नही बचा है।
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