यूपी की स्वास्थ्य व्यवस्था का हाल,  जिला अस्पताल में टार्च की रोशनी में होता है मरीजों का इलाज

  यूपी की स्वास्थ्य व्यवस्था का हाल,  जिला अस्पताल में टार्च की रोशनी में होता है मरीजों का इलाज

सत्ता बदलने के बाद भी नहीं बदली सरकारी अस्पतालों की हालत

बस्ती. सूबे में निजाम बदलने के बाद भी सरकारी अस्पतालों की हालत में सुधार नहीं हो पा रहा है। बस्ती के जिला अस्पताल की हालत ऐसी  है कि अगर रात को बिजली चली जाये तो अस्पताल प्रशासन के पास ऐसी कोई व्यवस्था नहीं है कि इमरजेन्सी सेवा को सुचारू रूप से संचालित करवा सके। रात के अंधेरे में मोबाईल के टार्च की रोशनी में मरीजों का इलाज किया जाता है।

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पत्रिका की टीम ने जब जिला अस्पताल के इमरजेंसी सेवा की पड़ताल की तो पता चला कि मरीज अंधेरे में अपना इलाज कराने को मजबूर हैं। ड्यूटी पर तैनात नर्स मोबाईल से टार्च जलाकर पेसेन्ट को सुई लगाती हुई नजर आई। अस्पताल में
विकल्प के तौर पर जेनरेटर नहीं चलाया गया और  इस तरह की हालत यहां रोजाना देखने को मिलती है।  रात को बिजली जाते ही जेनरेटर नहीं चलाया जाता जिससे मरीजों का बुरा हाल हो जाता है। प्रचंड गर्मी और अंधेरे में बैठकर मरीज किसी तरह से समय गुजारते हैं। जबकि अस्पताल में रखा जेनरेटर महज शो पीस बनकर रह गया है। गरीबों के लिये सरकार द्वारा मुहैया करायी जाने वाली सुविधा बस्ती के इस सरकारी अस्पताल में फेल हो जाती है।






यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ भले ही सरकारी अस्पतालों में 24 घंटे बिजली देने की व्यवस्था  करने का निर्देश दिया हो, मगर जमीनी हकीकत काफी अलग है।  या यूं कहे कि यूपी का स्वास्थ्य  विभाग आज अंधेरे में है और जिम्मेदार लखनऊ
में बैठकर सिर्फ निर्देश पर निर्देश जारी किये जा रहे हैं।

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