टूटा पुल गिरने से परेशान हैं सैकड़ों गांव के ग्रामीण, बेपरवाह है सरकार

17 फरवरी को ट्रक समेत पुल नदी में समा गया था लेकिन अब तक किसी को इसकी फिक्र नहीं 

बस्ती. बस्ती जनपद का लाइफ लाइन कहा जाने वाला कुआनों नदी पर बना अमहट पुल गिर जाने की वजह से सैकड़ों गांव के लोग प्रभावित हो रहे हैं।  प्रतिबंध के बावजूद लोडेड ट्रक के गुजरने से बीते 17 फरवरी को ट्रक समेत पुल नदी में समा गया था। लेकिन जिला प्रशासन ने अब तक इस का कोई बैकल्पिक रास्ता नहीं बनाया, इस पुल के सहारे सैकड़ों गांव के लोग शहर में पढ़ने-लिखने, रोजगार,दवा आदि के लिए आते जाते थे,वहीं जिला प्रशासन की उदासीनता को देखते हुए ग्रामीणों ने खुद ही नाव के सहारे वैकल्पिक रास्ता बना लिया है,पुल गिरने की वजह से सबसे ज्यादा पढ़ने वाले छात्र और छात्राएं प्रभावित हो रहे हैं। रोज नाव के सहारे जान हथेली पर रख कर नदी पार करते हैं और स्कूल जाते हैं, छोटी-छोटी नावों पर छमता से अधिक लोग बैठ जाते हैं, जिससे कभी भी अनहोनी हो सकती है,इस पर भी जिला प्रशासन ने आंख मूंद रखी है,जिला प्रशासन नेश्नल हाइवे पर बने पुल को वैकल्पिक रास्ता बता रहा है लेकिन छोटे-छोटे बच्चे साइकिल से स्कूल आते जाते हैं, उन को 2 से 3 किलोमीटर अधिक दूरी तय करके स्कूल जाना पड़ेगा, परिजन नेश्नल हाइवे से बच्चों को नहीं भेजना चाहहते हैं क्यों कि हाइवे पर हमेशा खतरा बना रहता है, आए दिन एक्सीडेंट भी होते रहते हैं, वहीं सेतू निगम के पीएम का कहना है की पुल की लेंथ 60 मीटर से ज्यादा है इस लिए पीडब्ल्यूडी इसे नहीं बना सकता है ,इस पुल को बनाने के लिए सेतु निगम से कहा गया है जिस पर सेतु निगम ने डिटेल बजट रिपोर्ट बना लिया है,उस का निरीक्षण दोबारा किया जा रहा है,जब स्टीमेट बन जाएगा तो उस को शासन को प्रेसित किया जाएगा। लोगों को इस बात की उम्मीद थी कि सरकार बदलने के बाद शायद सूबे के नये मुखिया यहां की बेहतरी के बारे में कुछ सोचें। पर सरकार भी बदली योगी जी सीएम भी बने लेकिन यहां की बदहाली जस की तस बनी रही।

वाराणसी उत्तर प्रदेश
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