मासूम माही के इलाज के लिये बस्ती वालों ने जुटाए 5 लाख, हाकिमों और हुक्मरानों ने नहीं की कोई मदद

5 साल की मासूम माही के दिल में छेद है, डॉक्टर ने कहा है कि छह महीने में अगर ऑपरेशन नहीं हुआ तो उसे बचाना होगा मुश्किल। 3 लाख का बताया था खर्च।

बस्ती. सांसद, विधायक और नेताओं व सरकारी अधिकारियों ने भी मुंह मोड़ लिया तब पांच साल की मासूम बच्ची माही की मदद के लिये जनता सामने आयी। समाज ने बच्ची के इलाज के लिये पांच लाख रुपये जुटाए। समाजसेवी राणा दिनेश प्रताप सिंह की पहल के बाद एक चैरिटी शो का आयोजन किया गया। शो का नाम ‘आओ नया साल मनाएं, बेटी माही का जीवन बचाएं’। इसमें बस्ती के हर वर्ग के लोगों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया।

बस्ती के राजेन्द्र की पांच साल की मासूम बेटी माही के दिल में छेद है। डॉक्टर ने जब यह बताया तो पिता के पैरों तले से जमीन खिसक गयी। जब इलाज के लिये डॉक्टर ने तीन लाख रुपये का खर्च बताया तो ऐसा लगा जैसे परिवार पर आसमान टूट पड़ा हो। रकम बड़ी थी और इसके इंतजाम का कोई रास्ता नहीं दिख रहा था।

 

पिता राजेन्द्र ने दफ्तरों के चक्कर लगाए और अधिकारियों से गिड़गिड़ाए लेकिन उन्हें एक अदद आयुष्मान कार्ड नहीं बन पाया, जिसे खुद प्रधानमंत्री ने गरीबों के लिये वरदान कहा है। पिता को जनप्रतिनिधियों से भी कोई मदद नहीं मिली। डॉक्टर की यह बात पिता को अंदर ही अंदर से खायी जा रही थी कि अगर छह महीने में इलाज नहीं हुआ तो उसे बचाना मुश्किल हो जाएगा। मायूस पिता के पास अपनी मासूम बेटी को तिल-तिल कर दर्द से तड़पते देखने के अलावा कोई चारा नहीं बचा था।

 

पर जब हाकिमों और रहनुमाओं ने मुंह मोड़ लिया तो मासूम माही की मदद के लिये समाज आगे आया। इसके अगुवा बने समाजसेवी राणा दिनेश प्रताप सिंह। उन्होंने मासूम माही के इलाज के वास्ते रुपये इकट्ठा करने के लिये एक चैरिटी शो के आयोजन की योजना बनायी। शो का नाम दिया गया ‘आओ नया साल मनाएं, बेटी माही का जीवन बचाएं’।

 

जब बस्ती के लोगों को शो के पीछे की कहानी पता चली तो लोगों ने इसमें बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। चैरिटी शो में अलग-अलग स्कूल की छात्र-छात्राओं ने परफॉर्म किया। 10 घंटे से भी ज्यदा देर तक चले चैरिटी शो में लोगों ने बढ़-चढकर हिस्सा लिया। राणा दिनेश प्रताप सिंह ने बताया कि जिम्मेदार पदों पर बैठे लोगों ने जब मुंह मोड़ लिया। तो बस्ती के लोग उसकी मदद को आगे आए। जो नेता अपनी निधियों से बड़ी-बड़ी इमारतें और सड़कों के गड्ढे भर सकते हैं वो एक मासूम बच्ची के दिल का छोटा छेद भरने के लिये आगे नहीं आए। कहा कि आयुष्मान कार्ड सरकार की नजर में गरीबों के लिये भले ही वरदान हो, लेकिन एक गरीब पिता अपनी बेटी के इलाज के लिये कार्ड बनाने के लिये दफ्तर-दफ्तर भटकता रहा।

By Satish Srivastava

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रफतउद्दीन फरीद
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